देश की ऐसी पहली रोजगार योजना जिसमें रोजगार पाने के अधिकार को कानूनी आधार प्रदान किया गया है -
सही उत्तर: महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार योजना
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर India GK के भारत में गरीबी एवं बेरोजगारी से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 24 प्रश्नों में से यह पेज 2 है।
देश की ऐसी पहली रोजगार योजना जिसमें रोजगार पाने के अधिकार को कानूनी आधार प्रदान किया गया है -
सही उत्तर: महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार योजना
लाकड़ावाला फार्मूला सम्बन्धित है -
सही उत्तर: गरीबी रेखा
स्रोत: Computor Exam 2018
मानव गरीबी सूचकांक (एच.पी.आई.) वंचन को समग्र सूचकांक के रूप में मापता है -
सही उत्तर: दीर्घायु, ज्ञान और जीवन स्तर
स्रोत: CET 2022 (Graduate) 08 January 2023 Shift-1
आय की असमानता को मापा जा सकता है - (i) लोरेन्ज़ वक्र (ii) गिनी गुणांक (iii) गरीबी रेखा (iv) सापेक्ष गरीबी सही विकल्प चुनें -
सही उत्तर: केवल (i), (ii) और (iv)
स्रोत: CET 2022 (Graduate) 07 January 2023 Shift-2
बहुआयामी गरीबी सूचकांक की अवधारणा किस वर्ष शुरू की गई थी -
सही उत्तर: 2010
स्रोत: CET 2022 (Graduate) 07 January 2023 Shift-1
गरीबी रेखा -
सही उत्तर: निरपेक्ष गरीबी का माप है।
भारत के कृषि क्षेत्र में पायी जाने वाली बेरोजगारी है -
सही उत्तर: मौसमी बेरोजगारी
स्रोत: Evaluation Officer 2020
निम्नलिखित में से कौन सी समिति भारत में गरीबी के आंकलन से सम्बन्धित है -
सही उत्तर: विजय केलकर समिति
स्रोत: Lab Assistant Exam 2022 (Science) 29 June 2022 Paper-1
भारत में ग्रामीण गरीबी को दूर करने में निम्न में से कौनसी योजना स्व-रोजगार से संबंधित है -
सही उत्तर: ग्रामीण विकास की समन्वित योजना
व्याख्या (Explanation)
ग्रामीण विकास की समन्वित योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार के अवसर प्रदान करने और गरीबी उन्मूलन में सहायता करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
निम्न में से कौन गरीबी के आंकलन से संबंधित नहीं है -
सही उत्तर: जे. के. मेहता
व्याख्या (Explanation)
वी.एम. दांडेकर और एन. रथ (1971) ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) डेटा के आधार पर भारत में गरीबी का पहला व्यवस्थित मूल्यांकन किया। भारत में गरीबी का पहला अनुमान लकड़ावाला समिति ने वर्ष 1993 में लगाया था और इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर डी.टी. लकड़ावाला ने की थी। 1972-73 में मिन्हास को वित्त आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। उन्होंने वर्ष 1974 में गरीबी रेखा का आकलन किया था। जे.के. मेहता का भारत में गरीबी के आकलन से कोई सरोकार नहीं है। वह एक भारतीय दार्शनिक और अर्थशास्त्री थे। 1968 में, वह भारतीय आर्थिक संघ के अध्यक्ष बने। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया।