आर्थिक समीक्षा 2024-25
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विषय सूची
जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि
राजस्थान में शहरीकरण 2024-25
शहर: ऐसा कस्बा जिसकी जनसंख्या 5,000 से अधिक हो तथा 75% से अधिक आबादी गैर-कृषि कार्यों में संलग्न हो, शहर कहलाता है।
शहरीकरण: जनसंख्या का ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर स्थानान्तरण।
संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास रिपोर्ट 2023
विश्व की आधी से अधिक आबादी शहरों में निवास कर रही है और इसकी हिस्सेदारी वर्ष 2050 तक 66.66% तक होने का अनुमान है।
शहरों और महानगरीय क्षेत्रों का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 80% योगदान है।
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या में शहरी आबादी 24.87% जबकि ग्रामीण आबादी 75.13% है।
विश्व में शहरी आबादी: 52.10%
भारत में शहरी आबादी: 31.14%
शहरीकरण लगातार बढ़ रहा है।
राजस्थान में शहरी जनसंख्या - 1.7 करोड़
इसमें 52.26% पुरुष (प्रतिशत बढ़ रहा है), 47.74% महिला है। (प्रतिशत घट रहा है)
0-6 आयु वर्ग के बच्चों की जनसंख्या
वर्ष 2011 में शहरी क्षेत्रों में बच्चों की जनसंख्या 22.35 लाख थी, जिसमें 53.37% लड़के और 46.63% लड़कियां थी।
साक्षरता:
भारत में साक्षरता - 73%
राजस्थान में साक्षरता - 66.10%
शहरी साक्षरता - 79.70%
ग्रामीण साक्षरता - 61.4%
पुरुष साक्षरता - 79.20%
महिला साक्षरता - 52.10%
लिंगानुपात:
प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या लिंगानुपात कहलाती है।
भारत में लिंगानुपात - 943
राजस्थान में लिंगानुपात - 928
शहरी लिंगानुपात - 914 (बढ़ रहा है)
ग्रामीण लिंगानुपात - 933 (बढ़ रहा है)
बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष):
शहरी बाल लिंगानुपात - 874 (घट रहा है)
ग्रामीण बाल लिंगानुपात - 892 (घट रहा है)
| सर्वाधिक शहरी लिंगानुपात | न्यूनतम शहरी लिंगानुपात | |
|---|---|---|
| क्र. सं. | जिला | लिंगानुपात |
| 1. | टोंक | 985 |
| 2. | बांसवाड़ा | 964 |
| 3. | प्रतापगढ़ | 963 |
| 4. | डूंगरपुर | 951 |
| 5. | राजसमंद | 948 |
| सर्वाधिक शहरी बाल लिंगानुपात | न्यूनतम शहरी बाल लिंगानुपात | |
|---|---|---|
| क्र. सं. | जिला | लिंगानुपात |
| 1. | नागौर | 907 |
| 2. | बीकानेर | 906 |
| 3. | भीलवाड़ा | 904 |
| 4. | बारां | 901 |
| 5. | चुरू | 899 |
| सर्वाधिक शहरी साक्षरता | न्यूनतम शहरी साक्षरता | |
|---|---|---|
| क्र. सं. | जिला | साक्षरता प्रतिशत में |
| 1. | उदयपुर | 87.5 |
| 2. | बांसवाड़ा | 85.2 |
| 3. | प्रतापगढ़ | 84.8 |
| 4. | डूंगरपुर | 84.4 |
| 5. | अजमेर | 83.9 |
Urban cities (शहरी शहर):
राजस्थान में 30 ऐसे शहर हैं, जिनकी आबादी 1 लाख से अधिक है।
सबसे बड़ा शहर: जयपुर (30 लाख से अधिक आबादी)
सबसे छोटा शहर: बांसवाड़ा
शीर्ष तीन शहर: 1.जयपुर 2.जोधपुर 3.कोटा
अंतिम तीन शहर: 28.बूंदी 29.सुजानगढ़ 30.बांसवाड़ा
Urban district (शहरी जिला):
सबसे ज्यादा शहरी आबादी वाला जिला: कोटा (60.31%)
सबसे कम शहरी आबादी वाला जिला: डूंगरपुर (6.39%)
शीर्ष शहरीकृत जिलें:
कोटा>जयपुर>अजमेर> जोधपुर> बीकानेर
सबसे कम शहरीकृत जिलें:
जालौर> प्रतापगढ़> बांसवाड़ा> बाड़मेर> डूंगरपुर
प्रवासन (Migration) (ग्रामीण से शहरी)
अपने मूल निवास को छोड़कर दूसरी जगह पर रहना प्रवासन कहलाता है।
सबसे ज्यादा प्रवासन महिलाओं द्वारा होता है। (कारण - शादी)
भारतीय स्तर पर प्रवासन: 794 लाख व्यक्ति
राजस्थान से प्रवासन - 32 लाख व्यक्ति (भारत का 4%)
पुरुषों में 49% प्रवासन का कारण रोजगार जबकि महिलाओं में 59% प्रवासन का कारण शादी है।
शहरों में घरों की स्थिति:
69% घर अच्छी स्थिति में है, 29% रहने योग्य हैं जबकि 2% घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।
राजस्थान में झुग्गी-झोपड़ी/कच्ची बस्ती के निवासी (शहरी)
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में झुग्गियों में रहने वालों की आबादी 20.68 लाख है, जो कुल शहरी आबादी का 12.13% है।
कच्ची बस्ती में रहने वाले निवासियों की सबसे अधिक जनसंख्या 3.23 लाख जयपुर नगर निगम की सीमा में हैं।
राजस्थान में शहरी विकास
विकास प्राधिकरण (Development authority):
राजस्थान में 7 विकास प्राधिकरण बनाए गए हैं -
जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर
शहरी न्यास (Urban trust): 10
अलवर, आबू, बाड़मेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, पाली, श्रीगंगानगर, सीकर, सवाई माधोपुर
जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन
फेज-1ए (मानसरोवर से चांदपोल तक)
3 जून 2015 से शुरू।
फेज-1बी (चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक)
एशियाई विकास बैंक (ADB) से वित्त पोषित।
23 सितंबर 2020 से शुरू। (2.01 किमी लंबाई)
फेज-1सी (बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक)
फेज-1डी (मानसरोवर से 200 फीट बाईपास अजमेर रोड)
फेज-2 (सीतापुर से विधाधर मार्ग)
रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी, राजस्थान (रेरा):
1 मई 2017 को राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डवलपमेंट) नियम-2017 अधिसूचित किया गया।
इन नियमों के तहत आवंटियों, प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के हितों की रक्षा करते हुए एक स्वस्थ, पारदर्शी, कुशल और प्रतिस्पर्धी रियल एस्टेट सेक्टर के विकास और संवर्धन हेतु राजस्थान सरकार द्वारा 6 मार्च 2019 को राजस्थान रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) एवं रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन किया गया।
राजस्थान आवासन मंडल (RHB - Rajasthan housing board):
स्थापना: 24 फरवरी 1970
यह एक स्वायत्तशासी निकाय है।
उद्देश्य: राज्य में आवास की आवश्यकताओं को पूरा करना।
यह समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए वहन योग्य लागत पर आवास सुविधा प्रदान करता है।
नगर नियोजन विभाग:
अगले 20 वर्षों के लिए शहरी भूमि के उपयोग हेतु मास्टर प्लान तैयार करना।
300 नगरपालिका शहरों में से 194 नगरपालिका शहरों/कस्बों के मास्टर प्लान तैयार किए जा चुके हैं।
भरतपुर, डीग, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपुतल-बहरोड़ जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR - National Capital Region) में शामिल हैं।
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM)
राज्य के 213 शहरी निकायों में लागू।
शहरी क्षेत्र में क्षमता निर्माण, कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार और सामाजिक जुड़ाव सुनिश्चित करना।
