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राजस्थान सरकार की प्रमुख नीतियां

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विषय सूची

वन नीति

प्रथम वन नीति: फरवरी 2010

राजस्थान पहला राज्य था जिसने स्वयं की वन नीति अपनायी।

नवीन राजस्थान राज्य वन नीति, 2023 बनाई है जिसमें राज्य के वनों और जैव विविधता संरक्षण हेतु अत्यावश्यक सिद्धांत और दिशा-निर्देश कार्य क्षेत्र में कुशलता बढ़ाएंगें ।

सड़क विकास नीति

प्रथम सड़क विकास नीति: 1994

नवीनतम सड़क विकास नीति: 2013

राजस्थान पहला राज्य था जिसने स्वयं की सड़क विकास नीति अपनायी।

खनिज नीति

प्रथम खनिज नीति:- 1978

नवीनतम खनिज नीति-2024

इस नीति के माध्यम से, राज्य में प्रचुर खनिज संसाधनों का उचित उपयोग करते हुए विकास को प्रोत्साहन देना है।

पशुधन एवं डेयरी विकास नीति: 2019

सिलिकोसिस नीति : 3 अक्टूबर 2019

राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति : 17 दिसम्बर 2019

सौर ऊर्जा नीति

प्रथम सौर ऊर्जा नीति : अप्रैल 2011

राजस्थान सौर ऊर्जा नीति जारी करने वाला भारत का पहला राज्य बना।

नवीनतम सौर ऊर्जा नीति : 18 दिसंबर 2019

लक्ष्य: 2024 तक 30,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन।

प्रथम पवन ऊर्जा नीति : 18 जुलाई 2012

पवन और हाइब्रिड ऊर्जा नीति : 18 दिसंबर 2019

पर्यटन नीति

विश्व पर्यटन दिवस : 27 सितंबर

प्रथम पर्यटन नीति : 27 सितंबर 2001

नवीनतम पर्यटन नीति : राजस्थान पर्यटन नीति-2025

मैन्युफैक्चर्ड सैंड नीति 2020

25 जनवरी 2021 को जारी।

राजस्थान एम-सैंड नीति जारी करने वाला भारत का पहला राज्य बना।

नवीनतम राजस्थान एम-सैंड नीति 2024

मैन्युफैक्चर्ड सैंड का निर्माण - ग्रेनाइट से।

मैन्युफैक्चर्ड सैंड : यह बजरी का विकल्प है, जिसके उपयोग से नदियों से निकलने वाली बजरी पर हमारी निर्भरता खत्म होगी और साथ ही प्रदेश के खनन क्षेत्रों में खानों से निकलने वाले वेस्ट (कचरे) की समस्या का भी समाधान होगा और बड़ी संख्या में एम-सैंड इकाइयां लगने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

इस नीति के तहत राज्य के राजकीय निर्माण कार्यों में न्यूनतम 25% एम-सैंड का उपयोग अनिवार्य है, जिसे उपलब्धता के आधार पर 50% तक बढ़ाया जा सकता है।

नई एम-सैंड इकाई स्थापित करने के लिए न्यूनतम 3 करोड़ रुपए की नेटवर्थ तथा 3 करोड़ रुपए का टर्नओवर अनिवार्य है।

साथ ही इस क्षेत्र (क्रशिंग) में 3 साल का अनुभव या संयुक्त उपक्रम में भागीदारी का अनुभव हो।

इस नीति में एम-सैंड इकाईयों को उद्योग का दर्जा दिया गया है।

राजस्थान आयुष नीति 2021 : 9 फरवरी 2021

प्रथम महिला नीति: 8 मार्च 2000

नवीनतम महिला नीति: 11 अप्रैल 2021

औद्योगिक विकास

प्रथम औद्योगिक विकास नीति:- 1978

नवीनतम औद्योगिक विकास नीति (सातवीं):- 1 जुलाई 2019

इको टूरिज्म पॉलिसी

पहली इको टूरिज्म पॉलिसी : 2010

नवीनतम इको टूरिज्म पॉलिसी:- 15 जुलाई 2021

यह नीति पारिस्थितिकी पर्यटन के तीन आधारभूत सिद्धांतों- संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता एवं व्याख्या पर आधारित है।

यह नीति अगले 10 वर्षो (2030 तक) के लिए तैयार की गई है।

इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति:- दिसंबर 2021

राजस्थान फिल्म प्रोत्साहन नीति 2022:- 18 अप्रेल 2022 (अवधि- 5 साल)

फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति

राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति: 22 जुलाई 2022

नवीनतम फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति 2025

इलेक्ट्रिक व्हीकल (ई-व्हीकल) पॉलिसी

1 सितम्बर 2022 को लागू।

5 वर्ष की अवधि के लिए लागू।

राजस्थान की प्रथम हस्तशिल्प नीति:

17 सितंबर 2022 को उद्योग मंत्री शकुंतला रावत द्वारा जारी।

31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी।

उद्देश्य: विलुप्त होती परंपरागत हस्तकलाओं को पुनर्जीवित करना।

आगामी 5 वर्षों में 50,000 से अधिक रोजगार उपलब्ध करवाएं जाएंगे।

राजस्थान MSME नीति

राजस्थान MSME नीति : 17 सितंबर 2022

नवीनतम राजस्थान एमएसएमई नीति 2024

राजस्थान MSME दिवस : 17 सितंबर

इन्वेस्ट राजस्थान समिट (7-8 अक्टूबर 2022) के दौरान उद्योग मंत्री शकुंतला रावत ने कहा कि राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।

नॉन-रेजिडेंट राजस्थानी पॉलिसी ऑफ राजस्थान

7 अक्टूबर 2022 को राजस्थान की पहली NRR नीति जारी की गई।

नवीनतम नॉन-रेजिडेंट राजस्थानी पॉलिसी ऑफ राजस्थान-2025

राष्ट्रीय शिक्षा नीति:- 29 जुलाई 2020

के कस्तूरीरंगन ने प्रारूप तैयार किया।

राजस्थान बेघर उत्थान एवं पुनर्वास नीति 2022: 3 जनवरी 2023

अंधता/दृष्टिहीनता नियंत्रण नीति- 13 जनवरी 2023

13 जनवरी 2023 को राजस्थान अंधता नियंत्रण नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है।

राजस्थान में 9 नई नीतियाँ लॉन्च

लॉन्च : 4 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 9 नीतियां लॉन्च की।

उद्देश्य : निवेश को बढ़ावा देना और राज्य के आर्थिक विकास को गति देना।

1. MSME नीति 2024

उद्देश्य : स्थानीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धा करने में सक्षम बनाना।

20 हजार नए MSME उद्यम स्थापित किए जाएंगे।

1 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजन।

ऋण पर अतिरिक्त 2% ब्याज अनुदान।

एसएमई एक्सचेंज से धन जुटाने पर 15 लाख तक सहायता।

एडवांस्ड टेक्नोलॉजी या सॉफ्टवेयर पर 50% या ₹5 लाख तक अनुदान।

क्वालिटी सर्टिफिकेशन व IPR पर 3 लाख तक पुनर्भरण सहायता।

डिजिटल उपकरणों पर ₹50 हजार तक पुनर्भरण।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 75% तक पुनर्भरण।

MSME क्षेत्र राजस्थान की GSDP में करीब 25% योगदान दे रहा है।

2. राजस्थान एक ज़िला-एक उत्पाद नीति 2024

उद्देश्य - स्थानीय उत्पादकों के लिये बुनियादी ढाँचे का निर्माण करके ज़िला-विशिष्ट उत्पादों और शिल्पों को बढ़ावा देना।जिससे कारीगरों, शिल्पकारों, कृषकों और उत्पाद निर्माताओं की आय में वृद्धि होगी।

नए सूक्ष्म उद्यमों के लिए के लिए लागत का 25% मार्जिन मनी सब्सिडी (अधिकतम ₹15 लाख)

नए लघु उद्यमों के लिए के लिए लागत का 15% मार्जिन मनी सब्सिडी (अधिकतम ₹20 लाख)

SC, ST, महिला, दिव्यांग या 35 वर्ष से कम आयु वाले युवा उद्यमियों को अतिरिक्त लाभ (अधिकतम ₹5 लाख)

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में उत्पाद ले जाने वालों को प्रोत्साहन राशि।

  1. राजस्थान में प्रदर्शनी के लिए तीन बार तक स्टॉल खर्च ₹50 हजार और दो लोगों का किराया।

