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प्राचीन धार्मिक आन्दोलन(जैन धर्म/बौद्ध धर्म) PYQ in Hindi - पेज 2

इस पेज पर India GK के प्राचीन धार्मिक आन्दोलन(जैन धर्म/बौद्ध धर्म) से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 64 प्रश्नों में से यह पेज 2 है।

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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- a. तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रवेश पाल साम्राज्य से हुआ था। b. बंगाल के सेन बौद्ध-विरोधी थे। c. सोलंकी, जिन्होंने गुजरात पर शासन किया, जैन-धर्म के संरक्षक थे। उपरोक्त में से कौन से सही है/हैं? कूट :

Aकेवल a
Bb व c
Ca व c
Da, b व c

सही उत्तर: a, b व c

व्याख्या (Explanation)

पाल वंश ने तिब्बत में बौद्ध धर्म के प्रसार में योगदान दिया। सेन वंश के शासक बौद्ध धर्म के प्रति विरोधी थे और हिंदू धर्म को बढ़ावा दिया। गुजरात के सोलंकी शासक जैन धर्म के संरक्षक थे।

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बौद्ध श्रमणों के आहार-सम्बन्धी अनुशासन में बौद्ध भिक्षुओं की अनुमति थी- a. भिक्षा माँगने की b. भोजन के निमन्त्रण स्वीकार करने की c. मठ में भेजी भेंट ग्रहण करने की d. किसी विशेष प्रकार के आहार के लिए अपनी इच्छा प्रकट करने की उपरोक्त में से कौन-कौन से कथन सही हैं? नीचे दिए गये कूट में चयन कीजिए- कूट :

Aa और b
Bc और d
Ca, b और d
Da, b और c

सही उत्तर: a, b और c

व्याख्या (Explanation)

बौद्ध अनुशासन में भिक्षुओं को किसी विशेष प्रकार के भोजन की मांग करने की अनुमति नहीं थी, क्योंकि यह बौद्ध धर्म के अनासक्ति और विनम्रता के सिद्धांतों के विपरीत है।

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जैन के प्रथम तीर्थांकर कौन थे -

📋 पूछा गया: Clerk Grade-II/ Jr. Asst. 2024 Paper -Ist
Aपद्मप्रभा
Bपार्श्वनाथ
Cऋषभनाथ
Dमहावीर स्वामी

सही उत्तर: ऋषभनाथ

व्याख्या (Explanation)

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ थे। वे जैन धर्म में प्रमुख स्थान रखते हैं और उनके जीवन से कई महत्वपूर्ण शिक्षाएं जुड़ी हैं।

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स्रोत: Clerk Grade-II/ Jr. Asst. 2024 Paper -Ist

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गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम धर्मोपदेश कहाँ दिया था -

📋 पूछा गया: Clerk Grade-II/ Jr. Asst. 2024 Paper -Ist
Aगया
Bकपिलवस्तु
Cबोधगया
Dसारनाथ

सही उत्तर: सारनाथ

व्याख्या (Explanation)

गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम धर्मोपदेश सारनाथ में दिया था, जिसे “धर्मचक्र प्रवर्तन” कहा जाता है। यह उपदेश उनके ज्ञान प्राप्ति के बाद दिया गया था।

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स्रोत: Clerk Grade-II/ Jr. Asst. 2024 Paper -Ist

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‘कैवल्य’ सम्बंधित है-

📋 पूछा गया: Hostel Superintendent Grade-II(SJED)-2024
Aबुद्ध दर्शन से
Bजैन दर्शन से
Cवैदिक दर्शन से
Dफ़ारसी दर्शन से

सही उत्तर: जैन दर्शन से

व्याख्या (Explanation)

कैवल्य, मोक्ष प्राप्ति से संबंधित जैन धर्म की महत्त्वपूर्ण अवधारणा है।

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स्रोत: Hostel Superintendent Grade-II(SJED)-2024

