शेरशाह सूरी का अन्तिम अभियान किस शासक के विरूद्ध था -
सही उत्तर: कालिंजर
व्याख्या (Explanation)
11
स्रोत: Reet 2015 level-2 SST
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर India GK के हुमायूँ से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 26 प्रश्नों में से यह पेज 2 है।
शेरशाह सूरी का अन्तिम अभियान किस शासक के विरूद्ध था -
सही उत्तर: कालिंजर
व्याख्या (Explanation)
11
स्रोत: Reet 2015 level-2 SST
हुमायूँ के मकबरे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : A. यह चार बाग शैली के बगीचे के मध्य अवस्थित है। B. लाल बलुआ पत्थर मकबरे की मुख्य निर्माण वस्तु है। सही कूट चुनिए :
सही उत्तर: A और B दोनों सही हैं।
व्याख्या (Explanation)
1570 में दिल्ली में हुमायूं की पहली पत्नी हाजी बानो बेगम द्वारा मकबरे का निर्माण किया गया था। मकबरे की वास्तुकला फारसी वास्तुकला से काफी प्रभावित है। वास्तुकार मिरक मिर्जा गियास थे, जो स्वयं फारस से थे। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित, मकबरा भारत में निर्मित होने वाला पहला उद्यान-शैली का मकबरा था। मकबरा चारबाग उद्यान शैली के केंद्र में स्थित है, जिसमें चैनलों के माध्यम से जुड़ा हुआ एक तालाब है जो कि फारसी वास्तुकला को प्रदर्शित करता है। इसे 1993 में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्मारक के रूप में अंकित किया गया था।
स्रोत: RPSC ACF FRO 2021
निम्नलिखित में से किसने हजरत-ए-आला की पदवी धारण की -
सही उत्तर: शेरशाह सूरी
निम्न में से किन अधिकारियों द्वारा शेरशाह सूरी के शासनकाल में परगना प्रशासन की देखभाग की जाती थी -
सही उत्तर: शिकदर व मुंसिफ
चुनार का प्रथम घेरा किस सन् में डाला गया -
सही उत्तर: 1532
कालिंजर के शासक का नाम था -
सही उत्तर: प्रताप रूद्र देव
हुमायूंनामा की रचना किसने की -
सही उत्तर: गुलबदन बेगम
किसने दिल्ली में हुमायूं का मकबरा बनवाया -
सही उत्तर: हाजी बेगम
हुमायूं द्वारा लड़े गए चार युद्धों का क्रम क्या है -
सही उत्तर: दौहरिया, चौसा, बिलग्राम और सरहिंद का युद्ध
किसकी मदद से हुमायूं ने दोबार सत्ता हासिल की -
सही उत्तर: ईरान के शाह और बैरम खां
व्याख्या (Explanation)
हुमायूं ने अपनी सत्ता को दोबारा हासिल करने में दो प्रमुख व्यक्तियों की मदद प्राप्त की: ईरान के शाह तहमास्प और बैरम खां। हुमायूँ ने 1540 में शेर शाह सूरी से हारने के बाद ईरान में शरण ली। वहां ईरान के शाह तहमास्प ने उसे सैन्य समर्थन प्रदान किया, जिससे हुमायूँ 1555 में दिल्ली पर पुनः कब्जा कर सका। हुमायूँ के निर्वासन के दौरान, बैरम खां ने उसे समर्थन दिया और उसकी सैन्य अभियानों में भागीदारी की। हुमायूँ की मृत्यु के बाद भी, बैरम खां ने मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।