राजस्थान बजट 2026-27
⚡ Fast Revision Notes
🕐 52 min read
विषय सूची
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया।
बजट का आकार: वर्ष 2026-27 के लिये कुल बजट व्यय लगभग ₹6.11 लाख करोड़।
राजस्थान सरकार की उपलब्धियाँ
I. सामाजिक सुरक्षा के तहत 91 लाख (इक्यानवे लाख) से अधिक लाभार्थियों को लगभग 28 हजार 400 करोड़ (अट्ठाइस हजार चार सौ करोड़) रुपये की पेंशन देने के साथ-साथ समाज के अन्तिम छोर पर खड़े जरूरतमंद व्यक्ति को भी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाकर सशक्त किया है।
II. युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए भर्ती परीक्षाओं का पारदर्शिता के साथ समयबद्ध रूप से आयोजन कराकर रोजगार के अवसर प्रदान किये हैं।
III. किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत 76 लाख 18 हजार (छिहत्तर लाख अठारह हजार) किसानों को 10 हजार 900 करोड़ (दस हजार नौ सौ करोड़) रुपये से अधिक की सहायता दी है। साथ ही, गेहूँ की Minimum Support Price (MSP) के ऊपर 150 (एक सौ पचास) रुपये प्रति क्विंटल Bonus राशि तथा 2 लाख 5 हजार (दो लाख पांच हजार) से अधिक कृषि विद्युत कनेक्शन देकर किसान भाइयों को समृद्ध एवं खुशहाल बनाने का कार्य किया है।
प्रदेश की महिलाओं को मुख्यमंत्री सुपोषण Nutri-Kit, लाडो प्रोत्साहन, मुख्यमंत्री नारी शक्ति प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्द्धन, मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन, सोलर दीदी एवं लखपति दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से सशक्त करते हुए आत्मनिर्भर बनाया है।
पिछली सरकार के अन्तिम वर्ष की तुलना में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार 41.39 (इकतालीस दशमलव तीन नौ) प्रतिशत बढ़कर वर्ष 2026-27 में 21 लाख 52 हजार 100 करोड़ (इक्कीस लाख बावन हजार एक सौ करोड़) रुपये अनुमानित है। वहीं, दूसरी ओर प्रति व्यक्ति आय भी एक लाख 67 हजार (एक लाख सड़सठ हजार) रुपये से बढ़कर उल्लेखनीय वृद्धि के साथ वर्ष 2025-26 की समाप्ति पर 2 लाख 2 हजार 349 (दो लाख दो हजार तीन सौ उनचास) रुपये तक पहुंच जायेगी।
यह बजट प्रदेश को ‘संकल्प से सिद्धि’, 'नीयत से नीति’ तथा ‘आकांक्षा से उपलब्धि’ की ओर अग्रसर करने वाला बजट है।
पहला स्तम्भ : अव-संरचना का विस्तार (Infrastructure Expansion)
वर्ष 2024-25 में 30 हजार 427 करोड़ (तीस हजार चार सौ सत्ताइस करोड़) रुपये का पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure) किया गया है, जो कि आज तक किसी भी वर्ष में किया गया सर्वाधिक पूँजीगत व्यय है।
सड़क :
सरकार के इस कार्यकाल में सड़क विकास पर लगभग 27 हजार 860 करोड़ (सत्ताइस हजार आठ सौ साठ करोड़) रुपये का व्यय कर 16 हजार 430 (सोलह हजार चार सौ तीस) किलोमीटर लम्बाई की नवीन सड़कों को शामिल करते हुए लगभग 42 हजार (बयालीस हजार) किलोमीटर सड़कों के विकास का कार्य किया गया है।
प्रदेश के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाने के लिए State Highways, ROB/ RUB/Flyover/ Elevated Roads, Bridges आदि के निर्माण, मरम्मत व उन्नयन सम्बन्धी कार्य लगभग एक हजार 800 करोड़ (एक हजार आठ सौ करोड़) रुपये की लागत से करवाये जाने प्रस्तावित हैं।
प्रदेश में नवीन सड़कों के निर्माण के साथ-साथ वर्तमान सड़कों के सुदृढ़ीकरण व नवीनीकरण की आवश्यकता को देखते हुए नॉन-पेचेबल व क्षतिग्रस्त सड़कों के लिए एक हजार 400 करोड़ (एक हजार चार सौ करोड़) रुपये तथा मिसिंग लिंक सड़कों के लिए 600 करोड़ (छह सौ करोड़) रुपये का प्रावधान।
वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में क्रमशः 10 हजार व 5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में Cement Concrete के अटल प्रगति पथ के निर्माण करवाये जाने की घोषणा की गयी थी। इसी कड़ी में, आगामी वर्ष 250 (दो सौ पचास) अटल प्रगति पथों के 500 करोड़ (पांच सौ करोड़) रुपये की लागत के कार्य हाथ में लिये जाने प्रस्तावित हैं।
प्रदेश में तीव्र औद्योगिक विकास के लिए धरमपुरा-बाड़मेर; मसूदा-ब्यावर; कन्याखेड़ी-भीलवाड़ा सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों एवं Logistic Parks के पहुँच मार्गों के विकास के लिए 400 करोड़ (चार सौ करोड़) रुपये का व्यय किया जाना प्रस्तावित है।
गत बजट में राज्य के 20 (बीस) Level Crossing Railway फाटकों पर ROB/RUB निर्माण के लिए DPR बनाये जाने की घोषणा के क्रम में प्राप्त feasibility के अनुसार आगामी वर्ष 15 (पन्द्रह) Level Crossings पर ROBs/RUBs के साथ ही, प्रदेश के अन्य स्थानों पर ROBs/RUBs बनाये जायेंगे। इन पर 920 करोड़ (नौ सौ बीस करोड़) रुपये से अधिक का व्यय किया जायेगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 26 (छब्बीस) Level Crossing Railway फाटकों पर ROB/RUB निर्माण के लिए DPR बनाया जाना भी प्रस्तावित है।
राज्य में सड़क तंत्र को सुदृढ़ करने की दृष्टि से दो वर्षों में 5 हजार (पांच हजार) किलोमीटर लम्बाई से अधिक की सड़कों को मुख्य जिला सड़कों में क्रमोन्नत किया जा चुका है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आगामी दो वर्षों में एक हजार किलोमीटर लम्बाई से अधिक की सड़कों को राज्य राजमार्गों में एवं दो हजार किलोमीटर लम्बाई से अधिक की सड़कों को मुख्य जिला मार्गों में क्रमोन्नत किये जाने की घोषणा।
राज्य राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण हेतु speed violation detection system व variable message sign board को सम्मिलित करते हुए Intelligent Transport System (ITS) आधारित लगभग 500 (पांच सौ) किलोमीटर लम्बाई के State Highways मय पुलिया व बाईपास 2 हजार 700 करोड़ (दो हजार सात सौ करोड़) रुपये से अधिक की लागत से विकसित किये जायेंगे।
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष औसतन 11 हजार 700 (ग्यारह हजार सात सौ) से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु होना चिन्ता का विषय है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में वर्ष 2047 तक 90 (नब्बे) प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसकी प्राप्ति के लिए-
I. राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों एवं शहरों में सुदृढ़ Intelligent Traffic Management System (ITMS) के लिए चरणबद्ध रूप से लगभग दो हजार कैमरे 100 करोड़ (सौ करोड़) रुपये की लागत से स्थापित किये जायेंगे।
II. Black Spots के दुरुस्तीकरण, Junction सुधार, Crash Barrier, सड़क सुरक्षा बोर्ड, Road Safety Audit, अतिक्रमण हटाने व सड़क सुरक्षा सम्बन्धी कार्य हाथ में लिये जाने प्रस्तावित हैं। इस हेतु 100 करोड़ (सौ करोड़) रुपये व्यय किये जायेंगे।
III. प्रदेश में Driving Licences के लिए समस्त 35 Driving Test Tracks का Automation किया जाना प्रस्तावित है।
पेयजल :
सरकार ने वर्ष 2047 तक प्रदेश में Robust Governance, Sustainable Conservation एवं Equitable Utilisation के माध्यम से जल सुरक्षा का लक्ष्य रखा है।
प्रदेश में ‘Universal Access to Safe Water for All’ के उद्देश्य से हमारे द्वारा कार्यग्रहण करने के पश्चात् जल जीवन मिशन को गति देते हुए इसके अंतर्गत 'हर घर नल से जल' सुविधा हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में 14 लाख (चौदह लाख) से अधिक जल कनेक्शन उपलब्ध करवाये गये हैं तथा 24 हजार करोड़ (चौबीस हजार करोड़) रुपये की लागत की 400 (चार सौ) से अधिक पेयजल परियोजनाओं के कार्यादेश जारी किये गये हैं। साथ ही, परवन अकावद परियोजना के अन्तर्गत बारां, कोटा एवं झालावाड़ के लिए 3 हजार 500 करोड़ (तीन हजार पांच सौ करोड़) रुपये तथा नवनेरा परियोजना के तहत कोटा एवं बूंदी के गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक हजार 100 करोड़ (एक हजार एक सौ करोड़) रुपये से अधिक के कार्यादेश जारी किये गये हैं।
पिछले वर्ष शहरी क्षेत्रों में समयबद्ध रूप से पेयजल की समुचित व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन (शहरी) के अन्तर्गत चरणबद्ध रूप से 5 हजार 830 करोड़ (पांच हजार आठ सौ तीस करोड़) रुपये से अधिक की लागत के कार्य कराये जाने की घोषणा की गयी थी। इसी कड़ी में-
I. मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन (शहरी) योजना का दायरा बढ़ाते हुए प्रदेश के समस्त शहरों के मास्टर प्लान में दर्शाये गये peri-urban area के 6 हजार 245 (छह हजार दो सौ पैंतालीस) गाँवों को सम्मिलित किया जायेगा। इसके लिए 5 हजार करोड़ (पांच हजार करोड़) रुपये का व्यय कर चरणबद्ध रूप से पेयजल आधारभूत संरचना सम्बन्धी कार्य करवाये जाने प्रस्तावित हैं।
II. मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन (शहरी) द्वितीय चरण के अन्तर्गत 2 हजार 530 करोड़ (दो हजार पांच सौ तीस करोड़) रुपये का व्यय कर 83 (तिरासी) शहरों में जलापूर्ति के service level संवर्द्धन के कार्य करवाये जायेंगे।
III. इसके अतिरिक्त**, अमृत 2.0 योजना के तहत आगामी वर्ष 3 लाख पेयजल कनेक्शन** जारी किये जायेंगे।
प्रदेशवासियों को ग्रीष्म ऋतु में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराये जाने की दृष्टि से आगामी वर्ष 600 (छह सौ) Tube wells व एक हजार 200 (एक हजार दो सौ) Handpumps लगाये जाने प्रस्तावित हैं। साथ ही, Summer contingency के अन्तर्गत प्रत्येक जिला कलक्टर को एक करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवायी जायेगी।
प्रदेश में सशक्त जल प्रबंधन की दृष्टि से जयपुर में Centre of Excellence की स्थापना 10 करोड़ (दस करोड़) रुपये की लागत से की जायेगी। साथ ही, Bureau of Water Use Efficiency की स्थापना कर जयपुर में HCM RIPA, सचिवालय एवं जल भवन में pilot basis पर Water Distribution Efficiency के संवर्द्धन सम्बन्धी कार्य करवाये जायेंगे।
प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में जल गुणवत्ता परीक्षण हेतु Mobile Water Testing Labs का संचालन किया जायेगा।
प्रदेश में आमजन को पेयजल सुविधा तथा Non-Domestic एवं Industrial Units के लिए पानी उपलब्ध कराने के दृष्टिगत Rajasthan State Water Policy लायी जायेगी। इसमें पेयजल के साथ-साथ Raw Water एवं Treated Water के वितरण के सम्बन्ध में नीतिगत प्रावधान किये जायेंगे।
प्रदेश में ‘जल सुरक्षा एवं अनुकूलता’ हेतु IT का उपयोग करते हुए समयबद्ध जलापूर्ति योजनाओं की विभिन्न गतिविधियों के digital प्रबंधन एवं रखरखाव के लिए Enterprise Resource Planning (ERP) लागू की जायेगी।
ऊर्जा :
I. केन्द्रीय उपक्रमों के साथ joint venture के माध्यम से लगभग दो लाख करोड़ रुपये के निवेश के परम्परागत एवं अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित करने के लिए MoUs किये गये।
II. सौर ऊर्जा क्षमता में 19 हजार 209 (उन्नीस हजार दो सौ नौ) मेगावॉट की वृद्धि हुई है।
III. पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अन्तर्गत 518 (पांच सौ अठारह) मेगावॉट क्षमता के एक लाख 30 हजार (एक लाख तीस हजार) से अधिक Rooftop Solar Plants स्थापित किये गये।
बीकानेर में मेहरासर-दीनसर-बराला व सवाईसर-करणीसर भाटियान-बिकोलोई तथा जैसलमेर में राघवा-सेहुआ क्षेत्र में लगभग 4 हजार 830 (चार हजार आठ सौ तीस) मेगावॉट क्षमता के सौर पार्कों का विकास Joint Venture के माध्यम से किया जायेगा। इस पर लगभग 2 हजार 900 करोड़ (दो हजार नौ सौ करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
दूसरा स्तम्भ: नागरिक सुविधाओं से गुणवत्तायुक्त जीवन स्तर में वृद्धि
Comprehensive Mobility Plan को लागू करते हुए समस्त संभागीय मुख्यालयों पर चिन्हित सड़कों पर ITMS, Urban Mobility App, सड़क व चौराहा सुधार, Flyover, Underpass, Traffic Solutions,Signal Free Traffic, पार्किंग सम्बन्धी कार्य करवाये जाने की घोषणा। इसके तहत जयपुर हेतु एक हजार करोड़ रुपये को शामिल करते हुए कुल 2 हजार 325 करोड़ (दो हजार तीन सौ पच्चीस करोड़) रुपये का व्यय किया जाना प्रस्तावित है।
वर्ष 2028-29 तक 'सभी के लिए आवास' हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत-
I. आवास सुविधा से वंचित 28 लाख (अट्ठाइस लाख) से अधिक परिवारों के survey का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। योजना के द्वितीय चरण में वर्ष 2029 (दो हजार उनतीस) तक पात्र परिवारों को आवास निर्माण किये जाने हेतु अनुदान दिया जायेगा।
II. बेहतर आधारभूत संरचना तथा गुणवत्तायुक्त आवास निर्माण के लिए 35 हजार (पैंतीस हजार) व्यक्तियों को Mason सम्बन्धी प्रशिक्षण दिया जायेगा।
ऊर्जा बचत के साथ पर्याप्त रोशनी के लिए राज्य के नगर निकायों में 7 लाख (सात लाख) Street Lights लगायी जायेंगी। इस हेतु 500 करोड़ (पांच सौ करोड़) रुपये से अधिक का व्यय किया जायेगा।
प्रदेश में जल भराव की समस्या के निस्तारण, वर्षा जल की व्यवस्थित निकासी तथा बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से-
I. जयपुर में 500 करोड़ (पांच सौ करोड़) रुपये एवं अजमेर में 200 करोड़ (दो सौ करोड़) रुपये के Drainage System के कार्य सहित अलवर, भिवाड़ी, उदयपुर, कोटा, चूरू, पाली, नागौर एवं भरतपुर के नगरीय क्षेत्रों में बाढ़ सुरक्षा हेतु कुल एक हजार 20 करोड़ (एक हजार बीस करोड़) रुपये के कार्य करवाये जाने की घोषणा।
II. जिला स्तरीय नगरीय निकायों के लिए Master Drainage Plan बनाये जायेंगे। इस हेतु 40 करोड़ (चालीस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
प्रदेश में प्राकृतिक एवं मानव निर्मित विभिन्न प्रकार की आपदाओं के प्रबंधन हेतु-
I. नागरिक सुरक्षा विभाग एवं SDRF के सुदृढ़ीकरण के लिए बाढ़, भूकम्प, आगजनी, रासायनिक दुर्घटनाओं आदि हेतु खोज व बचाव उपकरण उपलब्ध कराये जाने के लिए 60 करोड़ (साठ करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
II. अग्निशमन सेवाओं के विकास एवं उन्नयन की दृष्टि से 93 (तिरानवे) Fire Bikes उपलब्ध कराये जाने के लिए 16 करोड़ (सोलह करोड़) रुपये व्यय किये जायेंगे।
III. आमजन की सुरक्षा एवं सतर्कता के लिए नदियों के प्रवाह में प्रमुख बांधों के Downstream Areas में Early Warning Siren Systems 10 करोड़ (दस करोड़) रुपये की लागत से लगाये जायेंगे।
IV. साथ ही, जड़ावता-सवाई माधोपुर में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए लगभग 75 करोड़ (पचहत्तर करोड़) रुपये व्यय किये जायेंगे।
जयपुर, कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा व जोधपुर शहरों में PPP Mode पर Smart Parking का निर्माण करवाया जायेगा। साथ ही, माउण्ट आबू-सिरोही में 200 वाहनों की Multi Storey Parking का निर्माण 10 करोड़ रुपये की लागत से कराया जायेगा। राज्य के नगर निगमों के प्रमुख 100 पार्किंग स्थलों पर चरणबद्ध रूप से PPP Mode पर EV-Charging Stations की स्थापना की जायेगी।
अजमेर व जयपुर में आमजन एवं पर्यटकों के लिए सुविधा सेन्टर विकसित किये जायेंगे।
राहगीरों को गर्मी से राहत एवं बरसात से बचाव के लिए प्रदेश में जिला स्तरीय नगर निकायों में प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर Eco-Cooling Shelters की स्थापना की जायेगी।
प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए स्थानीय निकायों एवं राजकीय उपक्रमों के Infrastructure Projects को Innovative Financing सुलभ करवाने के लिए RAJ-SETU (Rajasthan Structured Enabler for Transformative Urban and Infrastructure Financing) Fund की स्थापना की जायेगी।
तीसरा स्तम्भ : औद्योगिक विकास एवं निवेश को प्रोत्साहन
पिछले एक वर्ष में प्रतिदिन 8 (आठ) उद्योगों के लिए भूमि आवंटित की है तथा औद्योगिक आधारभूत सुविधा के उन्नयन एवं विकास के लिए गत 50 (पचास) वर्षों में सर्वाधिक राशि व्यय की है।
औद्योगिक विकास तथा Hassle Free निवेश को दृष्टिगत रखते हुए Direct Allotment Policy लागू कर एक हजार 200 (एक हजार दो सौ) से अधिक उद्यमियों को 800 (आठ सौ) एकड़ भूमि का आवंटन किया गया है। इस नीति के सुखद परिणामों तथा निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे दिसम्बर, 2026 तक जारी रखा जाना प्रस्तावित है।
प्रदेश में औद्योगिक विकास की यात्रा को निरन्तर जारी रखने की दृष्टि से विभिन्न स्थानों पर नवीन औद्योगिक पार्कों की स्थापना तथा अन्य आधारभूत कार्य करवाये जायेंगे। ये पार्क एवं कार्य हैं-
जयपुर के फागी, चौमूं, मौजमाबाद व दूदू, अजमेर के भिनाय; डीडवाना-कुचामन के परबतसर; टोंक के निवाई; फलौदी के आऊ व फलौदी; खैरथल तिजारा के मुण्डावर; कोटपूतली बहरोड़ के नीमराणा; कोटा के रामगंजमण्डी व लाडपुरा; धौलपुर के बिजौली तथा सीकर के दातारामगढ़ तहसील क्षेत्र में नवीन औद्योगिक क्षेत्र विकसित किये जायेंगे।
बिचून, कुंज बिहारीपुरा, विश्वकर्मा, ईपीआईपी, सीतापुरा-जयपुर; भिवाड़ी, कहरानी, चौपानकी-खैरथल तिजारा; उद्योग विहार-श्रीगंगानगर; आईजीसी खारा-बीकानेर; नीमराना, ईपीआईपी-नीमराना-कोटपूतली बहरोड़; कुबेर-कोटा; गेगल-अजमेर सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के विकास एवं आधारभूत सुविधाओं यथा-सड़क, पानी, बिजली आदि के लिए एक हजार करोड़ रुपये की राशि व्यय की जायेगी।
लघु व छोटे उद्यमियों को संबल प्रदान करने एवं उद्योग स्थापना सम्बन्धी सुविधायें सुलभ करने के लिए प्रदेश के समस्त संभाग मुख्यालयों पर Plug and Play Facility for Small and Micro Enterprises स्थापित किये जाने की घोषणा। आगामी वर्ष 350 करोड़ (तीन सौ पचास करोड़) रुपये की राशि से ये कार्य हाथ में लिये जायेंगे।
प्रदेश में Logistic Eco-system को विकसित करने के लिए भिवाड़ी के सलारपुर एवं डीडवाना-कुचामन के परबतसर में भूमि आवंटित की गयी है। राज्य में और नये Logistic Hubs विकसित किये जाने हेतु निजी क्षेत्र के सहयोग से Inland Container Depot (ICD), Multi-Modal Logistic Hub आदि की स्थापना की जायेगी।
देश-विदेश के प्रवासी राजस्थानियों से सतत संवाद एवं जुड़ाव के लिए Domestic and Overseas Rajasthani Affairs (DORA) विभाग का गठन किया गया है। वर्तमान में Rajasthan Foundation के 26 (छब्बीस) Chapters कार्यशील हैं। आगामी वर्ष दक्षिण अफ्रीका, New Zealand, Canada आदि को सम्मिलित करते हुए 14 (चौदह) नये Chapters शुरू किये जायेंगे।
माटी कला से जुड़े कलाकारों के उत्थान के लिए आगामी वर्ष 5 हजार Electric Wheels (इलेक्ट्रिक चाक) एवं मिट्टी गूंथने की मशीनें उपलब्ध करवायी जायेंगी। इस हेतु 15 करोड़ (पन्द्रह करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
चौथा स्तम्भ : मानव संसाधन का सशक्तीकरण
युवा विकास एवं कल्याण :
प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ प्रारम्भ की गयी है। इसके अन्तर्गत एक लाख युवाओं को 10 लाख (दस लाख) रुपये तक के ऋण पर शत-प्रतिशत ब्याज अनुदान तथा Margin Money अनुदान आदि की सुविधा दी जायेगी, जिस पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जानी प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, इस योजना से 30 हजार (तीस हजार) युवाओं को लाभान्वित किया जायेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए उठाये गये ठोस कदमों से पेपरलीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगी है, जिससे युवाओं में नई आशा का संचार हुआ है। इसी दिशा में एक और कदम उठाते हुए National Testing Agency (NTA) की तर्ज पर प्रदेश में Rajasthan State Testing Agency (RSTA) की स्थापना किये जाने की घोषणा। साथ ही, घोषित एवं प्रक्रियाधीन भर्ती परीक्षाएं बड़े पैमाने पर निर्बाध एवं समयबद्ध रूप से सप्ताह के सभी दिवसों में हो सके, इसके लिए Online Testing सुविधायुक्त Test Centres का निर्माण किया जायेगा।
प्रतिभावान विद्यार्थियों के नवाचार व्यावहारिक रूप से startups के रूप में विकसित हो सकें, इसके लिए mentorship, entrepreneurship, incubation सुविधायें उपलब्ध करवाना आवश्यक है। इस हेतु knowledge partners के सहयोग से प्रदेश के प्रत्येक जिले के चयनित महाविद्यालय में VIBRANT (Value-driven Innovation and Business Research for Aspiration and Nurturing Talent) Programme चलाया जायेगा।
बालिकाओं में आत्मरक्षा एवं स्वाभिमान की भावना जाग्रत करने की दृष्टि से 300 (तीन सौ) से अधिक महाविद्यालयों में स्थापित 'रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रों' में लगभग 15 हजार (पन्द्रह हजार) छात्राओं को प्रशिक्षण दिया गया है। आगामी वर्ष, 150 (एक सौ पचास) अतिरिक्त महाविद्यालयों में इन केन्द्रों की स्थापना कर लगभग 25 हजार (पच्चीस हजार) छात्राओं को प्रशिक्षित किया जायेगा।
महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए रोजगार परक कौशल, career guidance तथा digital mentoring आवश्यक है। इसके लिए सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और Technology Enabled परामर्श प्रदान करने के उद्देश्य से DREAM (Digital Readiness and Empowerment through Assisted Mentoring) Programme चलाया जायेगा। इसके अन्तर्गत आगामी वर्ष, प्रथम चरण में लगभग 50 हजार (पचास हजार) विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जायेगा।
‘नशामुक्त राजस्थान’ की संकल्पना को साकार करने के लिएअन्तर विभागीय समन्वित कार्यक्रम Raj-SAVERA (Statewide Anti- drugs Vigilance, Enforcement, Rehabilitation and Awareness) चलाया जायेगा। इसके अन्तर्गत-
I. Psychotropic Drugs के Chemist के स्तर पर विक्रय की सतत Monitoring के लिए online portal विकसित किया जायेगा।
II. जिला चिकित्सालयों में नशामुक्ति वार्ड स्थापित किये जायेंगे।
III. 300 (तीन सौ) से अधिक महाविद्यालयों में चल रहे नशामुक्ति केन्द्रों की सफलता को देखते हुए आगामी वर्ष विश्वविद्यालयों एवं चयनित महाविद्यालयों में भी इन केन्द्रों का संचालन किया जाना प्रस्तावित है।
IV. साथ ही, Anti-Narcotics Task Force द्वारा विभिन्न विभागों से समन्वय कर प्रभावी निरोधात्मक कार्यवाही की जायेगी। इसके लिए मुखबिर तंत्र भी सुदृढ़ किया जायेगा।
विद्यार्थियों तथा शोधकर्ताओं में नवाचार, अनुसंधान तथा entrepreneurship को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 50 उच्च शिक्षण संस्थानों (विश्वविद्यालय, महाविद्यालय आदि) में IPR-TT (Intellectual Property Rights and Technology Transfer) Cells का गठन किया जायेगा।
कोटा विश्वविद्यालय में भगवान बिरसा मुंडा शोधपीठ की स्थापना
प्रदेश में skilling eco-system को मजबूत बनाने, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने तथा युवाओं के कौशल विकास के साथ ही उन्हें employable बनाये जाने के उद्देश्य से-
I. राज्य में पहली बार Outcome-based Skill Impact Bond लाया जायेगा। इसके तहत Placement आधारित मापदण्ड पूरे होने पर भुगतान किया जायेगा।
II. Hospitality, IT व स्वास्थ्य सेवाओं जैसे customer centric क्षेत्रों में वैश्विक अवसरों हेतु तैयार करने के लिए एक हजार युवाओं को अंग्रेजी, Japanese, French, German व Korean भाषा में प्रशिक्षण की सुविधा दी जायेगी।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से उन्हें Industry Ready एवं Employable बनाना हमारी प्राथमिकता है। इस दृष्टि से प्रत्येक जिले में Industry Partners को जोड़ते हुए Institute of Skill Development and Vocational Training प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है।
आज प्रदेश में iStart कार्यक्रम के तहत 7 हजार 500 (सात हजार पांच सौ) registered startups का एक समृद्ध Startup Eco-system तैयार हो गया है। इसे और अधिक व्यापक बनाये जाने के उद्देश्य से उभरते Startups की Mentorship व Scaling के लिए 'iStart Ambassador Programme' प्रारम्भ किया जायेगा।
Startups को बढ़ावा देने के लिए अजमेर, भरतपुर एवं कोटा में Tinkering Lab, Deep-Tech Labs, Data व AI Labs जैसी Next Generation Technology से युक्त नवीन Techno Hubs स्थापित किये जायेंगे। इस हेतु 30 करोड़ (तीस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
शिक्षा को employment oriented बनाये जाने के उद्देश्य से-
I. पूर्व में संचालित 4 हजार 19 (चार हजार उन्नीस) विद्यालयों के अतिरिक्त अब आगामी सत्र (2026-27) में 500 (पांच सौ) और विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू की जायेगी। इस पर 51 करोड़ 10 लाख (इक्यावन करोड़ दस लाख) रुपये का व्यय होगा।
II. 'School to Work' व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम की शुरूआत कर प्रत्येक जिले में एक विद्यालय को उन्नत व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत किया जाना प्रस्तावित है।
प्रदेश के विद्यार्थियों को समयबद्ध रूप से पूर्ण पारदर्शिता के साथ Tablet/Laptop, साइकिल व Uniform जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए DBT/e-Voucher की सुविधा दिये जाने की घोषणा। इस कड़ी में-
I. कक्षा 8वीं, 10वीं एवं 12वीं में अध्ययन करने वाले चयनित मेधावी विद्यार्थियों को स्वयं के स्तर पर Tablet/Laptop क्रय किये जाने के लिए e-Voucher के माध्यम से 20 हजार (बीस हजार) रुपये तक की सहायता उपलब्ध करायी जायेगी।
II. निःशुल्क साइकिल वितरण योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली जरूरतमंद छात्राओं को साइकिल हेतु e-Voucher दिये जायेंगे।
III. कक्षा 1 से 8 के 40 लाख (चालीस लाख) से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क Uniform उपलब्ध कराने के लिए DBT की जायेगी। इस हेतु लगभग 250 करोड़ (दो सौ पचास करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 3-6 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों को पारदर्शिता और सुगमता से उनकी पात्रतानुसार समस्त लाभ मिल सकें, इसके लिए Facial Recognition System (FRS) Biometric आधारित छात्रों/बच्चों की उपस्थिति पंजीकरण की व्यवस्था की जायेगी।
कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के माता-पिता/अभिभावकों को स्कूली गतिविधियों के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध कराने तथा बच्चों को घर पर पढ़ने में सहयोग प्रदान किये जाने के उद्देश्य से 'निपुण कलेण्डर' दिये जायेंगे। इस हेतु लगभग 16 करोड़ रुपये का व्यय किया जायेगा।
प्रदेश में विद्यालयों के साथ संचालित 22 हजार 746 (बाइस हजार सात सौ छियालिस) आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के समग्र विकास तथा खेल आधारित शिक्षा के लिए खेल सामग्री एवं “जादुई पिटारा” उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित है। इस हेतु लगभग 323 करोड़ (तीन सौ तेईस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
घुमन्तू एवं अर्द्ध-घुमन्तू समुदाय यथा-गाड़िया लोहार, बंजारा इत्यादि एवं मजदूर वर्ग के परिवारों को जीवनयापन के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है। इन परिवारों के बच्चे औपचारिक शिक्षा से वंचित न रह जायें, इस दृष्टि आगामी वर्ष Raj PAHAL (Portable Access for Holistic and Assisted Learning) कार्यक्रम आरम्भ करने की घोषणा। इस योजनान्तर्गत प्रथम चरण में प्रत्येक जिले में एक School on Wheels स्थापित किया जायेगा तथा migration prone क्षेत्रों में अस्थायी शिक्षा शिविर संचालित किये जायेंगे। साथ ही, शैक्षिक संभागों पर 6 माह के School Readiness Camps आयोजित किये जायेंगे।
प्रदेश में कक्षा 6 से 8वीं तक के विद्यार्थियों के भाषा एवं गणित में learning gaps को पूरा करने, Smart Learning Eco-system को बढ़ावा देने तथा व्यक्तिगत सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के एक हजार विद्यालयों में AI आधारित Personalised Learning Labs की स्थापना की जायेगी।
विद्यार्थियों एवं आमजन की STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) विषयों में रूचि बढ़ाने तथा अपने देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों से परिचय करवाने के लिए जोधपुर स्थित State Remote Sensing Application Centre (SRSAC) में Space Gallery का निर्माण करवाया जायेगा। साथ ही, Science Park, जयपुर में Space Gallery एवं Children Gallery का निर्माण किया जायेगा।
पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, पूर्व सैनिकों की विधवाओं तथा उनके आश्रितों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण की सुविधा दिये जाने के उद्देश्य से जोधपुर में मेजर शैतान सिंह कौशल विकास एवं प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की जायेगी।
प्रदेश के सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं तथा उनके आश्रितों को विभिन्न सुविधायें एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके, इसके लिए जोधपुर, टोंक, शेरगढ़, फलौदी, खैरथल, ब्यावर, झुंझुनूं तथा श्रीगंगानगर में Integrated सैनिक कॉम्पलैक्स की स्थापना की जानी प्रस्तावित है। प्रथम चरण में जोधपुर, टोंक, शेरगढ़ तथा झुंझुनूं में इन कॉम्पलैक्स का निर्माण 36 करोड़ (छत्तीस करोड़) रुपये की लागत से करवाया जायेगा।
एक अप्रेल, 1999 (उन्नीस सौ निन्यानवे) के पश्चात् (Post-Kargil) युद्धों में हुए शहीद/Permanently Disabled सैनिकों के कक्षा एक से 12 (बारह) में पढ़ने वाले बच्चों तथा भूतपूर्व सैनिकों की कक्षा 11 (ग्यारह) व 12 (बारह) में पढ़ने वाली प्रतिभावान पुत्रियों को देय छात्रवृत्ति क्रमशः 180 (एक सौ अस्सी) व 100 (सौ) रुपये प्रतिमाह को बढ़ाकर 2 हजार 500 रुपये वार्षिक किया जाना प्रस्तावित है।
नवीन कलेवर में Career Counselling, Smart Boards, VC Setup तथा Building as Learning Aid जैसी आधुनिक सुविधा आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान किये जाने की दृष्टि से 400 (चार सौ) विद्यालयों को चरणबद्ध रूप से CM-RISE (Rajasthan Innovative School of Excellence) स्कूलों में क्रमोन्नत किये जाने की घोषणा। इस पर एक हजार करोड़ रुपये का व्यय किया जायेगा।
ग्रामीण युवाओं को खेल प्रतियोगिता के लिए तैयार करने के लिए 2 हजार 500 से अधिक की आबादी वाली ग्राम पंचायतों में Open Gym एवं खेल मैदान सम्बन्धी सुविधायें चरणबद्ध रूप से विकसित की जायेंगी।
खेल परिषद् की अकादमियों व स्टेडियम में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले Athletes की Performance मापने के लिए online platform SPEED (Sports Performance Enhancement and Efficiency Development) विकसित किया जायेगा।
चित्तौड़गढ़ में इंदिरा गांधी स्टेडियम पर सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रेक की स्थापना 10 करोड़ रुपये की लागत से की जायेगी।
नाथद्वारा-राजसमंद में राणा पुंजा जनजातीय खेल अकादमी की स्थापना हेतु 10 करोड़ रुपये का व्यय किया जायेगा।
लालगढ़ जटान (सादुलशहर)-श्री गंगानगर में हैण्डबॉल अकादमी शुरू की जायेगी।
'खेलो राजस्थान Youth Games' के ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर आयोजन किये जाने के लिए आगामी वर्ष 50 करोड़ (पचास करोड़) रुपये व्यय किये जायेंगे।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य :
आमजन के स्वास्थ्य का राज्य की समृद्धि और उत्पादकता में प्रत्यक्ष योगदान होता है। वर्ष 2047 (दो हजार सैंतालीस) तक 'समृद्ध राजस्थान-स्वस्थ राजस्थान' के लिए हमारा लक्ष्य है-स्वास्थ्य सेवाओं का Universal Coverage, 77 (सतहत्तर) वर्ष से अधिक Life Expectancy, मातृ मृत्यु दर (MMR) को घटाकर 15 (पन्द्रह) प्रति लाख व शिशु मृत्यु दर (IMR) को घटाकर 10 प्रति हजार live births से कम करते हुए सशक्त Emergency Response System का निर्माण।
सड़क दुर्घटना, प्रसूति, Heart Attack जैसी आपात स्थितियों में मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके, इसके लिए RAJ-SURAKSHA (Rajasthan System for Urgent Response, Accident Stabilization and Hospital Access) योजना लागू किये जाने की घोषणा। इस योजना के अन्तर्गत-
I. निकटतम चिकित्सा संस्थानों एवं उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं की सटीक जानकारी व परामर्श दिये जाने की दृष्टि से 24x7 Critical Care Command Centre की स्थापना की जायेगी। साथ ही, निकटतम उपलब्ध चिकित्सकों/संस्थानों की Repository भी बनायी जायेगी। II. गम्भीर दुर्घटना प्रकरणों के लिए राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से स्थानीय डॉक्टरों को live consultation की सुविधा उपलब्ध करवायी जायेगी। III. स्थानीय स्तर पर ही हृदयाघात की समय पर पहचान कर रोगियों का जीवन बचाया जा सके, इसके लिए CHC पर ही ECG/Tele-ECG एवं Thrombolysis की सुविधायें उपलब्ध करायी जायेंगी। IV. संभाग स्तर पर समस्त चिकित्सकों व Para Medical Staff को चरणबद्ध तरीके से Cardiac Life Support Certification Course का प्रशिक्षण दिया जायेगा। V. सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को कम करने के लिए ड्राईविंग लाइसेंस धारकों के लिए CPR का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित है। VI. 250 (दो सौ पचास) अति आधुनिक Ambulances चरणबद्ध रूप से उपलब्ध करवायी जायेंगी। Highways पर Rest Areas में Ambulances तैनात की जायेंगी।
इसी योजना के अन्तर्गत Trauma and Emergency Policy लाने के साथ ही Trauma सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 150 करोड़ (एक सौ पचास करोड़) रुपये की लागत से विभिन्न सुविधायें विकसित की जायेंगी।
आपातकालीन परिस्थितियों में आमजन की जीवन रक्षा हेतु प्राथमिक उपचार दिये जाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता संवर्द्धन के लिए अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा एवं जोधपुर में Basic Life Support (BLS) Training Centres की स्थापना की जायेगी।
'सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य' के दीर्घकालिक लक्ष्य की प्राप्ति के साथ-साथ बदलती जीवनशैली एवं प्रतिस्पर्धा के वर्तमान परिवेश में अवसाद, चिन्ता एवं आत्महत्या आदि की रोकथाम हेतु Raj-MAMTA (Rajasthan Mental Awareness, Mentoring and Treatment for All) Programme चलाया जायेगा। इसके अन्तर्गत-
I. Counselling, Tele-medicine आदि के लिए सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर में Center of Excellence in Mental Health की स्थापना की जायेगी। II. मानसिक रोगों की शीघ्र पहचान कर परामर्श, उपचार, पुनर्वास एवं Referral सेवायें उपलब्ध कराने के लिए जिला मुख्यालयों पर Mental Health Care Cell की स्थापना की जायेगी। III. जिला चिकित्सालयों में Psychiatric चिकित्सकों के साथ Psychological Counsellors लगाये जायेंगे। IV. विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में Stress Management and Mental Health Awareness Campaign चलाये जायेंगे। V. उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित काउंसलर द्वारा प्रतिमाह न्यूनतम एक Stress cum Mental Health Counselling and Awareness Session किया जाना अनिवार्य किया जायेगा।
बच्चों को इलाज की बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से जेके लोन चिकित्सालय-जयपुर में 500 (पांच सौ) bed क्षमता के IPD Tower की स्थापना 75 करोड़ (पचहत्तर करोड़) रुपये की लागत से की जायेगी। साथ ही, चिकित्सालय में Pediatric Neurology विभाग स्थापित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त, RUHS चिकित्सालय में 200 बेड का Pediatric IPD मय Neo-natal ICU भी विकसित किया जायेगा।
चिकित्सालयों में wards की साफ-सफाई, देखभाल आदि सुविधाओं की नियमित monitoring; आकस्मिक दुर्घटना होने पर त्वरित response तथा मरीजों व उनके परिजनों से प्राप्त feedback के आधार पर व्यवस्था में सुधार किये जाने की दृष्टि से Integrated Raj Swasthya App विकसित किया जायेगा।
मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु जयपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा व जोधपुर के चिकित्सा महाविद्यालयों के मुख्य चिकित्सालयों में 500 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक विश्राम गृह स्थापित किये जायेंगे।
चिकित्सा महाविद्यालयों से सम्बद्ध अस्पतालों में मरीजों, उनके परिजनों, स्टाफ एवं विद्यार्थियों को उचित दर पर पौष्टिक भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अटल आरोग्य फूड कोर्ट स्थापित किये जायेंगे। इस हेतु 100 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।
दुर्घटना में जान गंवाने वाले मृतक के पार्थिव शरीर को चिकित्सालय की mortuary से सम्मानपूर्वक घर तक पहुँचाने हेतु निःशुल्क सुविधा के लिए 'मोक्ष वाहिनी योजना' शुरू की जायेगी।
पांचवाँ स्तम्भ : सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा प्रणाली
महिला सशक्तीकरण एवं financial inclusion के दृष्टिगत 16 लाख (सोलह लाख) से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाया गया है। इसी कड़ी में, ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने एवं रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाने के लिए जिला स्तर पर Rural Women BPO स्थापित किये जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही, महिला उद्यमिता को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए-
I. मुख्यमंत्री लखपति दीदी ऋण योजना के अन्तर्गत राज्य की लखपति दीदियों को ब्याज अनुदान पर दिये जा रहे ऋण की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर एक लाख 50 हजार (एक लाख पचास हजार) रुपये किये जाने की घोषणा।
II. राजीविका के अन्तर्गत संगठित 100 Cluster Level Federations (CLFs) के कार्यालय एवं अन्य उपयोग के लिए भवन उपलब्ध करवाये जायेंगे। साथ ही, इन कार्यालयों में Digital एवं Financial Literacy के लिए 'Saksham Centres' भी संचालित किये जायेंगे। इस हेतु 25 करोड़ (पच्चीस करोड़) रुपये व्यय किया जाना प्रस्तावित है।
III. राजीविका की स्वयं सहायता समूह की लगभग 5 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित कर बीसी (Banking Correspondent) सखी बनाया जायेगा। साथ ही, एक हजार महिलाओं को प्रशिक्षित कर बैंक सखी के रूप में ग्रामीण बैंक शाखाओं से जोड़ा जायेगा।
स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा बनाये गये उत्पादों की बेहतर Branding, Designing, Packaging कर बिक्री में वृद्धि किये जाने के लिए राष्ट्रीय/अन्तरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से समन्वय कर आगामी वर्ष Dairy, Textile, Footwear, Millets, मसाले आदि से सम्बन्धित क्षेत्रों के 50 (पचास) नवीन Enterprises स्थापित किये जायेंगे। इस हेतु लगभग 20 करोड़ (बीस करोड़) रुपये का व्यय होगा।
राजीविका के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक capital की व्यवस्था करने के साथ क्षमता संवर्द्धन एवं Marketing आवश्यक है। इस हेतु समस्त संभागीय मुख्यालयों पर 'Raj Sakhi Stores' प्रारम्भ किये जायेंगे। क्षमता संवर्द्धन हेतु सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से Centre for Entrepreneurship and Capacity Building स्थापित किये जायेंगे।
प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दृष्टि से मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत महिला/SHG को दिये जाने वाले ऋण की सीमा 50 लाख (पचास लाख) रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा।
प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में Mid-Day Meal के लिए स्थानीय स्तर पर फल, सब्जी आदि उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिला SHGs के आजीविका संवर्द्धन की दृष्टि से 11 हजार (ग्यारह हजार) अमृत पोषण वाटिकाओं का निर्माण किये जाने की घोषणा। इस हेतु लगभग 500 करोड़ (पांच सौ करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
राज्य में 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण Early Childhood Care एवं Pre-School Education उपलब्ध कराने के लिए-
I. ‘Rajasthan State Early Childhood Care, Development and Education Policy’ बनायी जायेगी।
II. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को Early Childhood Care and Education Course करवाया जायेगा।
III. एक हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उत्कृष्ट कार्यकर्ता के रूप में सम्मानित कर प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से विशिष्ट प्रशिक्षण दिलवाया जायेगा।
आंगनबाड़ियों में मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण सम्बन्धी कार्यों हेतु 246 करोड़ रुपये (दो सौ छियालिस करोड़) की लागत से मरम्मत कार्य करवाये जा रहे हैं। इसी कड़ी में, आगामी वर्ष-
I. 7 हजार 500 (सात हजार पांच सौ) आंगनबाड़ियों को 'नन्द घर' के रूप में विकसित किये जाने के लिए 225 करोड़ (दो सौ पच्चीस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
II. लगभग 3 हजार 800 (तीन हजार आठ सौ) आंगनबाड़ी केन्द्रों के मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य 80 करोड़ (अस्सी करोड़) रुपये से अधिक की लागत से करवाये जायेंगे।
III. विद्युत कनेक्शन से वंचित राजकीय भवनों में संचालित 17 हजार 95 (सत्रह हजार पंचानवे) आंगनबाड़ी केन्द्रों पर विद्युत Connections कराये जायेंगे।
प्रदेश में भरतपुर तथा कोटा में समेकित बाल विकास सेवायें तथा महिला अधिकारिता कार्यालयों के लिए ‘महिला एवं बाल शक्ति संकुल’ बनाये जाने प्रस्तावित हैं।
वर्तमान में Aspirational जिलों-करौली, धौलपुर, बारां, जैसलमेर एवं सिरोही में संचालित किशोरी बालिका योजना का विस्तार करते हुए राज्य के समस्त 27 (सत्ताइस) Aspirational Blocks में किशोरी बालिकाओं को पूरक पोषाहार का लाभ दिया जाना प्रस्तावित है। इससे योजनान्तर्गत 50 हजार (पचास हजार) से अधिक बालिकायें लाभान्वित होंगी।
राजकीय बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह, जामडोली-जयपुर में बालक व बालिका विंग की क्षमता 125 से बढ़ाकर 250 की जायेगी।
जहाजपुर-भीलवाड़ा में अम्बेडकर बालक छात्रावास, जैतारण-ब्यावर में सावित्री बाई फूले बालिका छात्रावास, भिनाय-अजमेर में देवनारायण बालक आवासीय विद्यालय, लवाण-दौसा में देवनारायण बालक छात्रावास तथा ठंडी बेरी (पिण्डवाड़ा)-सिरोही में जनजाति बालिका छात्रावास खोले जायेंगे। साथ ही, देवनारायण बालिका आवासीय विद्यालय-कोलर (शिवगंज)-सिरोही में विज्ञान संकाय शुरू किया जायेगा।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित 42 (बयालीस) आवासीय विद्यालयों के 15 हजार (पन्द्रह हजार) विद्यार्थियों को बेहतर Learning Outcome तथा उच्चतर शिक्षण संस्थानों में प्रवेश की तैयारी के उद्देश्य से IIT, दिल्ली के सहयोग से AI आधारित 24x7 Live Academic Mentoring की सुविधा उपलब्ध करवायी जायेगी।
प्रदेश के बारां जिले में निवासरत सहरिया व खैरवा तथा उदयपुर जिले के कथौड़ी जनजाति परिवारों को प्रतिमाह घी, तेल एवं दाल वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए योजना में पात्र परिवारों की महिला मुखिया को एक हजार 200 (एक हजार दो सौ) रुपये प्रतिमाह DBT किये जाने की घोषणा। इस हेतु 55 करोड़ (पचपन करोड़) रुपये का व्यय कर लगभग 38 हजार (अड़तीस हजार) परिवारों को लाभान्वित किया जायेगा।
प्रदेश के जनजातीय युवकों को रोजगार व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए आंवला, शहद, इमली, महुआ आदि के उत्पादों की Processing हेतु बांसवाड़ा व उदयपुर जिला मुख्यालयों पर Minor Forest Produce Processing Centres स्थापित किये जायेंगे।
श्रमिकों के कल्याण एवं रोजगार अवसरों में वृद्धि हेतु श्रम-सेतु Mobile App शुरू किया जायेगा। इसके माध्यम से श्रमिक पंजीकरण, पहचान-पत्र, रोजगार की माँग एवं आपूर्ति हेतु डिजिटल लेबर चौक, कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी तथा BOCW Cess के online assessment एवं भुगतान की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
छठा स्तम्भ: पर्यटन, कला एवं सांस्कृतिक धरोहर
'विकास भी, विरासत भी' की सोच के साथ राज्य को पर्यटन प्रदेश के रूप में स्थापित करने तथा पर्यटकों के लिए सुविधायें विकसित किये जाने के लिए 5 हजार करोड़ (पांच हजार करोड़) रुपये से अधिक के कार्यों के लिए Rajasthan Tourism Infrastructure and Capacity Building Fund (RTICF) का गठन भी किया गया है।
राजस्थान को वर्ष 2047 तक एक ग्रामीण, वैश्विक व Eco-tourism तथा सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में विकसित किये जाने के लिए प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं के साथ-साथ हैरिटेज संरक्षण व धार्मिक पर्यटन सम्बन्धी विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे। ये कार्य हैं-
पर्यटन सुविधायें एवं हैरिटेज संरक्षण सम्बन्धी विभिन्न कार्य
पर्यटन तथा धार्मिक आस्था की दृष्टि से तनोट-जैसलमेर के समग्र विकास के लिए Comprehensive Plan बनाया जायेगा।
हैरिटेज शहरों यथा-पुष्कर, खाटूश्यामजी, नाथद्वारा, केशोरायपाटन, डीग तथा चित्तौड़गढ़ में Heritage Walk-Way का 30 करोड़ रुपये व्यय कर निर्माण करवाया जायेगा।
जयपुर स्थित आमेर किले एवं सम्पूर्ण आमेर कस्बे में विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधायें यथा-Digital Museum, Signages, Lights, Parking आदि के लिए 50 करोड़ रुपये का व्यय किया जायेगा।
गढ़ पैलेस-झालावाड़; मंदिर समूह किराडू-बाड़मेर; सरवाड़ किला-अजमेर तथा सुनहरी कोठी-टोंक में संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के कार्य 18 करोड़ रुपये की लागत से करवाये जायेंगे।
(a) दौसा जिले के बांदीकुई में संत श्री दुर्बलनाथ जी का पेनोरमा, सिवाना-बालोतरा में वीर दुर्गादास पेनोरमा तथा सलूम्बर में हाड़ी रानी पेनोरमा का निर्माण किया जायेगा।
(b) वीर तेजाजी पेनोरमा, खरनाल-नागौर में विकास कार्य करवाये जायेंगे।
(c) एमडीएस विश्वविद्यालय-अजमेर में महर्षि दयानन्द सरस्वती के पेनोरमा का निर्माण किया जायेगा।
पर्यटन की दृष्टि से राजसमंद में अन्नपूर्णा माताजी मंदिर से दयाशाह किला तक रोप-वे निर्माण तथा मुखर्जी चौराहे से इरिगेशन पाल होते हुए द्वारिकाधीश मंदिर (लाल बंगला) तक एलिवेटेड/रिंग रोड, पार्किंग आदि के निर्माण हेतु Feasibility Study करवायी जायेगी। साथ ही, बाकी माता, रायसर (जमवारामगढ़)-जयपुर के प्राचीन मंदिर में रोप-वे का निर्माण किया जायेगा।
मंदिरों के विकास कार्य-
प्राचीन फूलदेवरा महादेव मंदिर (अटरू)-बारां, नईनाथ शिव जी का मंदिर, नईनाथ धाम (जमवारामगढ़)-जयपुर, चांमड माता मंदिर-पैगोर (कुम्हेर)-डीग, कदमखंडी धाम, एंचेरा (नदबई)-भरतपुर, श्री कार्योवर्णेश्वर महादेव मंदिर व श्री झरनेश्वर महादेव मंदिर-क्यासरा (झालरापाटन)-झालावाड़, कुलोद माता मंदिर-झुंझुनूं, माँ उष्ट्रवाहिनी माता मंदिर-जोधपुर, घाटेश्वर महादेव मंदिर-घाटवा (नावां)-डीडवाना कुचामन, श्री करूणामूर्ति धाम-भादवासी (सुमेरपुर)-पाली, मकरमण्डी माताजी मंदिर (जैतारण)-ब्यावर, पलासिया धाम (खण्डेला)-सीकर के विकास कार्य लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से करवाये जायेंगे।
जवाहर कला केन्द्र-जयपुर में शिल्पग्राम का 15 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्माण करवाया जायेगा।
जयपुर में राजस्थान मंडपम के साथ-साथ एक विश्वस्तरीय Exhibition Space का निर्माण भी कराया जायेगा।
राजस्थान राज्य अभिलेखागार, उदयपुर के नवीन भवन का निर्माण किया जायेगा।
तारागढ़-अजमेर, पोकरण-जैसलमेर व भड़केश्वर (गढ़ी)-बांसवाड़ा में पर्यटन सम्बन्धी सुविधाओं का विकास किया जायेगा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक धानक्या-जयपुर के सुदृढ़ीकरण के कार्य करवाये जायेंगे।
प्रदेश में पर्यटन की अपार सम्भावनाओं को धरातल पर लाने की दृष्टि से High Impact Last Mile Infrastructure का निर्माण करते हुए पर्यटकों के on ground tourist experience को चिरस्थायी व यादगार बनाये जाने की कड़ी में-
I. पर्यटन एवं Hospitality की दृष्टि से खुड़ी-जैसलमेर में ultra luxury Special Tourism Zone (STZ) विकसित किया जायेगा। साथ ही, कुलधरा में पर्यटक सुविधा केन्द्र विकसित किया जायेगा।
II. पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुष्कर, खाटूश्यामजी, देशनोक, पोकरण, डिग्गी एवं मण्डावा नगरीय निकायों में मुख्य प्रवेश मार्ग को Model Road के रूप में विकसित किये जाने एवं सौन्दर्यीकरण के लिए 30 करोड़ (तीस करोड़) रुपये व्यय किये जायेंगे।
भरतपुर में अत्याधुनिक ब्रज कन्वेंशन सेंटर का निर्माण 100 करोड़ रुपये की लागत से किया जायेगा।
राजस्थान की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक समृद्धि का चित्रण करने वाली शेखावाटी क्षेत्र की भित्ति चित्र युक्त हवेलियां हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण एवं विकास के लिए-
I. शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना के अन्तर्गत झुंझुनूं, चूरू एवं सीकर में 660 (छह सौ साठ) से अधिक चिन्हित हवेलियों के Facade Improvement के साथ-साथ Heritage Street Furniture व साफ-सफाई सम्बन्धी सुविधायें विकसित की जायेंगी। साथ ही, हवेली को पर्यटन इकाई के रूप में परिवर्तित करने वाले हवेली स्वामी को वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी। इसके लिए आगामी 2 वर्षों में 200 करोड़ (दो सौ करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
II. शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियों को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दृष्टि से यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में सम्मिलित कराने हेतु आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।
पश्चिमी राजस्थान की मरूस्थलीय संस्कृति, विरासत, जीवनशैली, लोक कला की विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जालोर को शामिल करते हुए 'थार सांस्कृतिक सर्किट' बनाये जाने की घोषणा।
वीरों की धरती राजस्थान के बहादुर सपूतों के देश की सुरक्षा में योगदान तथा उनकी वीरता और बलिदान को सम्मान दिये जाने के उद्देश्य से झुंझुनूं में War Museum की स्थापना की जायेगी।
वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 6 हजार (छह हजार) वरिष्ठजन को हवाई मार्ग से पशुपतिनाथ काठमांडू (नेपाल) तथा 50 हजार (पचास हजार) वरिष्ठजन को AC Train से विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा करवायी जानी प्रस्तावित है।
Rural Tourism को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पर्यटकों के लिए Home Stay चलाने वाले व्यक्तियों को बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जायेगा एवं Hospitality Management में प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही, इस हेतु चयनित गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास कार्य करवाये जायेंगे।
गैर, पद दंगल, भवाई, घूमर जैसे लोक नृत्य हमारे प्रदेश की अनुपम सांस्कृतिक विरासत हैं। इस विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी को इन लोक नृत्यों से जोड़ने के लिए संभाग स्तर पर 'लोक नृत्य उत्सव' आयोजित करवाये जायेंगे।
पर्यटकों की सुरक्षा व सहयोग हेतु पर्यटन सहायता बल (TAF) कैडर का सुदृढ़ीकरण करते हुए महिला सुरक्षाकर्मियों एवं Guides की भी नियुक्ति की जायेगी। इस हेतु 10 करोड़ (दस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
देवस्थान विभाग की धर्मशालाओं की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के कार्य करवाये जायेंगे। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए देवस्थान विभाग के अधीन रिक्त भूमि पर धर्मशालाओं के निर्माण एवं संचालन हेतु Build-Operate-Transfer (BOT) आधारित नवीन नीति बनायी जानी भी प्रस्तावित है।
राज्य में बेहतर Air connectivity उपलब्ध कराने के लिए सीकर-झुंझुनूं तथा भरतपुर-डीग क्षेत्र में नवीन Airports स्थापित किये जाने हेतु feasibility study करवायी जायेगी। साथ ही, सवाई माधोपुर एवं बांसवाड़ा में Flying Training Organisations (FTOs) स्थापित किये जायेंगे।
सातवाँ स्तम्भ : सुशासन एवं डिजिटल परिवर्तन
डिजिटल शासन, पारदर्शी प्रशासन:
प्रदेशवासियों को सेवाओं की सुलभ, त्वरित एवं प्रभावी पहुँच सुनिश्चित हो। इसके लिए Next Generation Citizen Service Reforms लाये जाने की घोषणा। इनके अन्तर्गत-
I. 'Once-Only Principle' को लागू किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें विभाग आपस में डेटा साझा करेंगे। नागरिकों और उद्यमियों से कोई भी दस्तावेज केवल एक ही बार लिया जायेगा।
II. प्रदेशवासियों को पात्रतानुसार समस्त विभागों की लाभकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल सके, इसके लिए जनाधार डेटा बेस को 360 Degree Approach पर, विभिन्न विभागों के मापदण्डों एवं Portals से जोड़ा जाकर पात्रता निर्धारण को बेहतर किया जायेगा।
III. समस्त नगरीय निकायों में चरणबद्ध रूप से स्मार्ट सेवा केन्द्र स्थापित कर आमजन को जन्म, मृत्यु एवं विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र, Fire NOC एवं अन्य अनुज्ञा पत्रों सम्बन्धी सेवायें online व समयबद्ध रूप से उपलब्ध करवायी जायेंगी।
IV. वर्तमान में प्रदेशवासियों को e-Mitra के माध्यम से 600 (छह सौ) से अधिक सेवायें उपलब्ध करवायी जा रही हैं। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 100 (सौ) प्रमुख सेवाओं को Whats App Platform पर भी शुरू किया जाना प्रस्तावित है।
V. साथ ही, मोबाइल आधारित सेवा प्रदान करने के लिए 25 हजार (पच्चीस हजार) युवाओं एवं महिलाओं को 'Mini e-Mitra' के रूप में अधिकृत किया जायेगा।
डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा देने हेतु State Data Centre की विभिन्न सुविधाओं जैसे-Co-location, Cloud Storage, Backup, Cyber Security आदि सेवाओं को Startups, MSME एवं नागरिकों को किफायती दर पर उपलब्ध कराने हेतु Digital Infrastructure Facilitation Policy लायी जायेगी।
प्रदेश में आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन, कृषि एवं पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में निर्णय क्षमता संवर्द्धन के लिए Geo Spatial Policy लायी जायेगी।
आज के परिवेश में नीति निर्माण में data की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए result oriented जनकल्याणकारी योजनाओं की संरचना व evidence based नीति निर्माण के लिए Dedicated Data and Policy Strategy Unit**-CM PRAMAN** (Policy, Research and Analytics for Measurable Action and Nexus) स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
राजस्थान को विकसित प्रदेश बनाने का roadmap तैयार करने के लिए नीति आयोग की तर्ज पर प्रदेश में Rajasthan Institute for Transformation and Innovation (RITI) का गठन किया गया है।
विकसित राजस्थान @2047 (दो हजार सैंतालीस) के संकल्प के अनुरूप सरकारी स्वामित्व की बंजर, चरागाह, बीहड़, चरनोट, शामलात भूमियों का उपयोग सहित विवरण उपलब्ध हो सके, इस हेतु GIS आधारित Digital Records तैयार कर Real Time update करने के लिए 'मरूधरा राजभूमि Digital Atlas' बनाया जाना प्रस्तावित है।
कानून व्यवस्था :
प्रदेशवासियों को अपराध मुक्त सुरक्षित वातावरण देना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है एवं हम राज्य में अपराधों की संख्या में कमी लाये हैं। साथ ही आपराधिक प्रकरणों में त्वरित अनुसंधान की कार्रवाई कर दुष्कर्म प्रकरणों के निस्तारण में औसत समय 106 (एक सौ छह) दिवस से घटाकर 56 (छप्पन) दिवस तथा पोक्सो प्रकरणों के निस्तारण का समय 102 (एक सौ दो) दिवस से कम कर 59 (उनसठ) दिवस तक ले आये हैं।
आजकल 'Digital Arrest' की काफी घटनायें सामने आ रही हैं। आम नागरिकों को ऐसी घटनाओं से बचाने तथा प्रदेश में साइबर अपराधों पर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए Rajasthan Cyber Crime Control Centre (R4C) की स्थापना की जायेगी। साथ ही, साइबर सुरक्षा सम्बन्धी अन्य कार्य कराये जाने प्रस्तावित हैं।
जोधपुर, जयपुर, अलवर एवं उदयपुर में नवीन केन्द्रीय कारागृह भवनों का चरणबद्ध रूप से निर्माण NBCC Pattern पर कराया जाना प्रस्तावित है। इन पर एक हजार 200 करोड़ (एक हजार दो सौ करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
कार्मिक कल्याण :
प्रदेश के कर्मचारी संगठनों द्वारा पदोन्नति के समुचित अवसर प्रदान करने व वेतनमान में संशोधन सम्बन्धी विभिन्न मांगों का तुलनात्मक अध्ययन व विश्लेषण कर अनुशंषा किये जाने हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जायेगा। यह समिति भविष्य में आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने पर उसे राज्य में लागू करने के सम्बन्ध में आवश्यक परीक्षण कर अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगी।
राजकीय विभागों में रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने एवं प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को समुचित अवसर प्रदान करने की दृष्टि से किसी पद पर अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थी की कार्यग्रहण के पश्चात् एक वर्ष की अवधि में सेवा के परित्याग/मृत्यु/पदच्युति होने की स्थिति में उस पद के विरूद्ध वर्गवार प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों से चयन किये जाने के सम्बन्ध में प्रावधान किये जायेंगे।
वर्तमान में महिला कर्मचारियों को एक कलेण्डर वर्ष में Child Care Leave अधिकतम तीन चरण में दिये जाने का प्रावधान है। एकल महिला कर्मचारी की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अब उनके लिए यह अवकाश छः चरणों में स्वीकृत किया जाना प्रस्तावित है।
राज्य सरकार तथा सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के समग्र कल्याण हेतु 'Salary Account Package' लाया जायेगा। इसके अन्तर्गत salary account के साथ advanced digital बैंकिंग सुविधायें, रियायती दर पर ऋण तथा बीमा इत्यादि सुविधायें उपलब्ध करवायी जायेंगी। यह सुविधा 70 वर्ष तक की उम्र के पेंशनर्स को भी दी जायेगी।
राजकीय कार्यालयों में महिला कार्मिकों को तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से कार्यालय समय में उनके 6 माह से 6 वर्ष के बच्चों की देखभाल हेतु चरणबद्ध रूप से 'मुख्यमंत्री शिशु-वात्सल्य सदन' खोले जायेंगे।
राज्य में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतीराज संस्थाओं को राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार की तर्ज पर State Panchayat Awards दिये जाने प्रस्तावित हैं।
आठवाँ स्तम्भ : कृषि विकास एवं किसानों का कल्याण
कृषि बजट के अन्तर्गत वर्ष 2026-27 में समेकित निधि (Consolidated Fund), राज्य की स्वायत्तशासी, सहकारी एवं अन्य संस्थाओं के स्वयं के संसाधनों सहित कुल राशि 1 लाख 19 हजार 4 सौ 8 करोड़ 11 लाख रुपये (एक लाख उन्नीस हजार चार सौ आठ करोड़ ग्यारह लाख रुपये) का प्रावधान किया गया है। कृषि बजट में से राशि 69 हजार 4 सौ 22 करोड़ 99 लाख रुपये (उनहत्तर हजार चार सौ बाईस करोड़ निन्यानवें लाख रुपये) समेकित निधि से व्यय की जानी प्रस्तावित है जो राज्य के कुल बजट का 11.36% (ग्यारह दशमलव तीन छः प्रतिशत) है। कृषि बजट में गत वर्ष से 7.59 % (सात दशमलव पाँच नौ प्रतिशत) की वृद्धि अनुमानित है तथा कृषि बजट GSDP का 5.55 % (पाँच दशमलव पाँच पाँच प्रतिशत) है।
सिंचाई :
सीकर, झुंझुनूं, चूरू एवं अन्य जिलों की पिछले 30 (तीस) वर्षों से लम्बित पेयजल एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हरियाणा से MoU कर प्रदेश को अपने हिस्से का पानी दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यमुना जल को हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी क्षेत्र तक लाये जाने के लिए 32 हजार करोड़ (बत्तीस हजार करोड़) रुपये की लागत की इस परियोजना के अन्तर्गत कार्य शीघ्र ही प्रारम्भ किये जायेंगे।
वर्तमान में सकल बोये गये क्षेत्र का 24 (चौबीस) प्रतिशत भाग सूक्ष्म सिंचाई के अन्तर्गत है। विकसित राजस्थान की संकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए इसे वर्ष 2030 (दो हजार तीस) तक बढ़ाकर 51 (इक्यावन) प्रतिशत किये जाने हेतु आगामी वर्ष राज्य में लगभग 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हेतु सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र स्थापित किये जायेंगे। इस हेतु लगभग एक हजार 340 करोड़ (एक हजार तीन सौ चालीस करोड़) रुपये व्यय कर 3 लाख किसानों को लाभान्वित किया जायेगा।
यमुना जल समझौते के अन्तर्गत ओखला बैराज से आवंटित जल को भरतपुर एवं डीग जिलों की 6 तहसीलों हेतु गुड़गांव कैनाल फीडर की 17.46 किमी. व गुड़गांव कैनाल की 16.15 किमी. नहर तथा भरतपुर फीडर की 14 किमी. लम्बाई में नहर सुदृढ़ीकरण एवं नवीनीकरण के कार्य-डीग, भरतपुर
छोटी कालीसिंध व चाचूर्णी नदी पर मध्यम सिंचाई परियोजना-झालावाड़ के अन्तर्गत फव्वारा पद्धति से सिंचाई सुविधा विकसित करने के कार्य
टोंक जिले की बीसलपुर परियोजना की दायीं मुख्य नहर के 5 हजार हेक्टेयर कमाण्ड क्षेत्र में फव्वारा पद्धति से सिंचाई सुविधा का कार्य लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से करवाया जायेगा। इससे लगभग 10 हजार 500 कृषक लाभान्वित होंगे।
राज्य में सौर पम्प संयंत्रों के प्रोत्साहन हेतु आगामी वर्ष 50 हजार (पचास हजार) सोलर पम्प संयंत्रों की स्थापना की जायेगी। इस पर एक हजार 500 करोड़ (एक हजार पांच सौ करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान साथियों को विभिन्न कृषि यंत्रों यथा**-Power Tiller, Disc Plough,Cultivator,Harrow,Reaper** आदि हेतु 160 करोड़ (एक सौ साठ करोड़) रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 50 हजार (पचास हजार) कृषक लाभान्वित होंगे। साथ ही, आगामी वर्ष 500 (पांच सौ) Custom Hiring Centres की 96 करोड़ (छियानवे करोड़) रुपये की लागत से स्थापना की जायेगी।
उन्नत बीज, भूमि सुधार, Bio-Agents एवं Minor Millets सम्बन्धी कार्य
आगामी वर्ष 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट का वितरण किया जाना प्रस्तावित है। इस हेतु 33 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा। गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन हेतु मुख्यमंत्री बीज स्वावलम्बन योजना अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित है। इस योजनान्तर्गत 50 करोड़ रुपये का व्यय कर 3 लाख कृषकों को लाभान्वित किया जायेगा।
क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए 50 हजार ढैंचा बीज मिनिकिट का कृषकों को निःशुल्क वितरण किया जायेगा।
राज्य में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार कृषकों को नेपियर घास का निःशुल्क वितरण किया जायेगा।
कृषि उत्पादों के गुणवत्ता संवर्द्धन में Bio-Agents की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इनका उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 200 मीट्रिक टन किया जाना प्रस्तावित है।
Nano Urea एवं Nano DAP को बढ़ावा देने हेतु एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इनके छिड़काव के प्रदर्शनों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा।
Minor Millets की बढ़ती मांग तथा जनजाति क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, रागी आदि Minor Millets के 100 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शन आयोजित कर एक हजार कृषकों को लाभान्वित किया जायेगा।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में Vermi-compost इकाई स्थापित करने के संकल्प को पूरा करने की दृष्टि से सर्वप्रथम 5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 (तीन हजार चार सौ छियानवे) ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से Vermi-compost इकाइयाँ स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 2 हजार 98 (दो हजार अट्ठानवे) ग्राम पंचायतों में इस हेतु लगभग 270 करोड़ (दो सौ सत्तर करोड़) रुपये से अधिक का व्यय किया जायेगा।
Ease of Doing Farming एवं क्षमता विकास सम्बन्धी कार्य
कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र में AI/ML का वृहद स्तर पर उपयोग किये जाने व उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ कृषकों को data driven consultancy services, precision input management, crop planning support व market intelligence की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए Agri Stack PMU का गठन किया जायेगा।
Raj-Kisan Sathi Portal 3.0 पर विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत आवेदन से अनुदान तक की गतिविधियों के Online Modules का upgradation किया जायेगा।
कृषकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, उनकी क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से Knowledge Enhancement Programme के अन्तर्गत आगामी वर्ष 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर Exposure Visit करवायी जानी प्रस्तावित है।
मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले उत्पादों यथा-Royal Jelly, Comb Honey व मधुमक्खी पराग के उत्पादन की जानकारी देने के लिए एक हजार मधुमक्खी पालकों को Kit, Workshop व Exposure Visit की सुविधा उपलब्ध करवायी जायेगी।
डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली-Raj-AIMS (Rajasthan Agriculture Information and Management System) विकसित की जायेगी। इसके अन्तर्गत कृषि में AI/ML, GIS, Remote Sensing एवं Satellite imagery आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य की निगरानी सम्बन्धी सुविधायें उपलब्ध करायी जायेंगी। इस हेतु 77 करोड़ (सतहत्तर करोड़) रुपये व्यय किये जायेंगे।
प्रदेश में चूरू सहित खारे पानी की उपलब्धता वाले जिलों में झींगा पालकों को राहत देने के लिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध करायी जायेगी।
कृषि विपणन एवं सहकारिता :
हमारे प्रदेश के विशिष्ट कृषि उत्पाद अपने मूल स्थलों यथा-नागौरी अश्वगंधा, सोजती मेहंदी आदि के रूप में पहचाने जाते हैं। राज्य के और विशिष्ट Agro-Processed Products को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा इनसे जुड़े कृषकों को बेहतर मूल्य दिलवाने की दृष्टि से मिशन Raj GIFT (Geographical Indication For Transformation of Production and Livelihoods) प्रारम्भ किया जायेगा।
अलवर में Centre of Excellence for Onion and Vegetables, श्रीगंगानगर में Centre of Excellence for Kinnow तथा बांसवाड़ा में Centre of Excellence for Mango खोले जायेंगे।
पशुपालन एवं डेयरी :
प्रदेश में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Rajasthan Cooperative Dairy Infrastructure Development Fund की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा।
सरस ब्राण्ड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के लिए NCR, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के Outlets खोले जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जायेगा।
दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत वर्तमान में 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष इस योजना में 700 करोड़ (सात सौ करोड़) रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे।
विकसित राजस्थान @ 2047 (दो हजार सैंतालीस) के लिए प्रदेश में milk processing capacity 200 लाख (दो सौ लाख) लीटर प्रतिदिन तथा दूध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध व milk products उपलब्ध कराने, milk plants की स्थापना, upgradation एवं विस्तार करने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे।