शहरी बेघरों के लिए आश्रय प्रदान करना।
छोटे एवं मध्यम कस्बों में शहरी आधारभूत ढांचे की विकास योजना:
शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शुरू।
उद्देश्य: शहरी गरीबों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना।
यह योजना जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन में चयनित शहरों/कस्बों में लागू नहीं होगी।
केंद्र (60) : राज्य (20) : शहरी स्थानीय निकाय (20)
नोडल एजेंसी: राजस्थान शहरी पेयजल, सीवरेज एवं आधारभूत निगम।
राजस्थान शहरी विकास कोष -II (Rajasthan Urban Development Fund):
राज्य में शहरी क्षेत्र के विकास के लिए।
25 अगस्त 2021 को गठन किया गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी):
2015 में शुरू।
उद्देश्य: शहरी बेघर लोगों को सस्ते घर उपलब्ध करवाना।
लाभार्थी:
आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग (वार्षिक आय ₹3 लाख)
अल्प आय वर्ग (3-6 लाख)
केंद्र (60) : राज्य (40)
स्मार्ट सिटीज मिशन
भारत सरकार द्वारा जून 2015 में शुरू।
उद्देश्य: 5 वर्षों की अवधि में भारत के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाना।
भारत सरकार द्वारा प्रत्येक शहर को ₹100 करोड़ प्रतिवर्ष एवं इसके समान ही राशि राज्य सरकार/नगरीय निकाय द्वारा 5 वर्ष के लिए दी जाएगी।
गौरतलब है कि राजस्थान के 4 शहर कोटा, अजमेर, जयपुर एवं उदयपुर को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया गया है। (Trick - KAJU)
अमृत 2.0
शुरू: 1 अक्टूबर 2021
उद्देश्य: सीवरेज, जल निकायों का जीर्णोद्धार एवं जलापूर्ति के कार्य करवाना।
लक्ष्य: सभी शहरी निकायों में सभी घरों को वर्ष 2025-26 तक "हर घर नल" द्वारा पेयजल उपलब्ध कराना।
LED लाइट प्रोजेक्ट:
स्ट्रीट लाइट में एलईडी का उपयोग करना।
यह राज्य सरकार का ऊर्जा बचत प्रोजेक्ट है।
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 (शहरी)
2 अक्टूबर 2021 को लॉन्च।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू
प्रमुख घटक: शौचालय निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए गए जल का प्रबंधन के माध्यम से पूरे भारत में स्वच्छता के बेहतर स्तर को प्राप्त करना।
इस मिशन के तहत राजस्थान के सभी शहरी स्थानीय निकायों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है।
श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना:
शुरू - 20 अगस्त 2020
पुराना नाम: इंदिरा रसोई योजना
लक्ष्य अंत्योदय-प्रण अंत्योदय-पथ अंत्योदय की संकल्पना को साकार करने के लिए शुरू।
योजना की टैगलाइन: कोई भूखा ना सोये।
प्रदेश के 240 नगरीय निकायों में 1,000 रसोईयों के माध्यम से संचालित।
इस योजना के तहत ₹8 प्रति थाली दोपहर व रात्रि भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है तथा राज्य सरकार द्वारा ₹22 प्रति थाली अनुदान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना
पुराना नाम: इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना
मनरेगा की तर्ज पर 9 सितंबर 2022 को शुरू।
उद्देश्य: शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले जरूरतमंद परिवारों के 18 से 60 वर्ष आयु के व्यक्तियों को प्रतिवर्ष 125 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराना।
राजस्थान परिवहन आधारभूत विकास निधि
वर्ष 2011-12 में गठित।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज
1 अप्रैल 1999 को राजस्थान में ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग की स्थापना की गई।
राजीविका: राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (RGAVP)
RAJEEVIKA - Rajasthan Grameen Aajeevika Vikas Parishad.
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार द्वारा अक्टूबर 2010 में स्थापित।
अध्यक्ष - मुख्यमंत्री**
उद्देश्य - ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ाकर निर्धन ग्रामीणों की आय में वृद्धि करना।
वर्तमान में भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित राजीविका द्वारा निम्नलिखित आजीविका योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है -
1. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (2011)
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागू।
उद्देश्य: 2024-25 तक 10-12 करोड़ परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ना।
पूरे राज्य भर में लागू है।
केंद्र (60) : राज्य (40)
2. राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन परियोजना:
19 फरवरी 2019 को शुरू की गई।
वित्त पोषण: विश्व बैंक द्वारा
9 जिलों के 36 ब्लाकों में संचालित।
केंद्र (60) : राज्य (40)
वन धन विकास योजना के तहत 8 जिलों (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर, कोटा, बारां, झालावाड़) में वन धन विकास केंद्रों का गठन किया गया है
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA):
सितंबर 2005 में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम पारित किया गया।
फरवरी 2006 में इसे योजनागत रुप दिया गया।
उद्देश्य - ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन करना।
इसके तहत ग्राम पंचायत के वयस्क एवं अकुशल सदस्यों को 100 दिन का रोजगार दिया जाता है।
लाभार्थियों में कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होंगी।
प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य को रोजगार दिया जाएगा।
लाभार्थियों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) किया जाता है और जॉब कार्ड प्रदान किए जाते हैं।
रजिस्ट्रेशन के 15 दिन के अंदर तथा 5 किलोमीटर के दायरे में रोजगार दिया जायेगा।
(5 किलोमीटर क्षेत्र से बाहर होने पर 10% अतिरिक्त मजदूरी दी जायेगी)
15 दिन के अंदर रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर राज्य सरकार बेरोजगारी भत्ता देगी।
कार्य का निर्धारण ग्राम पंचायत करेगी।
ठेकेदारों व मशीनों से कार्य की अनुमति नहीं है।
प्रभावी जन अभाव अभियोग निराकरण प्रणाली।
मजदूरी : सामग्री = 60:40
ग्राम सभा:
-
सामाजिक अंकेक्षण करेगी।
-
कार्य की गुणवत्ता एवं योजना की प्रगति का पर्यवेक्षण करना।
केंद्र सरकार:
-
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित।
-
मजदूरी का 100% वित्त पोषण केंद्र सरकार द्वारा
-
सामग्री का 75% वित्त पोषण केंद्र सरकार द्वारा
मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना:
इसके अंतर्गत मनरेगा के तहत 100 दिवस का रोजगार पूर्ण करने पर अतिरिक्त 25 दिवस का रोजगार राज्य मद से दिया जा रहा है।
साथ ही बारां जिले की सहरिया व खैरूआ तथा उदयपुर की कथौडी जनजाति परिवारों तथा राज्य के विशेष योग्यजन श्रमिकों को 100 दिवस का अतिरिक्त रोजगार दिया जायेगा।
मिशन अमृत सरोवर
24 अप्रैल 2022 को शुरू
उद्देश्य: देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवर (तालाबों) का निर्माण/विकास करना।
प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन):
विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूहों (PVTG GROUP) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री PVTG विकास मिशन शुरू किया गया है।
उद्देश्य: देश में 75 PVTG समूहों का विकास करना।
राजस्थान में एकमात्र जिला बारां है जहां PVTG समूह है।
बारां जिले की सभी 8 पंचायत समितियां में निवासरत आवासहीन PVTG परिवारों को ₹2 लाख आवास निर्माण हेतु एवं ₹12,000 शौचालय निर्माण हेतु एवं मनरेगा से अकुशल मानव दिवस का देय अनुमानित पारिश्रमिक राशि ₹22,950 सहित कुल राशि ₹2.35 लाख का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
2016 में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा शुरू।
लाभार्थी का चयन: सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना 2011 के आधार पर। (SECC)
इसके तहत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए ₹1,20,000 दिये जाते है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत अतिरिक्त ₹12000 शौचालय निर्माण हेतु दिए जाते हैं।
लाभार्थी मनरेगा के तहत 90 कार्यदिवसों का उपयोग घर निर्माण हेतु कर सकता है।
वित्त पोषण: केंद्र (60) : राज्य (40)
विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MLA-LAD)
Member of legislative Assembly local area development scheme:
उद्देश्य: स्थानीय आवश्यकतानुसार आधारभूत संरचना का विकास, जनोपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना।
विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र (ग्रामीण या शहरी) में प्रतिवर्ष विकास कार्यों के लिए 5 करोड रुपये की राशि दी जाती है।
इसमें से कम से कम 20% राशि SC-ST के विकास हेतु खर्च करनी होगी।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम:
(MPLAD - member of Parliament local area development programme):
शुरू - सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 23 दिसंबर 1993 से।
उद्देश्य: स्थानीय आवश्यकतानुसार आधारभूत संरचना का विकास, जनोपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना।
प्रत्येक सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये तक की राशि के विकास कार्यों हेतु जिला कलेक्टर को अनुशंसा कर सकता है।
लोकसभा के निर्वाचित सांसद अपने क्षेत्र में ही राशि खर्च कर सकते हैं।
राज्यसभा के निर्वाचित सांसद राज्य के किसी भी जिले में राशि खर्च कर सकते हैं।
मनोनीत सांसद (लोकसभा या राज्यसभा) संपूर्ण भारत में कहीं भी राशि खर्च कर सकते हैं।
देश के किसी भी हिस्से में गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में एक सांसद प्रभावित क्षेत्र में अधिकतम 1 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर सकता है।
मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम:
1986-87 में आधारभूत सुविधाओं एवं रोजगार के अवसर सृजित करने हेतु शुरू किया गया।
अलवर, खैरथल-तिजारा एवं डीग के मेव बाहुल्य 14 खंडों के 807 गांवों में संचालित।
डांग क्षेत्र विकास कार्यक्रम:
2005-06 से राजस्थान सरकार द्वारा पुनः प्रारंभ।
पूर्वी राजस्थान के 8 जिलों की 21,92 गांवों में लागू।
जिलें: भरतपुर, करौली, धौलपुर (BCD), सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ (हाड़ौती)
मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम:
2005-06 से राजस्थान सरकार द्वारा लागू।
दक्षिणी मध्य अरावली के 5 जिलों के 17,46 गांवों में लागू।
जिलें: ब्यावर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, पाली (BBCRP)
महात्मा गांधी जन-भागीदारी विकास योजना:
पुराना नाम: गुरु गोलवलकर जनभागीदारी विकास योजना।
नाम परिवर्तन: फरवरी 2020 में।
वित्त पोषण: राज्य सरकार द्वारा।
उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण व रखरखाव में जन भागीदारी सुनिश्चित करना।
| संपत्ति | सरकारी योगदान | जनभागीदारी |
|---|---|---|
| श्मशान/कब्रिस्तान | 90% | 10% |
| अन्य सामुदायिक संपत्ति | 70% | 30% |
| अन्य संपत्ति परंतु TSP क्षेत्र में | 80% | 20% |
बायोफ्यूल (जैव ईंधन)
2005 में राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बायोफ्यूल मिशन लाया गया।
2007 में राजस्थान सरकार द्वारा बायोफ्यूल नीति जारी कर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधीन बायोफ्यूल प्राधिकरण का गठन किया गया।
10 अगस्त 2019 - राजस्थान बायोडीजल नियम लागू किए गए।
बायोफ्यूल प्राधिकरण की उपलब्धियां:
- राजस्थान बायोडीजल नियम 2019 लागू किए गए।
राजस्थान बायोडीजल नियम लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
-
राजस्थान जैव ईंधन नियम 2019 के अंतर्गत राज्य में परिवहन प्रयोजन हेतु हाई स्पीड डीजल के साथ सम्मिश्रण के लिए बायोडीजल (B-100) की खुदरा बिक्री हेतु उत्पादकों, आपूर्तिकर्ताओं एवं खुदरा विक्रेताओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया गया है।
-
मनरेगा के अंतर्गत गैर खाद्य तेलीय फसलों (रतनजोत, करंज, महुआ व नीम) का पौधारोपण किया गया।
-
पौधारोपण की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया।
वर्ल्ड बायोफ्यूल डे: 10 अगस्त
बायोफ्यूल के निर्माण में उपयोगी पौधे - रतनजोत (जेट्रोफा) और करंज।
राजस्थान बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड
गठन: 2016 में।
पुनर्गठन: 11 फरवरी 2022
सांसद आदर्श ग्राम योजना:
ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा।
इसके अंतर्गत प्रतिवर्ष एक सांसद द्वारा एक गांव गोद लिया जाता है।
लोकसभा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी गांव।
राज्यसभा सांसद राज्य में कोई भी गांव।
मनोनीत सांसद संपूर्ण भारत में कोई भी गांव को गोद ले सकता है।
उद्देश्य:चयनित गांव के निवासियों के जीवन स्तर और जीवन गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार लाना।
पंचायती राज
अनुच्छेद 243 में पंचायती राज का प्रावधान।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को बगदरी गांव (नागौर) से की।
वित्त आयोग: प्रावधान अनुच्छेद 280 में।
गठन - राष्ट्रपति द्वारा।
15वां वित्त आयोग
अवधि: 2021-22 से 2025-26
अध्यक्ष: एनके सिंह
सिफारिशें: 15वें वित्त आयोग ने केंद्र द्वारा राजस्व कर में से 41% राज्यों को देने की सिफारिश की।