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निम्नलिखित वक्तव्यों पर विचार कीजिए- कथन (A)- बुद्ध पुनर्जन्म के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करते थे। कारण (R) - बुद्ध ने नित्य आत्मा के अस्तित्व सम्बन्धी विचार को अस्वीकार कर दिया था। नीचे दिये गए कूटों से अपने उत्तर का चयन कीजिए- कूट :

AA तथा R दोनों सही हैं, तथा A की सही व्याख्या R है
BA और R दोनों सही हैं किन्तु A की सही व्याख्या R नहीं है
CA सही है, किन्तु R गलत है।
DA गलत है, किन्तु R सही है

सही उत्तर: A गलत है, किन्तु R सही है

व्याख्या (Explanation)

गौतम बुद्ध ने बताया कि जन्म से लेकर मृत्यु तक संपूर्ण जीवन दुखमय है। मृत्यु भी दुख का अंत नहीं है, बल्कि नए दुख का आरंभ है, क्योंकि मृत्यु के बाद भी पुनर्जन्म होता है। उनका मानना था कि प्राणी की इच्छा अपूर्ण रहती है तो पुनर्जन्म लेना पड़ता है। बुद्ध ने स्थिर आत्मा के अस्तित्व को अस्वीकार कर दिया था।

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निम्नलिखित में किसमें बौद्ध संघ-जीवन के आचरण के नियमों का संग्रह है -

Aअभिधम्मपिटक
Bआचारागसूत्र
Cदिव्यावदान
Dविनयपिटक

सही उत्तर: विनयपिटक

व्याख्या (Explanation)

बौद्ध ग्रंथ जिसमें भिक्षुओं के लिए नियम शामिल हैं, विनय पिटक है। विनय पिटक बौद्ध विहित त्रिपिटक (तीन संग्रह) के तीन खंडों में सर्वाधिक प्राचीन और छोटा है और वह बौद्ध धर्म के नियमों के अनुसार मठवासी जीवन और भिक्षुओं और योगिनों के दैनिक कार्यों को नियंत्रित करता है।

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बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रन्थों पर लिखी गई विस्तृत टीकाएँ, उपदेश शास्त्र तथा विभाषा शास्त्र, किस प्रकार तैयार की गई थीं -

Aअशोक के संरक्षण में आयोजित बौद्ध संगीति में मोग्गलिपुत्त तिस्स के नेतृत्व में तैयार की गई थीं
Bकनिष्क के संरक्षण में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति में तैयार की गई थीं
Cमिलिन्द के संरक्षण में नागसेन द्वारा तैयार की गई थीं
Dवट्टगामनी अभय द्वारा आयोजित महान् भिक्षुओं की संगोष्ठी में तैयार की गई थीं

सही उत्तर: कनिष्क के संरक्षण में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति में तैयार की गई थीं

व्याख्या (Explanation)

कनिष्क के संरक्षण में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति एक महत्वपूर्ण धार्मिक सभा थी, जिसने बौद्ध धर्म के विभिन्न पहलुओं का संशोधन और प्राथमिकता देने का कार्य किया। इस संगीति में बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का विस्तृत संग्रह किया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सका कि बौद्ध उपदेश व्यवस्थित और संरक्षित रह सकें।

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बौद्ध धर्म की द्वितीय संगीति कहाँ हुई -

📋 पूछा गया: School Lecturer 2022 History (Group - C)
Aराजगृह
Bवैशाली
Cपाटलीपुत्र
Dकश्मीर

सही उत्तर: वैशाली

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स्रोत: School Lecturer 2022 History (Group - C)

20

जैन दर्शन में सर्वश्रेष्ठ एवं पूर्ण ज्ञान को कहा जाता है -

📋 पूछा गया: School Lecturer 2022 History (Group - C)
Aमति
Bश्रुति
Cअवधि
Dकैवल्य

सही उत्तर: कैवल्य

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स्रोत: School Lecturer 2022 History (Group - C)

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