  2. अन्य राज्यों की प्रदर्शनी में जाने पर दो बार तक स्टॉल खर्च ₹1.50 लाख और दो लोगों का किराया।

  3. विदेश में प्रदर्शनी में जाने पर एक बार तक स्टॉल खर्च ₹2 लाख और दो लोगों का हवाई किराया।

3. राजस्थान निर्यात संवर्द्धन/प्रोत्साहन नीति 2024

निर्यातकों को दस्तावेजीकरण, तकनीकी अपग्रेडेशन और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी के लिए मदद की जायेगी।

इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और राजस्थान के उत्पाद वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकेंगे।

राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए मार्केटिंग एवं रिसर्च टीम बनेगी।

हर जिले से उन उत्पादों को चिन्हित करेंगे जिन्हें राष्ट्रीय अंतर्रष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की बेहतर संभावना हो।

4. राजस्थान क्लस्टर विकास नीति 2024

कच्चे माल और प्रशिक्षण सुविधाओं तक पहुँच के साथ राज्य में क्लस्टर आधारित विकास के जरिए शिल्पकारों और लघु उद्योगों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।

इसके माध्यम से राज्य में हस्तशिल्प, हथकरघा और MSME क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं कार्यक्षमता को बढ़ाकर उन्हें वैश्विक बाजार के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को पुनर्जीवित करना।

50,000 से 2 लाख रुपये तक छोटे उद्यमियों को मदद।

5. राजस्थान पर्यटन इकाई नीति 2024

इस नीति के माध्यम से पर्यटन से जुड़े निवेशकों व उद्यमियों को आकर्षित करते हुए निजी क्षेत्र में पर्यटन इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया गया है।

रोज़गार सृजन के लिये पारिस्थितिकी पर्यटन और विरासत पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।

नए पर्यटन मॉडलों का समावेश:-

इको टूरिज्म यूनिट, फिल्म सिटी, हेरिटेज रेस्टोरेंट, होटल हाउसिंग, इनडोर/आउटडोर प्ले जोन, एकीकृत पर्यटन विलेज, मोटल/वे-साइड सुविधाएं, रिसोर्ट हाउसिंग, ग्रामीण पर्यटन इकाई, पर्यटन स्टार्टअप्स।

निवेश प्रोत्साहन:

चिन्हित स्थानों पर न्यूनतम ₹100 करोड़ का 3 वर्षों में निवेश करने वाली परियोजनाओं को राजकीय भूमि आवंटन।

भूमि आवंटन में विशेष सुविधा:

पर्यटन इकाई से जुड़ी या उसके अंदर आने वाली राजकीय भूमि को उनकी मालिकाना भूमि के 10% तक कृषि या आवासीय डीएलसी दरों पर आवंटन की सुविधा।

आर्थिक प्रोत्साहन:

नई पर्यटन इकाईयों को स्टाम्प ड्यूटी, कन्वर्जन चार्ज, डवलपमेंट चार्ज एवं भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100% छूट।

औद्योगिक दर्जा:

पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को औद्योगिक दर्जा मिलने से यूडी टैक्स, इलेक्ट्रिसिटी चार्जेज और बिल्डिंग प्लान अप्रूवल चार्जेज औद्योगिक रेट पर।

3 साल की फायर एनओसी।

हैरिटेज होटल व रेस्टोरेंट के लिए रियायती दर पर बार लाइसेंस।

6. राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024

उद्देश्य : सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के माध्यम से राजस्थान को नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी के रूप में स्थापित करना।

इस नीति के माध्यम से प्रदेश में अक्षय ऊर्जा, बायोमास एवं वेस्ट टू एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण (पंप भंडारण, बैटरी भंडारण) परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता 125 गीगावाट तक बढ़ेगी।

अक्षय ऊर्जा (सौर, पवन, पंप स्टोरेज) प्लांट से उत्पादित सस्ती बिजली का स्टोरेज सिस्टम तैयार करने वाले प्रोजेक्ट्स को ₹1 टोकन राशि पर रजिस्टर्ड करेंगे।

कंपनियां सस्ती बिजली का कुछ हिस्सा डिस्कॉम्स को भी सप्लाई करेगी। सस्ती बिजली उत्पादन दूसरे राज्यों में ले जाने का सिस्टम खत्म होगा।