नोट: 15वें वित्त आयोग ने कुल अनुदान के 40% अनटाईड अनुदान तथा 60% टाईड अनुदान की सिफारिश की।
Untide अनुदान: स्थानीय निकायों की स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
जैसे स्ट्रीट लाइट, अन्य सार्वजनिक भवनों/परिसंपत्तियों जैसे - प्राथमिक/उच्च प्राथमिक स्कूल, स्वास्थ्य उपकेंद्र, सहकारी बीज और उर्वरक भंडारण केंद्र, सड़कों, पार्को, खेल मैदान, शमशान स्थलों की मरम्मत और रखरखाव हेतु
Tide (बंधे) अनुदान: केवल निश्चित क्षेत्र में उपयोग।
जैसे: स्वच्छता (खुले में शौच) एवं जल संचयन
राज्य वित्त आयोग:
73वें संविधान संशोधन के तहत इसका प्रावधान किया गया।
अब तक राजस्थान में 6 राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया है।
| आयोग - अध्यक्ष | गठन | कार्यकाल |
|---|---|---|
| प्रथम - के के गोयल | 24 अप्रैल 1994 | 1 अप्रैल 1995 से 31 मार्च 2000 |
| दूसरा - हीरालाल देवपुरा | 7 मई 1999 | 1 अप्रैल 2000 से 31 मार्च 2005 |
| तीसरा - माणिक चंद सुराणा | मई 2004 | 1 अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2010 |
| चौथा - डॉ बी डी कल्ला | 13 अप्रैल 2011 | 1 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2015 |
| पांचवा - डॉ ज्योति करण | जुलाई 2014 1 | अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 |
| छठा - प्रद्युम्न सिंह सदस्य - अशोक लाहोटी, लक्ष्मण सिंह रावत | अप्रैल 2021 | 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 |
षष्टम राज्य वित्त आयोग (2020-21 से 2024-25)
आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्य के शुद्ध कर राजस्व में से 6.75% स्थानीय स्वशासन को दिया जाए।
इसका 75.10% पंचायतों को जबकि 24.90% नगरपालिकाओं को दिया जाए।
इस राशि का 5% जिला परिषद को, 20% पंचायत समिति को तथा 75% ग्राम पंचायतों को दिया जाए।
वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 की सिफारिशों के अनुसार -
अनुदान की 55% राशि का उपयोग मूलभूत एवं विकास कार्यों के लिए,
40% राशि का उपयोग राष्ट्रीय और राज्य प्राथमिकता योजनाओं को लागू करने के लिए एवं
शेष 5% राशि विभिन्न कार्यों एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के प्रोत्साहन के लिए है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण):
2 अक्टूबर 2014 को शुरू।
वर्तमान में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित।
प्रथम चरण: 2014-2019 तक।
उद्देश्य: भारत को खुले में शौच से मुक्त करना।
राजस्थान मार्च 2018 में खुले में शौच से मुक्त हो गया।
दूसरा चरण: 2020-21 से 2024-25 तक।
उद्देश्य: गांवों में ODF की स्थिति बनाए रखना तथा ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन करना।
प्रावधान:
- व्यक्तिगत शौचालय: बीपीएल एवं एपीएल परिवारों को शौचालय निर्माण एवं उपयोग करने पर ₹12000 प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
केंद्र (60) : राज्य (40)
- सामुदायिक स्वच्छता केंद्र: के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत को 3 लाख रुपये।
इसमें 70% राशि - स्वच्छ भारत मिशन के तहत
जबकि 30% राशि - 15वें वित्त आयोग से। (टाईड अनुदान)
- ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन:
70% राशि - स्वच्छ भारत मिशन के तहत
जबकि 30% राशि - 15वें वित्त आयोग से। (टाईड अनुदान)
गोबर-धन परियोजना
यह स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण घटक है।
उद्देश्य: पशुओं के गोबर और जैविक कचरे से गांवों को साफ करके तथा ऊर्जा और खाद का उत्पादन करके आय के स्रोत विकसित करना।
पंचायत पुरस्कार
भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पंचायत दिवस 24 अप्रैल को दिए जाते हैं।
- दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार
यह देश की 3 जिला परिषद, 3 पंचायत समिति और 3 ग्राम पंचायतों को दिया जाता है।
- ग्राम ऊर्जा स्वराज विशेष पंचायत पुरस्कार
यह देश की 3 सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत को ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को अपनाने एवं उपयोग करने में उनके प्रदर्शन के लिए दिया जाता है।
- कार्बन न्यूट्रल विशेष पंचायत पुरस्कार
यह देश की 3 सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत जिन्होंने पूर्ण शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने की दिशा में अनुकरणीय कार्य किया है, को दिया जाता है।
पंचायत विकास योजना (PDP):
2015 में पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शुरू।
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों में आपसी सहयोग द्वारा विकास कार्यों को बढ़ावा देना।
इस योजना के तहत भारत सरकार द्वारा 2 अक्टूबर से 31 जनवरी तक संपूर्ण भारत में 'सबकी योजना सबका विकास' अभियान चलाया जाता है। (जन योजना अभियान)
इसके लिए 'ई-ग्राम स्वराज पोर्टल' बनाया गया है।
स्वामित्व योजना
24 अप्रैल 2020 को शुरू
उद्देश्य: गांवों का ड्रोन द्वारा सर्वे करके ग्रामीण भारत के लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक दिलाना।
श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना (ग्रमीण)
6 जनवरी 2024 से शुरू।
इसका संचालन राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रदेश के सभी चिन्हित ग्रामीण कस्बों में किया जा रहा है।
891 रसोईयों के माध्यम से संचालित।
लाभार्थी से प्रति थाली ₹8 लिए जा रहे हैं तथा प्रति थाली ₹22 राज्य सरकार द्वारा भुगतान किया जा रहा है।
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान:
2018 में शुरू।
उद्देश्य: पंचायत क्षमता संवर्धन।
केंद्र (60) : राज्य (40)
नया नाम: पुनरूत्थान राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान
31 मार्च 2026 तक संचालित किया जायेगा।
विलेज मास्टर प्लान:
आगामी 30 वर्षों के लिए शिक्षा, खेल पार्क, सरकारी भवन आदि के लिए भूमि आवंटन का प्लान तैयार करना।
राजस्व विभाग एवं पंचायत विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं।
पहले ग्राम पंचायत प्लान को मंजूरी देगी फिर ग्रामसभा अनुमोदित करेगी।
अंबेडकर भवन योजना
बजट घोषणा 2019-20 में घोषित।
नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम मुख्यालयों को छोड़कर सभी पंचायत समितियों पर अंबेडकर भवन बनाया जायेग।
ग्रामीण गैर-कृषि विकास एजेंसी (RUDA)
Rural non-farm development agency:
नवंबर 1995 में स्थापित।
उद्देश्य: ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना।
दस्तकार परिवारों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
3 मुख्य क्षेत्र: चमड़ा, ऊन व कपड़ा तथा लघु खनिज।
पोकरण पोटरी, ब्लू पोटरी, सांगानेर प्रिंट, बगरू प्रिंट, कोटा डोरिया आदि हस्तशिल्पों के लिए रूडा ने जीआई टैग प्राप्त किया है।
सशक्त और समृद्ध कृषि 2024-25
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में योगदान:
| राजस्थान | योगदान | % में परिवर्तन |
|---|---|---|
| स्थिर मूल्य पर (आधार वर्ष 2011-12) | 2.18 लाख करोड़ | +3.94% |
| प्रचलित मूल्य पर | 4.23 लाख करोड़ | +9.64% |
प्रचलित मूल्य पर कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में योगदान 26.92% है।
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में फसल, पशुधन, मत्स्य, वानिकी को शामिल किया जाता है।
2024-25 में कृषि में योगदान (प्रचलित मूल्यों पर):
| कृषि का उपक्षेत्र | योगदान (%) |
|---|---|
| पशुधन | 46.77 |
| फसल | 46.17 |
| वानिकी एवं लॉगिंग | 6.56 |
| मत्स्य | 0.51 |
भू-उपयोग 2023-24
| शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल Net Sown Area | 53.10% |
|---|---|
| बंजर भूमि Waste land | 10.26% |
| वानिकी Forest land | 8.13% |
| ऊसर तथा कृषि अयोग्य भूमि Barren and uncultivable land | 6.89% |
| अन्य चालू पड़त भूमि | 5.05% |
| कृषि के अतिरिक्त अन्य उपयोग भूमि | 5.92% |
प्रचालित जोत धारक (Operational land holdings):
| कृषि जनगणना 2010-11 | कृषि जनगणना 2015-16 | |
|---|---|---|
| कुल जोतों का क्षेत्रफल | 211.36 लाख हेक्टेयर | 208.73 लाख हेक्टेयर |
| कुल प्रचालित भूमि जोतों की संख्या | 68.88 लाख | 76.55 लाख |
| भूमि जोतों का औसत आकार | 3.07 हेक्टेयर | 2.73 हेक्टेयर |
| महिला प्रचालित जोत धारक | 5.46 लाख | 7.75 लाख (76.55 में से) |
कुल जोतों के क्षेत्रफल में कमी : -1.24%
महिला प्रचालित जोत धारक में वृद्धि: 41.94%
राजस्थान में कृषि उत्पादन
कुल खाद्यान्न उत्पादन = 267.67 लाख मैट्रिक टन। (103.71 खरीफ + 163.96 रबी)
(206.57 अनाज + 47.42 दलहन)
तिलहन उत्पादन = 96.17 लाख मैट्रिक टन। (कमी)
गन्ना उत्पादन = 4.40 लाख मैट्रिक टन।
कपास (रूई) = 18.45 लाख गाँठे। (कमी)
राजस्थान का कृषि उत्पादन में स्थान
पहला:- बाजरा, सरसों व राई, ग्वार, कुल तिलहन, पोषक अनाज। (बासगो तिल अनाज)
दूसरा:- मूंगफली (DM)
तीसरा:- सोयाबीन, चना, ज्वार, कुल दलहन (SCJ दाल)
कृषि जलवायुवीय क्षेत्रवार मुख्य फसलें
राजस्थान को 10 कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
| क्र. सं. | जलवायु क्षेत्र | सम्मिलित क्षेत्र | मुख्य फसलें |
|---|---|---|---|
| खरीफ | रबी | ||
| 1. | शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (I-A) | जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर एवं बालोतरा | बाजरा, मोंठ, तिल |
| 2. | उत्तर पश्चिमी सिंचित मैदानी क्षेत्र (I-B) | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ | कपास एवं ग्वार |
| 3. | अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (I-C) | बीकानेर, चूरू आंशिक जैसलमेर | बाजरा, मोंठ, ग्वार |
| 4. | अन्त: स्थलीय जलोत्सरण के अन्तवर्ती मैदानी क्षेत्र (II-A) | सीकर, चुरू, झुंझुनू, नागौर, डीडवाना एवं कुचामन | बाजरा, ग्वार, दलहन |
| 5. | लूनी नदी का अन्तवर्ती मैदानी क्षेत्र (II-B) | जालौर, सिरोही, पाली, ब्यावर आंशिक | बाजरा, ग्वार, तिल |
| 6. | अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदानी क्षेत्र (III-A) | अजमेर, ब्यावर, जयपुर, दौसा, टोंक, खैरथल-तिजारा, कोटपुतली-बहरोड़ | बाजरा, ग्वार, ज्वार |
| 7. | बाढ़ संभाव्य पूर्वी मैदानी क्षेत्र (III-B) | अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, डीग, सवाई माधोपुर | बाजरा, ग्वार, मूंगफली |
| 8. | अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र (IV-A) | राजसमंद, उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सिरोही आंशिक | मक्का, ज्वार, दलहन |
| 9. | आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र (IV-B) | बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़ | मक्का, ज्वार, चावल, उड़द |
| 10. | आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदानी क्षेत्र (V) | कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ (हाड़ौती) | ज्वार, सोयाबीन |
राजस्थान में पहली बार अलग से कृषि बजट कब पेश किया गया - 2022-23
| फसल | प्रथम स्थान | द्वितीय स्थान | तृतीय स्थान | राज. का योगदान |
|---|---|---|---|---|
| ग्वार | राजस्थान | हरियाणा | गुजरात | 90.36 |
| बाजरा | उत्तर प्रदेश | गुजरात | 44.66 | |
| सरसों व राई | उत्तर प्रदेश | मध्यप्रदेश | 46.13 | |
| कुल तिलहन | मध्यप्रदेश | गुजरात | 22.78 | |
| पोषक अनाज | कर्नाटक | मध्यप्रदेश | 15.66 | |
| मूंगफली | गुजरात | राजस्थान | तमिलनाडु | 18.76 |
| ज्वार | महाराष्ट्र | कर्नाटक | राजस्थान | 14.87 |
| चना | महाराष्ट्र | मध्यप्रदेश | 14.75 | |
| कुल दलहन | मध्यप्रदेश | महाराष्ट्र | 13.88 | |
| सोयाबीन | महाराष्ट्र | मध्यप्रदेश | 8.05 |
राजस्थान में कृषि संबंधित योजनाएं
मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना (2017)
उद्देश्य : किसानों द्वारा स्वयं के खेतों में गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देना।
यह योजना राज्य के सभी 10 कृषि जलवायु क्षेत्रों में लागू की गई है।
इस योजना के तहत फसलों की विभिन्न किस्मों का बीज उत्पादन 10 साल तक लिया जा रहा है।
गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना
उद्देश्य : किसानों को रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने तथा जैविक उर्वरक, जैविक खाद और नैनों उर्वरक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
प्रत्येक ब्लॉक में 50 किसानों को ₹10,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है जिससे वे पशु अपशिष्ट का उपयोग करके जैविक खाद (वर्मी-कम्पोस्ट) का उत्पादन कर सके।
कृषि क्लीनिक : किसानों को मृदा परीक्षण, फसलों की जानकारी तथा कीट/रोग उपचार संबंधी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करवाने हेतु सभी जिला मुख्यालयों पर एग्री क्लीनिक स्थापित किया जा रहे हैं।
नमो ड्रोन दीदी योजना
इस योजना के तहत 1000 महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) को ड्रोन एवं सहायक उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण एवं सतत सहयोग प्रदान किया जाएगा।
ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो यूरिया एवं कीटनाशकों के छिड़काव से उर्वरकों एवं कीटनाशकों का सटीक और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
सहकारी ऋण द्वारा समावेशी विकास
राज्य में कुल 42,283 सहकारी समितियां है जिनमें 23 संघ (फेडरेशन), 24 दुग्ध संघ, 38 उपभोक्ता थोक भंडार, 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंक, 29 केन्द्रीय सहकारी बैंक, 8592 प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां है।
राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण कारीगरों, गैर-कृषि गतिविधियों से अधिक को चलाने वाले ग्रामीण परिवारों के सदस्यों तथा अन्य पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले लघु एवं सीमांत किसानों के परिवारों को सहकारी बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
कृषि उपज गिरवी ऋण योजना
किसानों को कृषि उपज गिरवी रखने पर 3% की दर से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
कृषि अवसंरचना निधि (AIF)
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा किसानों के लिए फार्म गेट अवसंरचना तैयार करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के कृषि अवसंरचना निधि की घोषणा 15 मई 2020 को की गई।
इसके तहत ₹2 करोड़ की सीमा तक के सभी ऋणों पर 3% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज सहायता दी जाती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
2016 से प्रारम्भ की गई है।
उद्देश्य : प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाले फसल नुकसान का बीमा कवर प्रदान करना।
कृषक से निम्न प्रीमियम राशि लेकर बीमा किया जा रहा है -
रबी = 1.5%
खरीफ फसल = 2%
वाणिज्यिक/बागवानी = 5%
फसल कटाई प्रयोग करने वाले प्राथमिक कार्मिकों को प्रीमियम अनुदान एवं प्रोत्साहन राशि के भुगतान हेतु राज्य निधि योजना चल रही है।
राजस्थान में जल संसाधन (Water Resources)
राजस्थान में देश के कुल सतही जल (Surface water) का 1.16% है।
सिंचाई
स्त्रोत : नहर, ट्यूबवेल, कुआं, तालाब, अन्य।
कुल सिंचित क्षेत्र : 95,47,992 हेक्टेयर
राज्य के 39.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सतही जल परियोजनाओं से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।
7 वृहद् परियोजनाएं : नर्मदा नहर परियोजना (जालोर एवं बाड़मेर), परवन (झालावाड़), धौलपुर लिफ्ट, नवनेरा बाँध (कोटा), उच्च स्तरीय नहर-माही, पीपलखूंट उच्च स्तरीय नहर, कालीतीर लिफ्ट।
6 मध्यम परियोजनाएं : गरड़दा (बूँदी), ताकली (कोटा), गागरिन (झालावाड़), ल्हासी एवं हथियादेह (बारां), अंधेरी।
40 लघु सिंचाई परियोजनाएं।
संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (एकीकृत ERCP) :
(नया नाम : राम जल सेतु लिंक परियोजना)
राज्य : राजस्थान और मध्यप्रदेश
केंद्र सरकार की नदी जोड़ो परियोजना में शामिल।
वित्तपोषण : केंद्र (90) : राज्य (10)
मानसून के दौरान चंबल नदी के सहायक नदी बेसिनों (कुनू, कूल, पार्बती, कालीसिंध, मेज) में उपलब्ध अधिशेष (Surplus) जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीरी और पार्वती नदी बेसिनों में स्थानांतरित किया जायेगा।
यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगी जिससे लगभग 32.5 मिलियन लोग लाभान्वित होंगे।
यह परियोजना 2,51,000 हेक्टेयर नई कृषि भूमि को सिंचाई प्रदान करके और 1,52,000 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी की आपूर्ति करके कृषि उत्पादकता को बढ़ाएगी।
इन जिलों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा।
चरण-1ए :
पेयजल हेतु नवनेरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक परियोजना की DPR तैयार की गई है।
इस कार्य में कुल नदी पर रामगढ़ बैराज, पार्वती नदी पर महलपुर बैराज का निर्माण तथा रामगढ़ बैराज से महलपुर बैराज, नवनेरा बैराज (कालीसिंध नदी) से गलवा बांध, बीसलपुर बांध एवं ईसरदा बांध में पानी पहुंचाने के लिए नहर प्रणाली/पम्पिंग स्टेशन/पाइपलाइन का निर्माण शामिल है।
चरण-1बी :
मेज बांध (बूंदी)
डूंगरी बांध एवं राठौड़ बैराज (बनास नदी, सवाई माधोपुर)
बीसलपुर बांध से मोर सागर (अजमेर)
डूंगरी बांध से अलवर जलाशय तक कार्य।
डूंगरी बांध से बंध बरेठा से सुजान गंगा तक।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)
पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा।
उद्देश्य : सिंचाई, पेयजल, सुखा-निवारण, पर्यावरण सुधार, वनीकरण, रोजगार सृजन और पुनर्वास।
इसका लक्ष्य 16.17 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाना है।
उपनिवेशन विभाग
इस विभाग का मुख्य कार्य इंदिरा गांधी नहर परियोजना में भूमि क्षेत्र में भूमि आवंटित करना है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
उद्देश्य : सिंचाई कवरेज का विस्तार करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना।
इसमें हर खेत को पानी और प्रति बूंद अधिक फसल जैसी पहलों को शामिल किया गया है।
PMKSY का सूक्ष्म सिंचाई घटक :
इसके तहत बूंद-बूंद एवं फव्वारा सिंचाई पद्धति को अपनाया गया है।
रिपेयर-रिनोवेशन-रिस्टोरेशन योजना (RRR)
(मरम्मत, नवीनीकरण पुनर्स्थापन योजना)
यह योजना 2005 में भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार के सहयोग से छोटी जल संरचनाओं की मरम्मत और सुधार के लिए शुरू की गई थी।
वित्त पोषण : केंद्र (60) : राज्य (40)
वर्ष 2017-18 में इस योजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0
फरवरी 2024 में शुरू।
आगामी 4 वर्षों में 20 हजार गांवों में 5 लाख जल संचयन और जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जायेगा।
उद्देश्य- जल संरक्षण, जल संग्रहण, जल संचयन ढांचों का निर्माण और उपलब्ध जल स्त्रोतों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करना।
-
गांव में पीने के पानी की समस्या को दूर करना।
-
परंपरागत पेयजल एवं जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना।
-
सघन वृक्षारोपण कर हरित क्षेत्र को बढ़ाना।
-
सिंचित एवं कृषि योग्य क्षेत्रफल को बढ़ाना।
-
जल संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करना।
-
खाईया, खेत तालाब, खड़ीन, टांका, छोटे एनीकट, मिट्टी चेकडैम आदि जल भंडारण संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण करना।
राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना
मरू क्षेत्र के लिए राजस्थान जल क्षेत्र पुन: संरचना परियोजना
बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना-II (DRIP-II)
राष्ट्रीय जल विज्ञान योजना :
जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा।
अवधि : 2016 -17 से 2025 (8 वर्ष)
100% - केंद्र अनुदान। (विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त)
उद्देश्य : सूखा प्रबंधन, जल उपयोग दक्षता में सुधार।
इसमें स्काडा सिस्टम लगाया गया है।
SCADA - Supervisory control and data acquisition.
