वनस्पतियों की विविधता (Diversity of flora) का/के प्रमुख कारण है/हैं- कारण-1: मृदा में विविधता कारण-2: तापमान में अंतर कारण-3: नदियों के जल की मात्रा में अंतर नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिये-
सही उत्तर: केवल 1 और 2
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर India GK के भारत की प्राकृतिक वनस्पतियां से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 93 प्रश्नों में से यह पेज 9 है।
वनस्पतियों की विविधता (Diversity of flora) का/के प्रमुख कारण है/हैं- कारण-1: मृदा में विविधता कारण-2: तापमान में अंतर कारण-3: नदियों के जल की मात्रा में अंतर नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिये-
सही उत्तर: केवल 1 और 2
गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई क्षेत्रों में किस वृक्ष की अधिकता के कारण इसे 'सुंदरवन' कहा जाता है
सही उत्तर: सुन्दरी
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए : सूची-I (वार्षिक वर्षा) सूची-II (वनों के प्रकार) A. 100 से 200 सेमी. 1. उष्ण आर्द्र सदाबहार वन B. 50 से 100 सेमी. 2. उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन C. 50 सेमी. से कम 3. उष्णकटिबंधीय शुष्क वन D. 200 सेमी. से अधिक 4. मरुस्थलीय एवं अर्द्ध मरुस्थलीय वन
सही उत्तर: A → 2, B → 3, C → 4, D → 1
पश्चिमी घाट पर पायी जाने वाली वनस्पति का प्रकार है -
सही उत्तर: सदाहरित
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए : सूची-I (वन प्रकार) सूची-II (प्रदेश) A. उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती 1. अरुणाचल प्रदेश B. उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती 2. सह्याद्री C. अल्पाइन 3. मध्य गंगा मैदान D. उष्णकटिबंधीय सदाबहार 4. तराई
सही उत्तर: A → 4, B → 3, C → 1, D → 2
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए : सूची-I सूची-II सागौन 1. हिमालय की तराई देवदार 2. मध्य भारत सुन्दरी 3. सुन्दर वन सिनकोना 4. हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्र
सही उत्तर: A → 4, B → 1, C → 3, D → 2
भारत में चन्दन की लकड़ी के वन सबसे अधिक कहाँ पाए जाते हैं ?
सही उत्तर: नीलगिरि की पहाड़ियों में
भारत में मैंग्रोव वनस्पति का सर्वाधिक विस्तार किस राज्य में पाया जाता है ?
सही उत्तर: प. बंगाल
दलदली अथवा ज्वार-भाटा क्षेत्रों में पाए जाने वाले वन को क्या कहा जाता है -
सही उत्तर: मैंग्रोव वन
50 सेमी. से कम औसत वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सामान्यतया किस प्रकार के वन पाए जाते हैं -
सही उत्तर: मरुस्थलीय वन