⚡ RajRevision

RPSC & RSMSSB PYQ Practice

भारत का संवैधानिक इतिहास PYQ in Hindi - पेज 2

इस पेज पर Indian Polity के भारत का संवैधानिक इतिहास से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 100 प्रश्नों में से यह पेज 2 है।

11

भारत परिषद की स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई-

A1774 के एक्ट के तहत
B1858 के एक्ट के तहत
C1735 के एक्ट के द्वारा
D1919 के एक्ट के द्वारा

सही उत्तर: 1858 के एक्ट के तहत

व्याख्या (Explanation)

भारत परिषद (Council of India) की स्थापना भारत शासन अधिनियम, 1858 के तहत की गई थी। इस अधिनियम ने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर ब्रिटिश क्राउन को प्रत्यक्ष नियंत्रण सौंपा और भारत परिषद की स्थापना ब्रिटिश सरकार को सलाह देने के लिए की गई।

12

गवर्नर जनरल की सहायता के लिए किस अधिनियम के तहत कार्यकारिणी परिषद की स्थापना की गई-

A1773 के अधिनियम द्वारा
B1858 के अधिनियम द्वारा
C1892 के अधिनियम द्वारा
Dइनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: 1773 के अधिनियम द्वारा

व्याख्या (Explanation)

1773 का रेगुलेटिंग अधिनियम भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के मामलों को नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा उठाया गया पहला कदम था। इस अधिनियम ने बंगाल के गवर्नर-जनरल का पद स्थापित किया, जिसे एक कार्यकारी परिषद द्वारा सहायता प्रदान की जानी थी। कार्यकारी परिषद में गवर्नर-जनरल सहित चार सदस्य थे।

13

किस अधिनियम को भारत विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार करने का आधार माना जाता है।

A1947 का अधिनियम
B1892 का अधिनियम
C1909 का अधिनियम
D1935 का अधिनियम

सही उत्तर: 1909 का अधिनियम

व्याख्या (Explanation)

मार्ले-मिंटो सुधार (1909) ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली शुरू की, जिसने सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दिया और भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार की।

14

1919 के अधिनियम के तहत राज्य सभा में सदस्यों की संख्या कितनी निर्धारित की गई -

A60
B90
C120
D140

सही उत्तर: 60

व्याख्या (Explanation)

भारत शासन अधिनियम, 1919 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) ने केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था शुरू की, जिसमें उच्च सदन (Council of State) में 60 सदस्यों की संख्या निर्धारित की गई थी। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का था और इस सदन में केवल पुरुष सदस्य को ही शामिल किया गया था। निम्न सदन में 145 सदस्य थे, जो या तो मनोनीत थे या अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतों से चुने गए थे। इसका कार्यकाल 3 वर्ष था।

15

1935 के अधिनियम को दासता का चार्टर किसने कहा -

Aमहात्मा गांधी
Bसरदार पटेल
Cसरोजनी नायडू
Dजवाहर लाल नेहरू

सही उत्तर: जवाहर लाल नेहरू

व्याख्या (Explanation)

जवाहर लाल नेहरू ने भारत शासन अधिनियम, 1935 को “दासता का चार्टर” कहा, क्योंकि यह भारतीयों को पूर्ण स्वशासन प्रदान करने में असफल रहा और ब्रिटिश नियंत्रण को बनाए रखा।

16

1935 के अधिनियम के अन्तर्गत गवर्नर जनरल का कार्यकाल कितना निर्धारित किया गया -

A5 वर्ष
B6 वर्ष
C8 वर्ष
D10 वर्ष

सही उत्तर: 5 वर्ष

व्याख्या (Explanation)

भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत गवर्नर जनरल का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया था।

17

भारत शासन अधिनियम 1935 के सन्दर्भ में निम्न में से कौनसा तथ्य सही नहीं है।

Aइसमें 321 अनुच्छेद व 10 परिशिष्ट थे
Bयह प्रस्तावना रहित था
Cइसमें भारत परिषद की समाप्ति का प्रावधान था
Dराज्यों में द्वैद्व शासन का प्रारम्भ

सही उत्तर: राज्यों में द्वैद्व शासन का प्रारम्भ

व्याख्या (Explanation)

भारत शासन अधिनियम, 1935 में राज्यों में द्वैध शासन (Dyarchy) का प्रावधान नहीं था। यह प्रावधान 1919 के अधिनियम में था।

18

1919 के अधिनियम के अन्दर्भ में निम्न में से कौनसा तथ्य सही है-

Aइसमें द्वैध शासन का प्रावधान था
Bगवर्नर जनरल की कार्यकारिणी के सदस्यों की कोई निश्चित संख्या नहीं थी
Cकेन्द्र में द्विसदनीय व्यवस्थापिका का प्रावधान था
Dउपरोक्त सभी

सही उत्तर: उपरोक्त सभी

व्याख्या (Explanation)

भारत शासन अधिनियम, 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन, केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था, और गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी के लिए लचीली सदस्य संख्या की व्यवस्था की थी।

19

किस अधिनियम के अन्तर्गत केन्द्र में दोहरे शासन की स्थापना की गई -

A1892 के अधिनियम द्वारा
B1935 के अधिनियम् द्वारा
C1919 के अधिनियम् के तहत्
Dइनमें से कोई नही

सही उत्तर: इनमें से कोई नही

व्याख्या (Explanation)

केंद्र में दोहरा शासन (Dyarchy) किसी भी अधिनियम में लागू नहीं किया गया। यह प्रणाली 1919 के अधिनियम में प्रांतों में लागू थी। 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने प्रांतीय द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया और केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना का सुझाव दिया।

20

निम्न में से कौन प्रारूप समिति का सदस्य नहीं था-

Aएन. गोपाल स्वामी अयगर
Bसचिदानंद सिन्हा
Cअल्लादि कृष्ण स्वामी अययर
Dमोहम्मद सादुल्ला

सही उत्तर: सचिदानंद सिन्हा

व्याख्या (Explanation)

सचिदानंद सिन्हा संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष थे, लेकिन प्रारूप समिति के सदस्य नहीं थे। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रारूप समिति​ के अन्य सदस्य एन गोपालस्वामी, अल्लाडी कृष्णस्वामी, डॉ के एम मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्लाह, एन माधव राऊ, टी टी कृष्णमाचारी थे।

थ्योरी का रिवीजन करें? 📖

इस टॉपिक के विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए वापस जाएँ

नोट्स पढ़ें →
🏠HomeFast Notes🎯PYQ Trend📄Exams