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‘चंदनबाला रास’ काव्यरूप री दीठ सूं किण भांत रो काव्य है -
वै कुणसा कवि है जकां री भगति अर चमत्कार री वजै सूं लोग बांनै ‘परमेसर’ रै समान बतावण लागा हा -
राजस्थानी कहाणीकार रै तौर पर किणरी पिछांण नीं है -
‘बीसलदेव रासो’ में कुणसो रस प्रधान है -
कुणसा रचनाकार कवि रै साथै-साथै आछा गद्यकार भी हा -
‘रूख सतसई’ रा रचनाकार है -
राजस्थानी में रामकथा रै आधार पर ‘रामायण’ सिरैनांव सूं आख्यान काव्य कुण लिख्यौ -
कथेतर गद्य री पोथी ‘ओळूं री अखियातां’ रा रचनाकार है-
आदिकालीन चारण शैली रा रचनाकार नीं है-
‘बीसलदेव रासो’ किण भांत रो काव्य है -