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राजस्थान में परंपरागत जल प्रबंधन PYQ in Hindi - पेज 2

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान में परंपरागत जल प्रबंधन से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 30 प्रश्नों में से यह पेज 2 है।

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राजस्थान के किस जिले में ‘खड़ीन’ जल संरक्षण की प्रचलित विधि है -

📋 पूछा गया: Raj. State and Sub. Services Comb. Comp. (Pre) Exam - 2024
Aनागौर
Bबीकानेर
Cजैसलमेर
Dपाली

सही उत्तर: जैसलमेर

व्याख्या (Explanation)

खड़ीन का प्रचलन 15वी शताब्दी में जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों ने किया था। यह ढाल युक्त भूमि पर दो तरफ मिट्टी की दीवार(पाल) और तीसरी तरफ पक्का अवरोध बनाकर निर्मित की जाती है। पाल 2 से 4 मीटर लंबी होती है। खड़ीन का विस्तार 5 से 7 किलोमीटर तक होता है। खड़ीन के लिए जमीन राजा उपलब्ध कराता था जिस पर एक चौथाई लगान देना होता था।

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स्रोत: Raj. State and Sub. Services Comb. Comp. (Pre) Exam - 2024

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निम्नलिखित में से कौन सी जल संरक्षण की विधि नहीं है -

📋 पूछा गया: Junior Instructor (Fitter) Exam 2024
Aवर्षा जल संग्रहण
Bभूजल दोहन
Cसिंचाई क्षमता का विकास करना
Dजल के दुरूपयोग को रोकना

सही उत्तर: भूजल दोहन

व्याख्या (Explanation)

जल संरक्षण में जल के पुनर्भरण और बचत की तकनीकों का उपयोग किया जाता है। भूजल दोहन, जल संरक्षण की विधि नहीं बल्कि जल के अत्यधिक उपयोग से संबंधित प्रक्रिया है।

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स्रोत: Junior Instructor (Fitter) Exam 2024

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निम्नांकित में से कौन-सा जल संरक्षण प्रणाली से संबंधित नहीं है -

📋 पूछा गया: Junior Instructor (ED) Exam 2024
Aएनीकट
Bरिसाव टैंक
Cभूतल बंध
Dऊँचे टैंक

सही उत्तर: ऊँचे टैंक

व्याख्या (Explanation)

ऊँचे टैंक जल संरक्षण प्रणाली का हिस्सा नहीं हैं, जबकि एनीकट, रिसाव टैंक और भूतल बंध जल संरक्षण से संबंधित हैं।

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स्रोत: Junior Instructor (ED) Exam 2024

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खडीन मिलते हैं-

📋 पूछा गया: Junior Instructor(CLIT) Exam 2024
Aपूर्वी राजस्थान में
Bदिल्ली प्रदेश में
Cहरियाणा में
Dपश्चिमी राजस्थान में

सही उत्तर: पश्चिमी राजस्थान में

व्याख्या (Explanation)

खड़ीन का प्रचलन 15वी शताब्दी में पश्चिमी राजस्थान में जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों ने किया था। यह ढाल युक्त भूमि पर दो तरफ मिट्टी की दीवार(पाल) और तीसरी तरफ पक्का अवरोध बनाकर निर्मित की जाती है। पाल 2 से 4 मीटर लंबी होती है। खड़ीन का विस्तार 5 से 7 किलोमीटर तक होता है।

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स्रोत: Junior Instructor(CLIT) Exam 2024

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राजस्थान के थार रेगिस्तानी क्षेत्र में सामान्यतया _______के लिए ‘टान्का’ एक परंपरागत तकनीक है।

📋 पूछा गया: CET 2024 (Graduate) 28 September 2024 Shift-1
Aपशु पालन
Bकृषि औद्योगिक कार्य प्रणाली
Cकृषि
Dवर्षा जल संग्रहण

सही उत्तर: वर्षा जल संग्रहण

व्याख्या (Explanation)

राजस्थान के मरुस्थलीय ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षाजल को संग्रहित करने के लिए कुंड निर्मित किये जाते है। जिन्हे टांका भी कहते हैं। इसमें संग्रहीत जल का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल के लिये किया जाता हैं। यह एक प्रकार का छोटा भूमिगत सरोवर होता है। जिसको ऊपर से ढँक दिया जाता है।

