अभिलेख, जो प्रतिहार शासक कक्कुक की आभीरों पर विजय का दावा करता है –
सही उत्तर: घटियाला अभिलेख
स्रोत: RSMSSB VDO Mains 2022
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 276 प्रश्नों में से यह पेज 13 है।
अभिलेख, जो प्रतिहार शासक कक्कुक की आभीरों पर विजय का दावा करता है –
सही उत्तर: घटियाला अभिलेख
स्रोत: RSMSSB VDO Mains 2022
‘कान्हड़ दे प्रबन्ध’ नामक काव्य का लेखक कौन है -
सही उत्तर: पद्मनाभ
स्रोत: Police SI 13 September 2021 (Gk)
किसानों से वसूल की जाने वाली विविध लाग-बागों का उल्लेख किसमें प्राप्त होता है -
सही उत्तर: चीकली ताम्रपत्र 1483 ई.
व्याख्या (Explanation)
चीकली ताम्र-पत्र (1483 ई.) : इससे किसानों से वसूल की जाने वाली ‘विविध लाग-बागों’ का पता चलता है। इसमें पटेल, सुथार एवं ब्राह्मणों द्वारा खेती किए जाने का वर्णन है।
भारत का प्रथम ‘डिजिटल आर्काइव’ राजस्थान के किस शहर में स्थित है -
सही उत्तर: बीकानेर
स्रोत: RSMSSB LDC (12-08-18) Paper-1
‘दि अर्ली चौहान डाइनेस्टीज’ राजस्थान के किस प्रमुख इतिहासकार की रचना है -
सही उत्तर: डा. दशरथ शर्मा
“राव जैतसी रो छन्द” के रचयिता हैं –
सही उत्तर: बीटू सूजा
स्रोत: VDO Exam 2nd Shift 27 Dec 2021
राजस्थान राज्य अभिलेखागार कहां स्थित है -
सही उत्तर: बीकानेर
किसानों से वसूल की जाने वाली विविध लाग-बागों का उल्लेख किसमें प्राप्त होता है -
सही उत्तर: चीकली ताम्रपत्र 1483 ई.
राजस्थान में रियासतकालीन सिक्कों के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए - अ. बांसवाड़ा रियासत में ‘सालिमशाही’ सिक्कों का प्रचलन था। ब. मुगलकाल में जैसलमेर में चांदी का ‘मुहम्मदशाही’ सिक्का चलता था। स. प्रतिहार शासक मिहिरभोज ने मारवाड़ में ‘आदिवराह’ सिक्के चलाये थे। द. धौलपुर राज्य के सिक्के ‘चमंचाशाही’ कहलाते थे क्योंकि उन पर तमंचे का चिन्ह लगाया जाता था।
सही उत्तर: उपरोक्त सभी सही हैं।
व्याख्या (Explanation)
बांसवाड़ा रियासत में सालिमशाही सिक्कों का प्रचलन था। 1870 में महारावल लक्ष्मण सिंह ने सोने, चांदी और तांबे के सिक्के बनवाए, जिन्हें लक्ष्मणशाही सिक्के कहा जाता था। इन सिक्कों के दोनों तरफ सांकेतिक अक्षर अंकित थे, जो शिव के नाम के सूचक माने जाते थे। 1904 ई. में सालिमशाही और लक्ष्मणशाही सिक्कों के स्थान पर कलदार का प्रचलन शुरू हो गया। स्थानीय सिक्के के बनने के पहले जैसलमेर में चांदी का मुहम्मद शाही सिक्का चलता था। 1756 से महारावल अखयसिंह ने अपनी टकसाल में ‘अखयशाही’ मुद्रा को बनवाया। धौलपुर में 1804 ई. से टकसाल आरम्भ हुई जिससे रुपये और अठन्नियां बनाई गईं। यहां से प्रचलित सिक्के को तमंचा शाही कहते हैं क्योंकि उस पर तमंचे का चिह्न लगाया जाता था। प्रतिहार शासक मिहिरभोज ने मारवाड़ में आदिवराह सिक्के चलाये थे।
महान कवि सूर्यमल के बारे में निम्न में से कौन सा कथन गलत है -
सही उत्तर: वे मेवाड़ के निवासी थे।
स्रोत: Rajasthan Patwar 2021 (23 Oct 2021) 1st shift