नोट : राज्य के 7 बांधों पर स्काडा सिस्टम लगाया गया है।
अटल भू-जल योजना
यह एक विश्व बैंक सहायता प्राप्त केंद्रीय क्षेत्रीय योजना है।
उद्देश्य : ग्राम पंचायत स्तर पर भू-जल प्रबंधन को बढ़ावा देकर और समुदाय में जल उपयोग के लिए व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से भू-जल स्तर में गिरावट को रोकना ।
अवधि :अप्रैल 2020 से मार्च 2025
राजस्थान के 17 जिलें शामिल हैं।
नर्मदा नहर परियोजना (जालोर एवं बाड़मेर)
यह देश की पहली वृहद् सिंचाई परियोजना है, जिसमें संपूर्ण कमांड क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई पद्धति को अनिवार्य किया गया है।
नवनेरा बैराज (कालीसिंध नदी, कोटा)
यह परियोजना पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) का अभिन्न हिस्सा है।
परवन वृहद् परियोजना
परवन नदी पर झालावाड़ में।
इससे कोटा, बारां एवं झालावाड़ जिलों के 637 गांवों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
कालीतीर लिफ्ट परियोजना
यह परियोजना पार्वती बांध व रामसागर बांध से धौलपुर जिले के 483 गांव व 3 कस्बो के लिए पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से शुरू की गई है।
ऊपरी उच्च स्तर नहर (माही नदी) :
बांसवाड़ा जिले में सिंचाई हेतु।
पीपलखूंट उच्च स्तर नहर परियोजना
प्रतापगढ़ जिले की पीपलखूंट तहसील के 16 गांवों में सिंचाई सुविधा हेतु।
यमुना जल समझौता
यमुना जल पर 1994 के समझौते के अनुसार ताजेवाला हेड (हथिनीकुंड बैराज) पर मानसून अवधि में 1917 क्यूसेक जल राजस्थान को आवंटित किया गया।
17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए जिसके तहत यह सहमति बनी कि ताजेवाला हेड (हथिनीकुंड बैराज) से पानी को सीकर, चूरू, झुंझुनू और राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में भूमिगत परिवहन प्रणाली के माध्यम से लाया जाएगा ताकि उनकी पेयजल और अन्य आवश्यकताओं को पूर्ण किया जा सके।
राजस्थान में बागवानी (Horticulture) :
बागवानी निदेशालय (1989-90)
केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान : बीकानेर।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)
राज्य के 31 जिलों में संचालित।
उद्यानिकी फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि हेतु संचालित।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
शुरुआत : 2007-08
उद्देश्य : कृषि क्षेत्र के लिए योजनाओं को अधिक व्यापक रूप से तैयार करना।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन से वंचित जिलों में।
केंद्र (60) : राज्य (40)
निम्नलिखित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किये गए हैं :
खजूर - सागरा भोजका (जैसलमेर)
अनार - बस्सी (जयपुर)
सीताफल - चित्तौडगढ़
फूल - सवाई माधोपुर
Juicy (Citrus) fruit - नांता (कोटा)
अमरूद - डयोडावास (टोंक)
आम - धौलपुर
संतरा - झालावाड़
कृषि सुधार के लिए प्रमुख पहल
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)
2007-08 से गेहूं एवं दलहन पर शुरू।
केंद्र (60) : राज्य (40)
NFSM न्यूट्रिसीरियल मिशन
2018-19 से शुरू।
NFSM तिलहन और टीबीओ
ट्री बोर्न ऑयलसीड्स (TBO) : जैतून, महुआ, नीम, जोजोबा, करंज एवं जट्रोफा।
नोट : NFSM वाले सभी मिशन का उद्देश्य :
प्रमाणित बीज का वितरण एवं उत्पादन, उत्पादन तकनीक में सुधार, जैव उर्वरकों को बढ़ावा देना, सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग, समन्वित कीट प्रबंधन, कृषक प्रशिक्षण।
राष्ट्रीय टिकाऊ खेती मिशन/राष्ट्रीय सतत् कृषि मिशन
उद्देश्य : जलवायु परिवर्तन अनुकूलन।
मिशन में निम्न योजनाओं का विलय किया गया है -
राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन +
राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना +
राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता प्रबन्ध परियोजना +
वर्षा आधारित क्षेत्र विकास कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन।
केंद्र : राज्य (60:40)
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)
उद्देश्य : जैविक खेती को बढ़ावा देना।
पर्यावरण अनुकूल न्यूनतम लागत तकनीकों के प्रयोग से रसायनों एवं कीटनाशकों का प्रयोग कम करना।
राष्ट्रीय कृषि विस्तार एवं तकनीकी मिशन
उद्देश्य : कृषि विस्तार का पुनर्गठन एवं सशक्तिकरण करना।
जिससे किसानों को उचित तकनीक एवं कृषि विज्ञान की अच्छी पद्धतियों का हस्तांतरण किया जा सके।
केंद्र : राज्य (60:40)
इस मिशन के अन्तर्गत तीन उप-मिशन शामिल -
(1) कृषि विस्तार पर उप मिशन
(2) बीज एवं रोपण सामग्री पर उप मिशन
(3) कृषि यंत्रीकरण पर उप मिशन
कटाई के बाद प्रबंधन
इसके अंतर्गत भंडारण इकाइयां, प्रसंस्करण संयंत्र और परिवहन नेटवर्क को शामिल किया जाता है।
राज्य में सहकारी समितियों/संस्थाओं के तहत 8,842 गोदाम है।
प्रसंस्करण :
राजस्थान निवेश संवर्धन नीति 2024 के तहत एग्रो और फूड प्रोसेसिंग में लगे उद्यमों को इकाई (Unit) द्वारा किए गए पूंजी निवेश का 50% विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है, जो अधिकतम ₹1.5 करोड़ तक होता है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना (PM-FME) :
(PM-Formalization of Microfood processing Enterprises.)