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स्रोत: CET 2024 (Graduate) 28 September 2024 Shift-1

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_____ राजस्थान की ‘चौका प्रणाली’ का मुख्य उद्देश्य है।

📋 पूछा गया: CET 2024 (Graduate) 28 September 2024 Shift-1
Aपानी की कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों में पानी के संसाधनों का प्रबंधन करना
Bराजस्थान में भोजन प्रणाली का प्रबंधन करना
Cमधुमक्खी पालकों को सहयोग करना
Dपशु पालन को बढ़ाना

सही उत्तर: पानी की कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों में पानी के संसाधनों का प्रबंधन करना

व्याख्या (Explanation)

राजस्थान की चौका प्रणाली का उद्देश्य पानी की कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों में जल संसाधनों का प्रबंधन करना है।

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स्रोत: CET 2024 (Graduate) 28 September 2024 Shift-1

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वर्षा जल संरक्षण के लिए रानीसर टांका कहाँ स्थित है -

📋 पूछा गया: Rajasthan Police Constable Exam 2024 ( SHIFT - L1)
Aजैसलमेर
Bजोधपुर
Cबाडमेर
Dबीकानेर

सही उत्तर: जोधपुर

व्याख्या (Explanation)

रानीसर टांका जोधपुर में स्थित एक ऐतिहासिक जल संरचना है। इसका निर्माण वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए किया गया था। यह जोधपुर के पुराने जल संरक्षण उपायों में से एक है। जोधपुर में रानीसर और पदमसर, रणथंभौर के वन तालाब, सुखसागर टैंक और पद्मिनी टैंक कुछ प्रसिद्ध हैं।

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स्रोत: Rajasthan Police Constable Exam 2024 ( SHIFT - L1)

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निम्न में से कौन सी परम्परागत जल संरक्षण की विधि नहीं है -

📋 पूछा गया: Lect. College Edu. EXAM 2014(GK)
Aनाड़ी
Bखड़ीन
Cतालाब
Dटोबा

सही उत्तर: तालाब

व्याख्या (Explanation)

राजस्थान में तालाब जल संरक्षण की पारंपरिक विधि नहीं है। जल संसाधन संरक्षण प्राचीन काल से किया जा रहा है इन परम्परागत विधियों में नाड़ी, बावड़ी, जोहड़, झालरा, टांका, टोबा, एनिकट आदि प्रमुख हैं।

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स्रोत: Lect. College Edu. EXAM 2014(GK)

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कथन (अ) वर्षा जल संग्रहण जल संरक्षण की एक प्रभावशील विधि है। कारण (ब) पश्चिमी राजस्थान में परम्परागत जल संरक्षण की विधियां अभी भी प्रभावशील हैं।

Aअ और ब दोनों सही हैं और ब, अ का सही स्पष्टीकरण है।
Bअ और ब दोनों सहीं हैं। किन्तु ब, अ का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
Cअ सही है ब गलत है।
Dअ गलत है ब सही है।

सही उत्तर: अ और ब दोनों सहीं हैं। किन्तु ब, अ का सही स्पष्टीकरण नहीं है।

व्याख्या (Explanation)

वर्षा जल संग्रहण जल संरक्षण की एक प्रभावशाली विधि है। पश्चिमी राजस्थान में परम्परागत जल संरक्षण की विधियां अभी भी प्रभावशील हैं। ये दोनों ही कथन सत्‍य हैं लेकिन इनका आपस में कोई संबंध नहीं है।

20

शेखावाटी भू-भाग में कूएं स्थानीय भाषा में किस नाम से जाने जाते हैं -

Aबावड़ी
Bजोहड़
Cबेरा
Dखूं

सही उत्तर: जोहड़

व्याख्या (Explanation)

नाड़ी एक प्रकार का पोखर होता है। जल प्रबंधन की यह विधि पश्चिम राजस्थान प्रचलित हैं। अलवर एवं भरतपुर जिलों में इसे ‘जोहड़’ कहते है।

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