1919 में ‘राजस्थान सेवा संघ’ की स्थापना कहां की गयी -
सही उत्तर: वर्धा
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान में किसान तथा आदिवासी आन्दोलन से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 296 प्रश्नों में से यह पेज 20 है।
1919 में ‘राजस्थान सेवा संघ’ की स्थापना कहां की गयी -
सही उत्तर: वर्धा
किसके नेतृत्व में शेखावटी किसान आंदोलन में महिलाओं ने भाग लिया -
सही उत्तर: किशोरी देवी
किसान आंदोलन के जनक थे-
सही उत्तर: विजयसिंह पथिक
सही सुमेलन नहीं है -
सही उत्तर: कांगड़ कांड-अलवर
व्याख्या (Explanation)
बीकानेर के किसान आंदोलन के इतिहास की अंतिम व महत्वपूर्ण घटना कांगड़ कांड (रतनगढ) थी यह आंदोलन जागीरदारों के अत्याचारों से उपजा स्वस्फूर्त किसान आंदोलन था 1946 मे खरीब की फसल नष्ट होने के कारण अकाल की स्थिति पैदा हो गई थी अकाल पड़ने के बाद भी 1946 में किसानों से कर वसूली का प्रयास किया गया था जिसके कारण किसानों ने आंदोलन किया।
रानी भीलनी व उदी मालन का सम्बंध किस किसान आंदोलन से था -
सही उत्तर: बिजौलिया किसान आंदोलन
जुलाई, 1921 में मोतीलाल तेजावत ने भील आंदोलन कहां से आरम्भ किया -
सही उत्तर: झाड़ोल
व्याख्या (Explanation)
झाडोले में मोती लाल तेजावत ने एकी आंदोलन का आरम्भ किया। इसे भोमाराम भील आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है।
स्रोत: JSA Physics-2019(Rajasthan Gk)
रूपाजी एवं कृपाजी शहीदों का सम्बंध किस किसान आन्दोलन से है -
सही उत्तर: बेगूं
स्रोत: JSA Serology-2019(Rajasthan Gk)
भूपसिंह का सम्बन्ध किस किसान आंदोलन से था -
सही उत्तर: बिजौलिया किसान आंदोलन
स्रोत: JSA Ballistic-2019(Rajasthan Gk)
गांधी जी ने किस पत्र में नीमूचणा हत्याकांड को दूसरे जलियांवाला बाग हत्याकांड की संज्ञा दी -
सही उत्तर: यंग इंडिया
व्याख्या (Explanation)
1924 में अलवर के महाराणा जयसिंह ने लगान की दरों में वृद्धि कर दी। इसके विद्रोह में अलवर के किसान आन्दोलन करते है। 14 मई 1925 को नीमूचाणा ग्राम में एकत्रित होते है। पुलिस द्वारा गोली बारी की जाती है जिसमें सैंकडों किसान मारे जाते है।
‘नीमूचाणा हादसा’ कब हुआ था -
सही उत्तर: 14 मई 1925
व्याख्या (Explanation)
अलवर रियासत में 1924 में भू बंदोबस्त हुआ। इसमें लगान 40 फीसदी बढ़ा दिया गया। साथ ही कुछ किसानों की रियासती जमीन खत्म कर दी। इतना भारी लगान किसानों की कमर तोड़ने वाला था। नीमूचाणा में किसान गोविंद सिंह और माधो सिंह ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। 1925 में लगान के विरोध में नीमूचाणा में करीब 200 किसानों ने सभा कर पुकार नाम की पुस्तिका का प्रकाशन किया, जिसमें किसानों की समस्याएं उठाई गईं। आंदोलन बढ़ता गया और 14 मई 1925 को नीमूचाणा में किसानों की बड़ी सभा बुलाई गई। अलवर नरेश ने छाजू सिंह के नेतृत्व में अपनी मिलिट्री भेज सभा पर फायरिंग कराई। इसमें करीब डेढ़ हजार किसानों की मौत हुई। उनके गांव जला दिए गए। इस वीभत्स नरसंहार की पूरे देश में जलियांवाल बाग हत्याकांड से तुलना की गई।
स्रोत: Junior Instructor(welder)