10 मेगावाट तक के प्रोजेक्ट का पंजीकरण शुल्क घटकर ₹5000 किया।

5 मेगावाट से अधिक की परियोजना की स्थापना पर न्यूनतम 5% क्षमता का ऊर्जा भंडारण संयंत्र अनिवार्य किया गया है।

नेट जीरो बिल्डिंग को बढ़ावा देने के प्रावधान।

नेट मीटरिंग व्यवस्था में 80% ट्रांसफार्मर क्षमता तक सोलर रूफटॉप लगाने की अनुमति।

इस नीति के अंतर्गत 2,245 मेगावाट क्षमता वाले विश्वस्तरीय सौर पार्क की स्थापना की जाएगी।

7. राजस्थान AVGC & XR नीति 2024

उद्देश्य: ए​नीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रिएलिटी के क्षेत्र में राजस्थान को अग्रणी बनाना।

यह नीति प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करेगी।

साथ ही, इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अटल इनोवेशन स्टूडियो और एक्सेलेरेटर स्थापित किए जाएंगे।

AI आधारित गेम डेवलपमेंट सेंटर खोला जाएगा।

8. राजस्थान खनिज नीति 2024

लागू- 9 दिसंबर 2024

लक्ष्य: प्रदेश की GDP में खनिज क्षेत्र की वर्तमान 3.4% की भागीदारी को

वर्ष 2029-30 तक 5% और

2046-47 तक 8% तक बढ़ाना।

रोजगार लक्ष्य : 2029-30 तक 50 लाख लोगों तथा 2046-47 तक 1 करोड़ लोगों के लिए रोजगार सृजित करना।

राजस्व लक्ष्य : 2029-30 तक तीन गुना बढ़ाकर वर्ष 2046-47 तक ₹1 लाख करोड़ वार्षिक।

अगले 5 साल में प्रधान खनिज के 50 ब्लॉक्स की नीलामी‌।

जनजाति क्षेत्र में माइनर मिनरल खानों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने हेतु नीलामी में भाग लेने के लिए बिड सिक्योरिटी राशि कम कर ₹5 लाख।

नोट: राजस्थान में 82 तरह के खनिजों के भंडार हैं जिनमें से 58 का व्यवसायिक स्तर पर खनन हो रहा है।

राज्य में देश के कुल उत्पादन का लगभग 15% क्रूड ऑयल और प्रतिदिन 3.3 मिलियन घनमीटर प्राकृतिक गैस का उत्पादन हो रहा है।

प्रमुख प्रावधान:

  1. निजी भागीदारी को बढ़ावा:

खनिज संसाधनों की खोज में निजी क्षेत्र की भागीदारी।

Post Auction Facilitation Cell की स्थापना।

Pre-embedded Clearances के साथ ब्लॉक्स की नीलामी।

  1. राजस्व अपवंचना रोकने के उपाय:- Geo-Fencing, RFID चेक पोस्ट, GPS वाहन ट्रैकिंग और ड्रोन सर्वे।

  2. Ease of Doing Business:- परमिट और अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना।

  3. ईंटों के व्यावसायिक पर रॉयल्टी में छूट।

  4. जिलों में लैंड बैंक की स्थापना।

  5. अवैध खनन को रोकना।

  6. श्रमिकों के स्वास्थ्य एवं उनकी सुरक्षा के इंतजाम करना।

नोट: यह राजस्थान की छठी खनिज नीति है‌।

पहली खनिज नीति: 1978

9. राजस्थान एम-सैंड नीति 2024

उद्देश्य : निर्माण कार्यों में बजरी के स्थान पर एम-सैंड (कृत्रिम बजरी) के उपयोग को बढ़ावा देना।

वेस्ट (कचरे) का समाधान।

बजरी की कमी से जुड़ी समस्याओं का समाधान।

भवन, कंक्रीट स्ट्रक्चर्स को तोड़ने से बने मलबे के पुनः उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण संरक्षण और निर्माण लागत में कमी।

एम-सेंड का उपयोग सरकारी निर्माण में अभी 25% जरूरी 2028-29 तक 50% तक होगा।

यूनिट लगाने के लिए न्यूनतम नेटवर्क, टर्नओवर, अनुभव की आवश्यकता समाप्त।

यूनिट लगाने के लिए आवश्यक का अमानत राशि आधी।

एम-सैंड यूनिट को उद्योग का दर्जा।

खनन पट्टा आवंटन में प्रत्येक जिले में 2 की जगह 5 प्लाट प्रतिवर्ष की नीलामी।

सरकारी भूमि पर पड़े पत्थर के कचरे की नीलामी आधी रेट में करना।

परमिट लेने वालों को डीएमएफटी की राशि में 100%, रॉयल्टी में 50% की छूट।

स्टाम्प शुल्क के भुगतान में 75% छूट एवं 25% स्टाम्प शुल्क का पुनर्भरण।

7 साल तक बिजली शुल्क माफ।

रोजगार सृजन पर 7 वर्ष तक EPF एवं ESI में 50% सरकार देगी।

नोट : एम-सैंड इकाइयों को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के परिलाभ भी देने का प्रावधान किया गया है।

नॉन-रेजिडेंट राजस्थानी पॉलिसी ऑफ राजस्थान-2025

बदलते समय के अनुरूप प्रवासी राजस्थानियों के राज्य के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने के उद्देश्य से अनुमोदित नॉन-रेजिडेंट राजस्थानी पॉलिसी ऑफ राजस्थान-2025 निवेश, व्यापार, ज्ञान के आदान-प्रदान, शोध और सामाजिक सरोकारों में एनआरआर के योगदान को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगी।

NRR नीति प्रवासी राजस्थानियों के निवेश को गति देने के लिए राज्य में एक बेहतर इकोसिस्टम का निर्माण करेगी। निवेश से संबंधित सभी प्रक्रियाओं के समन्वय हेतु NRR इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन सेल स्थापित की जाएगी, जिसमें इन्वेस्टमेंट लायजन ऑफिसर्स निवेश प्रस्तावों की निगरानी, प्रवासी मिलन कार्यक्रमों का आयोजन और विभागीय समन्वय सुनिश्चित करेंगे।

राजस्थान फाउंडेशन चैप्टर्स में इन्वेस्टमेंट कॉर्डिनेटर्स नियुक्त किए जाएंगे, जो निवेश लीड्स की पहचान और राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे।

प्रवासी विशेषज्ञों और व्यावसायिक नेताओं के सहयोग से एनआरआर इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी काउन्सिल्स गठित होंगी, जो नीतिगत सुझाव और सेक्टरवार निवेश रोडमैप तैयार करेंगी।

प्रवासी राजस्थानियों की परेशानियों के निराकरण के लिए एक व्यवस्थित शिकायत निवारण और समन्वय तंत्र स्थापित किया जाएगा।

ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति

राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, अव्यवस्थित भूमि उपयोग और आर्थिक हानि जैसी चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार सभी नगरीय निकायों में ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के रूप में एक नई और दूरदर्शी शहरी नियोजन नीति को लागू करेगी।

TOD एक आधुनिक शहरी विकास मॉडल है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन स्टेशनों (मेट्रो, रेलवे स्टेशन) के आसपास कॉम्पैक्ट, मिश्रित-उपयोग एवं उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों का विकास करना है। यह पैदल एवं गैर-मोटर चालित परिवहन (NMT) को प्रोत्साहित कर शहरों को अधिक सुगम, पर्यावरण-अनुकूल और रहने योग्य बनाता है।

यह नीति भूमि उपयोग और परिवहन के बेहतर समेकन के साथ लोगों और रोजगारों को सार्वजनिक परिवहन के निकट लाकर शहरों में कम दूरी पर सहज आवागमन सुनिश्चित करेगी।

राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति 2025

जारीकर्ता: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा।

नई फिल्म पर्यटन नीति राज्य को फिल्मिंग हब के रूप में स्थापित करेगी और युवाओं के लिए रोजगार तथा कौशल विकास के नए अवसर खोलेगी।

फिल्म व्यय पर 30% तक सब्सिडीः

राजस्थान में फीचर फिल्म, वेब सीरीज, टीवी सीरियल और डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग पर किए व्यय का अधिकतम 30% तक सब्सिडी देने का प्रावधान है। अधिकतम सब्सिडी सीमा फीचर फिल्म ₹3 करोड़, वेब सीरीज ₹2 करोड़, टीवी सीरियल ₹1.5 करोड़ और डॉक्यूमेंट्री ₹2 करोड़ निर्धारित की गई है।