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत।
2020-21 से 2025-26 के लिए।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू।
केंद्र प्रायोजित योजना। (60:40)
उद्देश्य : देश में असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का उन्नयन करना।
नोडल एजेंसी : राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड।
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) दृष्टिकोण पर काम करेगी।
खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना या विस्तार के लिए व्यक्तिगत श्रेणी के आवेदकों को 35% की दर से अधिकतम ₹10 लाख तक के अनुदान का प्रावधान है।
विपणन (Marketing)
नए मंडी यार्डो की स्थापना।
कृषक उपहार योजना
ई-नाम के माध्यम से अपनी उपज बेचने वाले सभी व्यक्तियों को कवर करने के लिए ई-नाम पोर्टल पर 1 जनवरी 2022 से यह योजना शुरू की गई है।
₹10 हजार (या इसके गुणक) की बिक्री पर एक कूपन जारी किया जाता है।
सहकारी विपणन संरचना
राज्य में 278 क्रय-विक्रय सहकारी समितियां किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलवाने एवं प्रमाणित बीज, खाद्य एवं कीटनाशक दवाईयां उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है।
शीर्ष संस्था के रूप में राजस्थान क्रय-विक्रय सहकारी संघ (राजफैड) कार्यरत हैं।
सहकारी उपभोक्ता संरचना
उपभोक्ताओं को कालाबाजारी और बाजार में वस्तुओं की कृत्रिम कमी से बचाने के लिए जिला स्तर पर 38 सहकारी उपभोक्ता थोक भण्डार तथा शीर्ष संस्था के रूप में राजस्थान सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (कॉनफेड) कार्यरत हैं।
समृद्ध खेती के लिए पशुधन
पशुधन गणना (प्रत्येक 5 वर्ष में)
पहली : 1919 (भारत में), 1951 (राजस्थान में)
20वीं पशुधन गणना 2019 :
राज्य में कुल 568.01 लाख पशुधन एवं 146.23 लाख कुक्कुट (Poultry) है।
देश के कुल पशुधन का 10.60% पशुधन राजस्थान में है।
यहां देश का 84.43% ऊंट, 14% बकरी, 12.47% भैंस, 10.64% भेड एवं 7.24% गौवंश उपलब्ध है।
राजस्थान देश में दूध उत्पादन में 14.44% तथा ऊन उत्पादन में 47.98% योगदान देता है।
राजस्थान बकरी, ऊंट और गधों के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है।
पशुधन विकास
1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (MVU)
किसानों के घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने हेतु 24 फरवरी 2024 को शुरू की गई ।
खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम
पशु मित्र योजना
पशुपालकों को डोर स्टेप सुविधाएं प्रदान करने हेतु।
जैसे - टैगिंग, टीकाकरण, बीमा, कृत्रिम गर्भाधान।
5,000 पशु मित्र बनाए जाएंगे।
राजस्थान में ऊंट संरक्षण योजना के तहत ऊंट प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए टोडियों (बछड़ा) के जन्म पर पशुपालकों को ₹20,000 की सहायता।
पशुधन किसान कल्याण पहल
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)
यह एक उद्यमिता विकास कार्यक्रम है।
उद्देश्य : पशुपालकों को पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करना।
राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना (8th चरण)
1 फरवरी 2024
दुग्ध उत्पादकों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना।
मृत्यु एवं पूर्ण स्थायी अपंगता पर ₹5 लाख।
आंशिक स्थायी अपंगता पर ₹2.5 लाख मिलेंगे।
सरस सामूहिक आरोग्य बीमा
इसके अंतर्गत जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों द्वारा दुग्ध उत्पादकों को बीमा दिया जा रहा हैं।
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना
RCDF को दूध सप्लाई करने वाले दुग्ध उत्पादकों को इस योजना के तहत ₹5 प्रति लीटर बोनस दिया जा रहा है।
गोपालन विभाग : 13 मार्च 2014
गौशाला विकास योजना
उद्देश्य : गौशालाओं में बुनियादी ढांचे के विकास हेतु 10 लाख रुपये की सहायता।
नंदीशाला जनसहभागिता योजना
पंचायत समिति स्तर पर नंदीशालाओं की स्थापना करके आवारा नर पशुओं की समस्या हल करना।
सरकार (90) : जनता (10)
ग्राम गौशाला/पशु आश्रय स्थल जनसहभागिता योजना
ग्राम पंचायत स्तर पर।
ई-न्यूजलेटर 'गोपालक वाणी'
2024-25 में शुरू।
यह गोपालन योजना, गौशाला प्रबंधन और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मवेशी आधारित अर्थव्यवस्था में हो रहे नवाचारों की जानकारी साझा करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया जाता है।
राजस्थान में डेयरी विकास :
राज्य में 24 जिला दुग्ध उत्पादक संघ है।
शीर्ष स्तर पर राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF), जयपुर स्थापित किया गया है।
RCDF द्वारा पौष्टिक आहार, विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पादों का उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादकों को बीमा उपलब्ध करवाया जा रहा है।
दुग्ध सहकारी समितियां : 19,054
जलीय कृषि और मत्स्य पालन विकास
राजस्थान जल संसाधनों की उपलब्धता के मामले में देश में 10वें स्थान पर है, जो मत्स्य उत्पादन में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।
राज्य में दिसंबर 2024 तक 63,107 मैट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ हैं।
जलीय कृषि की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए चूरू में खारे पानी की जलीय कृषि प्रयोगशाला स्थापित की गई है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
उद्देश्य : मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को विकसित करना और मछुआरों तथा मत्स्य किसानों की आजीविका को सशक्त बनाना।
इसके तहत मत्स्य तालाब निर्माण, झींगा पालन, केज कल्चर और फीड मिल्स जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए मत्स्य किसानों को अनुदान प्रदान किया जाता है।
किसानों और कृषि श्रमिकों का कल्याण
मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
बजट घोषणा 2024-25
इसके तहत राज्य सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाभ प्राप्त करने वाले किसानों को प्रतिवर्ष ₹2,000 की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
राजस्थान कृषक समर्थन योजना
राज्य सरकार द्वारा MSP पर प्रति क्विंटल ₹125 की दर से बोनस भुगतान किया गया।
किसान कलेवा योजना
उद्देश्य : कृषि मंडियों (फल और सब्जी मंडी को छोड़कर) में अनुदानित दरों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना।
मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना
इस योजना के तहत कृषि कार्य जिसमें कृषि विपणन भी शामिल है के दौरान होने वाली मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में कृषकों, कृषि श्रमिकों और हमालों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना (2015) :
उद्देश्य : कृषि उपज मंडियों में कार्यरत श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारना।
प्रसूति सहायता : 45 दिवस का मातृत्व अवकाश, 15 दिन का पितृत्व अवकाश दिया जाएगा।
इस दौरान अकुशल श्रमिक के लिए निर्धारित प्रचलित मजदूरी दर से भुगतान किया जाएगा।
विवाह के लिए सहायता : लाइसेंसधारी महिलाओं को उनकी स्वयं की शादी और दो बेटियों की शादी के लिए ₹50,000 की सहायता।
चिकित्सा सहायता : लाइसेंसधारी हम्माल को गंभीर बीमारी होने पर अधिकतम ₹20,000 की सहायता।
छात्रवृत्ति/मेरिट पुरस्कार : लाइसेंसधारी श्रमिकों के पुत्र/पुत्री को 60% या अधिक अंक प्राप्त करने पर छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
कृषि शिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन राशि
उच्च माध्यमिक के लिए : ₹15,000 प्रति छात्रा प्रतिवर्ष
Bsc/MSC (कृषि) : ₹25,000 प्रति छात्रा प्रतिवर्ष
पीएचडी के लिए : ₹40,000 प्रति छात्रा प्रतिवर्ष
लघु और सीमांत वृद्ध किसानों के लिए सम्मान पेंशन
महिला किसान (55 वर्ष या अधिक)
पुरुष किसान (58 वर्ष या अधिक)
दोनों को प्रतिमाह ₹1,150 की पेंशन।