प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित है -
सही उत्तर: मेवाड़
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की चित्र शैलियां से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 301 प्रश्नों में से यह पेज 24 है।
प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित है -
सही उत्तर: मेवाड़
पिछवाई चित्रकला कहां की प्रसिद्ध है -
सही उत्तर: नाथद्वारा
निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार अलवर शैली की चित्रकला से संबंधित नहीं है -
सही उत्तर: नानकराम
स्रोत: RAS/RTS Comb. Comp. (Pre) Exam 2018
रूक्नुद्दीन राजस्थानी चित्रकला की किस शैली से सम्बद्ध था -
सही उत्तर: बीकानेर शैली
स्रोत: Sr Teacher Gr II Special Edu. Comp. Exam 2015 (G.K.)
जमनादास, छोटेलाल, बक्साराम व नन्दलाल चित्रकला की किस शैली से संबद्ध हैं -
सही उत्तर: अलवर शैली
व्याख्या (Explanation)
अलवर शैली के प्रवर्तक राव राजा बख्तावरसिंह थे। चित्रकार: गुलाम अली, अला मिर्ज़ा देहलवी, नत्था सिंह, जमनादास, नंदलाल, छोटेलाल, बक्शा राम, डालचंद, सालिग्राम, बलदेव।
किस चित्र शैली में मतिराम रचित, 19वीं शताब्दी की हिन्दी साहित्यिक रचना ‘रसराज’ का चित्रण हेतु विषय के रूप में प्रयोग किया गया है -
सही उत्तर: मारवाड़
व्याख्या (Explanation)
मारवाड़ चित्रकला शैली में मतिराम द्वारा रचित 19वीं शताब्दी की हिन्दी साहित्यिक कृति रसराज को चित्रण के विषय के रूप में उपयोग किया गया है ।
स्रोत: Lect. College Edu. EXAM 2014(GK)
बीकानेर के मथेरण समुदाय के सम्बन्ध में दिए निम्न कथनों को सावधानी से पढ़िये - बीकानेर चित्र शैली के विकास में इनका प्रचुर योगदान है - महाराजा अनुपसिंह के काल में मथेरण समुदाय को संरक्षण मिला। मथेरण विशेषकर शासकों के व्यक्तिगत चित्र उकेरने के लिए जाने जाते हैं। मथेरण, जो अपने आप को महात्मा भी कहते हैं, एक जैन समुदाय है। उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं -
सही उत्तर: ये सभी
राजस्थानी चित्रकला का प्राचीनतम केन्द्र माना जाता है -
सही उत्तर: मेवाड़
स्रोत: Asstt. Jailor Exam 2013(paper-II)
कोटा चित्रकारी शैली की विषयवस्तु मुख्यतः है -
सही उत्तर: शिकार के दृश्य
स्रोत: RSMSSB Lab Assistant Exam 2016
‘पिछवाई पेन्टिंग’ का सम्बन्ध निम्न में से किस से है -
सही उत्तर: नाथद्वारा
व्याख्या (Explanation)
मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के शासन काल में नाथद्वारा चित्रकला का स्वतंत्र विकास प्रारम्भ हुआ। भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों (वल्लभ सम्प्रदाय) में दीवारों पर तथा कपड़े के पर्दे पर चित्र बनाये गये जिन्हें ‘पिछवाई‘ कहा जाता है।