न्यूनतम व्यय सीमाः

सब्सिडी प्राप्त करने के लिए राज्य में न्यूनतम व्यय फीचर फिल्म हेतु ₹2 करोड़, जबकि वेब सीरीज, टीवी सीरियल और राजस्थानी भाषा की फिल्मों हेतु ₹1 करोड़ अनिवार्य होगा।

सब्सिडी प्राप्त करने हेतु निम्न प्रावधान हैं:

  1. लोकेशन स्क्रीन-टाइम आधारित प्रोत्साहन

राजस्थान की लोकेशन्स को 5-15%, 16-30% और 30% से अधिक स्क्रीन-टाइम देने पर क्रमशः 10%, 20% और 30% सब्सिडी मिलेगी।

  1. फीचर फिल्म के 50% शूटिंग-दिवस राजस्थान में करने और न्यूनतम व्यय सीमा पूरी करने पर अधिकतम 30% तक सब्सिडी उपलब्ध होगी।

  2. 100% शूटिंग राजस्थान में करने पर अधिकतम सब्सिडी सीमा के अन्दर 5% अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी।

राजकीय लोकेशन्स पर शुल्क की 100% प्रतिपूर्तिः-

राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के नियंत्रण वाले शूटिंग स्थानों की अनुमति शुल्क / फीस (अधिकतम पाँच दिन) की 100% प्रतिपूर्ति दी जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय / राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मों को विशेष प्रोत्साहनः-

राजस्थान में फिल्माई गई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फीचर फिल्मों को अधिकतम ₹1 करोड़ तथा भारत सरकार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त फिल्मों को अधिकतम ₹50 लाख प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

राजस्थान वाहन स्क्रैपिंग नीति-2025 को मंजूरी

​बजट वर्ष 2025-26 की घोषणा की अनुपालना में अनुमोदित राजस्थान वाहन स्क्रैपिंग नीति-2025 प्रदेश में सड़क पर चलने में अयोग्य एवं प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध रूप से हटाकर उनके वैज्ञानिक, सुरक्षित एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप निपटान करने के उद्देश्य से लाई जा रही है।

इस नीति के अंतर्गत राज्य में रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटीज (RVSF) की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनके माध्यम से वाहनों की स्क्रैपिंग पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और ट्रेस योग्य होगी। सभी स्क्रैपिंग प्रक्रियाएं वाहन पोर्टल से एकीकृत होंगी, जिससे स्क्रैप योग्य वाहनों के अनधिकृत उपयोग की संभावना समाप्त होगी।

नए वाहन की खरीद पर मोटर वाहन कर पर मिलेगी छूट-

15 वर्ष से अधिक पुराने सरकारी वाहन, फिटनेस/पंजीकरण रहित वाहन, दुर्घटनाग्रस्त, क्षतिग्रस्त वाहन, नीलामी में खरीदे गए कबाड़ वाहन, अनुपयोगी वाहन या स्वेच्छा से RVSF को दिए गए वाहन इस नीति के अंतर्गत स्क्रैप किए जा सकेंगे।

अधिकृत स्क्रैप सेंटर से वाहन स्वामी को सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (COD) और सर्टिफिकेट ऑफ व्हीकल स्क्रैपिंग (CVS) जारी किए जाएंगे। COD के आधार पर नए वाहन की खरीद पर मोटर वाहन कर में 50% तक (अधिकतम 1 लाख रुपए) की छूट का लाभ भी मिल सकेगा।​

राजस्थान वाहन स्क्रैपिंग नीति-2025 के माध्यम से सर्कुलर इकॉनॉमी को मजबूती मिलेगी। स्क्रैपिंग से प्राप्त स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक, रबर व अन्य सामग्री का पुनः उपयोग संभव होगा, जिससे ऑटोमोबाइल, स्टील एवं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सस्ती कच्ची सामग्री उपलब्ध होगी।

राजस्थान एआई एमएल पॉलिसी- 2026

उद्देश्य: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग के उत्तरदायी, नैतिक एवं सुरक्षित उपयोग से सार्वजनिक सेवा वितरण को अधिक त्वरित, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाना, प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि करना तथा नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना।

नीति के अंतर्गत प्रत्येक विभाग अपने लिए एआई उपयोग से जुड़े कार्यों की पहचान करेगा और एक एआई नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा। आधुनिक डिजिटल एवं कंप्यूट अवसंरचना, एआई क्लाउड सेवाओं, सुरक्षित डेटा स्टोरेज और टेस्टिंग प्लेटफॉर्म की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।

स्कूलों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक संस्थानों और कॉलेजों में एआई शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

युवाओं, शिक्षकों और सरकारी कार्मिकों के लिए एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स को एआई से जुड़ी पहलें करने के लिए रिप्स, एमएसएमई एवं स्टार्टअप नीतियों के अनुरूप टॉप-अप प्रोत्साहन दिए जाएंगे।​

राजस्थान ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी-2025

हाल ही बड़े ट्रेड, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म व लॉजिस्टिक नेटवर्क जैसे समान अवसर छोटे व्यापारियों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी-2025 को कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई।

इससे राज्य का खुदरा और थोक व्यापार सशक्त होगा।

यह नीति राज्य में 10.5 लाख से अधिक रिटेल स्टोर्स और तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार को ध्यान में रखते हुए व्यापार क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन करने, छोटे ट्रेडर्स को बाजार एवं ऋण तक आसान पहुंच उपलब्ध करवाने तथा खुदरा व थोक व्यापार में एमएसएमई उद्यमों के विकास के लिए कार्य करेगी।

नीति में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके तहत राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 के प्रावधानों में आवश्यकतानुसार शिथिलता लाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा, ताकि व्यापारिक इकाइयों के संचालन को सरल और व्यवसाय-अनुकूल बनाया जा सके।

राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस नीति 2026

कृषि, ऊर्जा, पेयजल, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, चिकित्सा, उद्योग जैसे क्षेत्रों में प्रगति की रफ्तार बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इसके साथ ही,एयरोस्पेस और डिफेंस विनिर्माण तथा सेवाओं में राज्य की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने एवं राष्ट्र की एयरोस्पेस और डिफेंस विनिर्माण उपलब्धियों में राजस्थान के योगदान को बढ़ावा देने के उदद्ेश्य से राज्य सरकार राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस नीति लाई है। यह नीति प्रदेश में रक्षा तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने के साथ ही राजस्थान को एयरोस्पेस और डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण हब बनाने की दिशा में सहायक होगी। इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित इकोसिस्टम के विकास पर केन्द्रित यह नीति आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगी। इस नीति के अंतर्गत प्रदेश में एयरोस्पेस एण्ड डिफेन्स क्षेत्र के विनिर्माण उद्यमों, उपकरण एवं घटक निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, प्रिसीजन इंजीनियरिंग इकाइयों और मेंटेंनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉलिंग से जुड़ी इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।

विनिर्माण परियोजनाओं और सर्विस सेक्टर को बांटा जाएगा तीन-तीन श्रेणियों में-

इस नीति के अन्तर्गत विनिर्माण परियोजनाओं को न्यूनतम 50 करोड़ रूपये से 300 करोड़ रूपये तक अचल पूंजी निवेश करने पर लार्ज, 300 करोड़ से 1 हजार करोड़ रूपये के निवेश पर मेगा और 1 हजार करोड़ रूपये से अधिक के निवेश पर अल्ट्रा मेगा परियोजना की श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं, सर्विस सेक्टर के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ रूपये तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं लार्ज, 100 करोड़ से 250 करोड़ रूपये तक मेगा और 250 करोड़ से अधिक के निवेश वाली परियोजनाएंअल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखी जाएंगी।