उचित मूल्य पर मुर्गी दाना उपलब्ध करवाने के लिए तबीजी-अजमेर में Poultry Feed Unit स्थापित की जायेगी।
नवाँ स्तम्भ : हरित विकास एवं पर्यावरणीय सततता
हरित बजट (Green Budget):
जहाँ पिछले वर्ष राज्य के पहले हरित बजट (Green Budget) हेतु 27 हजार 850 करोड़ (सत्ताइस हजार आठ सौ पचास करोड़) रुपये से अधिक का प्रावधान किया था, वहीं आगामी वर्ष के लिए 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 33 हजार 476 करोड़ (तैंतीस हजार चार सौ छिहत्तर करोड़) रुपये का प्रावधान किया है, जो योजनाओं पर व्यय का 12.74 % (बारह दशमलव सात चार प्रतिशत) है तथा कुल बजट का 5.48 % (पाँच दशमलव चार आठ प्रतिशत) है, जो कि गतवर्ष से 20.18 % (बीस दशमलव एक आठ प्रतिशत) अधिक है।
हमारा वर्ष 2047 (दो हजार सैंतालीस) तक प्रदेश में Green Cover बढ़ाकर 20 (बीस) प्रतिशत किये जाने का लक्ष्य है। राजस्थान को हरित प्रदेश के रूप में विकसित करने की दृष्टि से प्रारम्भ किये गये Mission 'हरियाळो-राजस्थान' के अन्तर्गत जन सहभागिता से लगभग 19 करोड़ (उन्नीस करोड़) पौधे लगाये जा चुके हैं। इस मिशन की सफलता को देखते हुए आगामी वर्ष 10 करोड़ पौधारोपण किया जाना प्रस्तावित है।
पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास की दृष्टि से-
I. राज्य के समस्त जिला मुख्यालयों पर आगामी वर्ष उन्नत 'नमो नर्सरी' की स्थापना की जायेगी। प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर चरणबद्ध रूप से 'नमो वन' विकसित किये जायेंगे।
II. अजमेर, ब्यावर, हनुमानगढ़, बीकानेर, दौसा, जयपुर सहित 16 (सोलह) जिलों में मॉडल उद्यान 'Oxyzones' के रूप में विकसित किये जाने हेतु 32 करोड़ (बत्तीस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
III. विकास एवं पर्यावरण के बीच सन्तुलन बनाये रखने के लिए अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए आवंटित भूमि का 10 प्रतिशत भाग वृक्षारोपण हेतु आरक्षित रखा जायेगा।
IV. चित्तौड़गढ़ में कुम्भा बायोलॉजिकल पार्क विकसित किये जाने हेतु 31 करोड़ (इकतीस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ संरक्षित क्षेत्रों में Man-Animal Conflict पर विशेष ध्यान दिये जाने के उद्देश्य से आगामी वर्ष PRITHWI (Project for Resilient and Integrated Terrestial Habitats and Wildlife Valorization Initiative) परियोजना प्रारम्भ किये जाने की घोषणा । इस योजना के अन्तर्गत Prey-base Augmentation, Conflict Mitigation Infrastructure, बचाव एवं पुनर्वास सुविधायें, AI आधारित निगरानी, Eco-Tourism Circuit विकास आदि कार्यों हेतु एक हजार 500 करोड़ (एक हजार पांच सौ करोड़) रुपये की राशि व्यय की जायेगी।
प्रदेश में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि में वन भूमि का क्षेत्र आने पर Diversion हेतु वैकल्पिक भूमि उपलब्ध करवाने में सामान्य रूप से अधिक समय लगता है, जिससे परियोजनाओं की क्रियान्विति समय पर नहीं हो पाती। इसके समाधान के लिए वन भूमि की क्षतिपूर्ति के लिए गैर-वन भूमि से एक हजार हेक्टेयर का Land Bank बनाया जाना प्रस्तावित है।
प्रदेश में रणथम्भौर बाघ परियोजना द्वितीय-करौली, वन्यजीव अभयारण्य माउंट आबू-सिरोही एवं सुंधामाता संरक्षित क्षेत्र-जालोर में पाये जाने वाले Sloth Bear के संरक्षण हेतु 20 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।
पर्यटकों की सुविधा हेतु मुकुन्दरा हिल्स बाघ परियोजना के नौलाव (गागरोन) क्षेत्र-झालावाड़ में Safari Gate खोला जायेगा।
धौलपुर-करौली बाघ परियोजना में Habitat Improvement, Grass Land, मृदा संरक्षण, हानिकारक वनस्पति के उन्मूलन, प्राकृतिक जल स्रोतों के संधारण आदि कार्य किये जायेंगे।
वन्यजीवों के उपचार हेतु Wild Life Institute of India, देहरादून व Indian Veterinary Research Institute, बरेली जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों को knowledge partners बनाकर अलवर, उदयपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी तथा जयपुर में Specialised Centres for Treatment of Wild Animals खोले जायेंगे।
केवलादेव घना राष्ट्रीय पक्षी उद्यान एवं सांभर झील में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। इन पक्षियों की बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए भरतपुर, सांभर-जयपुर व मीठड़ी-कुचामन में Specialised Centres for Treatment of Avian Diseases स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं।
पर्यावरण सन्तुलन व Bio-diversity Conservation के उद्देश्य से आगामी वर्ष जयसमंद-सलूम्बर, केसरबाग-धौलपुर, तालछापर-चूरू व शेरगढ़-बारां वन्यजीव अभयारण्यों के Eco Sensitive Zones (ESZ) हेतु Zonal Master Plans तैयार किये जायेंगे।
Wetlands Conservation व Management के उद्देश्य से आगामी वर्ष प्रथम चरण में मेनार-उदयपुर, खींचन-फलौदी, पुष्कर तालाब-बारां, बडबेला तालाब-झालावाड़ सहित 25 wetlands के लिए Integrated Management Plans बनाये जायेंगे।
प्रतापगढ़ किला (थानागाजी)-अलवर, सीतामाता-प्रतापगढ़ व बरडोद महल (बहरोड़)-कोटपूतली बहरोड़ में Eco-Tourism स्थल विकसित किये जायेंगे। साथ ही, बावन मोड़ रेंज-अलवर में हनुमान वाटिका का निर्माण करवाया जायेगा।
बनेड़ा (शाहपुरा)-भीलवाड़ा में Eco-Park, टोडारायसिंह-टोंक में नेचर पार्क स्थापित किये जायेंगे। साथ ही, सांचौर-जालोर में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर तथा शाहबाद (किशनगंज)-बारां में उपरेटी कन्जर्वेशन रिजर्व में ग्रासलैण्ड विकास कार्य करवाये जायेंगे।
वन संरक्षण आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण, वन्य क्षेत्रों में Mobility बढ़ाने तथा वन्यजीव Rescue प्रणाली के संवर्द्धन के लिए Rapid Mobility Teams के गठन के साथ ही 291 (दो सौ इक्यानवे) Wildlife Ambulances उपलब्ध करवायी जायेंगी। इस हेतु 25 करोड़ (पच्चीस करोड़) रुपये का व्यय किया जायेगा।
फसलों को हानिकारक कीड़ों तथा बीमारियों से बचाने के लिए किसानों को जैविक तथा प्राकृतिक नियंत्रण की विधियों का प्रशिक्षण दिये जाने के लिए श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर-जयपुर में Centre of Excellence for Natural Farming की स्थापना की जायेगी।
Green Energy को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Bio Waste के पर्यावरण अनुकूल उपयोग के लिए नगर निगम जयपुर एवं जोधपुर में PPP Mode पर Compressed Bio Gas Plants की स्थापना की जायेगी।
विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूक करने के दृष्टिगत प्रदेश के प्रत्येक जिले के चयनित विद्यालय में Green School Programme संचालित किया जायेगा।
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से राज्य के समस्त जिलों में शवदाह के लिए Closed Combustion Cremation Furnace की स्थापना की जायेगी।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किया जाना आवश्यक है। इसके लिए किसानों को Change Agents के रूप में स्थापित करने के लिए Micro Irrigation, Agro-Forestry जैसी Good Agriculture Practices अपनाने के लिए प्रेरित किया जायेगा। इससे हुए सकारात्मक बदलाव के आधार पर किसानों को Carbon Credits दिलवाकर प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाने के लिए राज्य में पहली बार Carbon Credit Pilot Project चलाया जायेगा।
जल संरक्षण तथा Treated Waste Water के re-use की दृष्टि से 29 (उनतीस) अमृत शहरों के एक-एक उद्यान में Waste Water Treatment Plant एवं Drip Irrigation System की स्थापना 30 करोड़ (तीस करोड़) रुपये की लागत से की जायेगी।
दसवाँ स्तम्भ : 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर की मजबूत अर्थव्यवस्था
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2028-29 तक 350 बिलियन डॉलर (तीन सौ पचास बिलियन डॉलर) से बढ़ाकर वर्ष 2047 (दो हजार सैंतालीस) तक 4.3 (चार दशमलव तीन) ट्रिलियन डॉलर पहुँचाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में अवश्य ही सफल होंगे।
GST 2.0 के अन्तर्गत दरों में किए गए बदलाव के परिणाम स्वरूप आवश्यक उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं पर कर का बोझ कम होने और व्यापारियों की अनुपालन लागत घटने से कीमतों में कमी आई है और महंगाई पर नियंत्रण हुआ है।
GST Tax Payers की सुविधा के लिये अपीलीय प्राधिकारी के यहां ऑनलाइन सुनवाई का Module विकसित किया जायेगा; जिसमें प्रकरण की वर्तमान स्थिति, सुनवाई की आगामी तिथि आदि की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। साथ ही ये सूचनाएँ SMS के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकेंगी।
GST करदाताओं को न्यायिक प्रक्रिया में सुगमता प्रदान करने के उद्देश्य से Registration संबंधी अपीलों को प्राथमिकता के आधार पर 60 दिन में निस्तारित किया जायेगा।
खान एवं पेट्रोलियम विभाग :
राज्य में खनिज अन्वेषण को नई गति देने के लिये Base Metal, Limestone, Manganese & Iron जैसे खनिजों हेतु जियो फिजिकल सर्वे एवं ड्रिलिंग कार्य किया जायेगा तथा Geological Survey of India के सहयोग से "स्टेट ऑफ आर्ट-खनिज कोर लाइब्रेरी" की स्थापना की जायेगी।
वायु प्रदूषण को नियन्त्रित करने में EV तथा CNG वाहन प्रमुख विकल्प हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में 60 नये सीएनजी स्टेशन तथा 250 EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में, वन्य जीव अभयारण्यों एवं राष्ट्रीय उद्यानों के 10 किलोमीटर परिधि में, Eco Sensitive Zone Notification के अभाव में बन्द रहे खनन पट्टों एवं क्वारी लाइसेंसों की इस अवधि को Deemed Non-Working Period घोषित किया जाना प्रस्तावित है।
Home