विनिर्माण और सर्विस सेक्टर परियोजनाओं को मिलेंगे विभिन्न लाभ-

नीति के तहत ए एण्ड डी पार्कों में लगने वाले पात्र एयरोस्पेस एवं डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग और सेवा उद्यमों को एसेट क्रिएशन इन्सेन्टिव के रूप में 7 वर्षों तक राज्य कर के 75 प्रतिशत पुनर्भरण का निवेश अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, विनिर्माण उद्यमों के लिए 20 से 28 प्रतिशत और सर्विस सेक्टर के लिए 14 से 20 प्रतिशत तक 10 वर्षों में वितरित पूंजीगत अनुदान अथवा 10 वर्षों तक वार्षिक किश्तों में देय 1.2 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक टर्नओवर लिंक्ड प्रोत्साहन में से किसी एक विकल्प का चयन करने की सुविधा दी जाएगी। इसके अतिरिक्त इन प्रोत्साहनों पर टॉप-अप के रूप में 10 से 15 प्रतिशत एम्प्लॉयमेंट बूस्टर, पहली तीन मेगा अथवा अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए 25 प्रतिशत सनराइज बूस्टर, 10 प्रतिशत एंकर बूस्टर, 20 प्रतिशत थ्रस्ट बूस्टर जैसे लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। रीको से भूमि लेने वाले मेगा, अल्ट्रा मेगा विनिर्माण उद्यमों को 10 वर्षों तक फ्लेक्जिबल लैण्ड पेमेंट और 5 वर्षों के लिए 25 प्रतिशत ऑफिस स्पेस हेतु लीज रेन्टल सब्सिडी का लाभ भी देय होगा।

राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026

लॉन्च : 18 मार्च 2026

नीति के तहत सेमीकंडक्टर अनुसंधान, डिजाइन, उत्पादन, परीक्षण एवं पैकेजिंग जैसे सभी चरण शामिल किए गए हैं, जिससे राजस्थान में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित होगा। इसी के मद्देनजर जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र, कांकणी औद्योगिक क्षेत्र एवं अन्य क्लस्टर प्राथमिक सेमीकंडक्टर कॉरिडोर के रूप में विकसित किए जाएंगे। इससे उद्योगों को भूमि आवंटन व सिंगल विंडो सिस्टम के साथ ही बिजली, पानी, सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं त्वरित गति से उपलब्ध कराई जा सकेंगी। साथ ही, विश्व स्तरीय सेमीकंडक्टर पार्कों का विकास और फैबलेस डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाया जाएगा।

सेमीकंडक्टर मैन्युफैचरिंग पैकेज के तहत निवेश को आकर्षित करने के लिए नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसमें प्रोजेक्ट्स को 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क में 100% छूट, स्टाम्प शुल्क व भू-रूपान्तरण शुल्क में 75% छूट एवं 25% का पुनर्भरण का प्रावधान शामिल है।

साथ ही, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वीकृत पूंजी सब्सिडी का 60% अनुदान एवं पूंजीगत निवेश को बढ़ावा देने के लिए टर्म लोन पर 5% ब्याज अनुदान भी प्रदान किया जाएगा।

औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत पात्र उद्योगों को पर्यावरणीय प्रोजेक्ट्स की लागत का 50% पुनर्भरण, कैप्टिव रिन्यूएबल एनर्जी वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क में 100% छूट एवं राजस्थान ग्रीन रेटिंग सिस्टम के तहत सहमति शुल्क में 50% छूट का प्रावधान किया गया है।

राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026

लॉन्च : 18 मार्च 2026

इस नीति के तहत विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों का विकास, भूमि-जल-ऊर्जा संसाधनों का वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग तथा लॉजिस्टिक्स सुविधाएं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे निवेश को प्रोत्साहन, रोजगार सृजन तथा सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास भी सुनिश्चित होगा।

इस नीति के अंतर्गत निजी क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों को चार विकास मॉडलों पर विकसित किया जाएगा। मॉडल-ए में रीको द्वारा आवंटित भूमि पर पूरी तरह निजी डवलपर द्वारा विकास किया जाएगा। वहीं, मॉडल-बी के अंतर्गत औद्योगिक पार्क के लिए 80% भूमि विकासकर्ता द्वाराएवं शेष 20% भूमि रीको द्वारा निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसी तरह, मॉडल-सी के तहत पार्क के लिए संपूर्ण भूमि की विकासकर्ता द्वारा व्यवस्था की जाएगी तथा मॉडल-डी पीपीपी मॉडल पर आधारित होगा। नीति के तहत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्कों के लिए कम से कम 50 एकड़ क्षेत्रफल तथा न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी।

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