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राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ PYQ in Hindi - पेज 24

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 367 प्रश्नों में से यह पेज 24 है।

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धूलकोटा कहां स्थित है -

Aकालीबंगा
Bबालाथल
Cबैराठ
Dआहड़

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है। दसवीं व ग्याहरवीं शताब्दी में इसे ‘आघाटपुर’ अथवा ‘आघट दुर्ग’ के नाम से जाना जाता था। इसे ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है।

232

किस पुराविद् को प्रथम बार ‘काली बंगा’ सम्भ्यता को प्रकाश में लाने का श्रेय दिया जाता है -

Aअमलानन्द घोष
Bबी. बी. लाल
Cबालकृष्ण थापड़
Dआर. सी. अग्रवाल

सही उत्तर: अमलानन्द घोष

व्याख्या (Explanation)

कालीबंगा का पता ‘पुरातत्व विभाग के निदेशक ए. एन. घोष’ ने सन् 1952 में लगाया था। सन् 1961-69 तक नौ सत्रों में बी. के. थापर, जे. वी. जोशी तथा बी. बी. लाल के निर्देशन में इस स्थल की खुदाई की गयी। कालीबंगा स्वतंत्र भारत का वह पहला पुरातात्विक स्थल है जिसका स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्खनन किया गया तत्पश्चात् रोपड़ का उत्खनन किया गया।

233

आहड़ सभ्यता किस अन्य नाम से भी जानी जाती है -

Aआहड़पुर
Bअगछपुर
Cआघाटपुर
Dआधमपुर

सही उत्तर: आघाटपुर

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है। दसवीं व ग्याहरवीं शताब्दी में इसे ‘आघाटपुर’ अथवा ‘आघट दुर्ग’ के नाम से जाना जाता था। इसे ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है।

234

राजस्थान का यह स्थान जो पहले विराटनगर से जाना जाता था जहाँ पर पांडवों ने अज्ञातवास का एक वर्ष बिताया था, आज किस नाम से जाना जाता है -

📋 पूछा गया: Stenographer Pre Exam (21 March 2021) (Paper I)
Aइनमें से कोई नहीं
Bकोलायत
Cबैराठ
Dनागदा

सही उत्तर: बैराठ

व्याख्या (Explanation)

प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ) में ‘बीजक की पहाड़ी’, ‘भीमजी की डूँगरी’ मोती डूंगरी तथा ‘महादेवजी की डूँगरी’ आदि स्थानों पर उत्खनन कार्य दयाराम साहनी द्वारा 1936-37 में तथा पुनः 1962-63 में पुरातत्वविद् नीलरत्न बनर्जी तथा कैलाशनाथ दीक्षित द्वारा किया गया।

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स्रोत: Stenographer Pre Exam (21 March 2021) (Paper I)

235

गणेश्वर सभ्यता थी -

📋 पूछा गया: Agriculture Research Officer - 2020
Aलौह युगीन
Bताम्र युगीन
Cकांस्य युगीन
Dपीतल युगीन

सही उत्तर: ताम्र युगीन

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर का टीला, नीम का थाना में कांतली नदी के उद्गम स्थल पर अवस्थित है। गणेश्वर में रत्नचंद्र अग्रवाल ने 1977 में खुदाई कर इस सभ्यता पर प्रकाश डाला। ताम्रयुगीन सांस्कृतिक केन्द्रों में से प्राप्त तिथियों में यह प्राचीनतम् है। इस प्रकार गणेश्वर संस्कृति को निर्विवाद रूप से ‘भारत में ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ माना जा सकता है।

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स्रोत: Agriculture Research Officer - 2020

236

निम्नलिखित में से किस स्थल से मौर्यकालीन वास्तुकारी के अवशेष प्राप्त हुए हैं -

📋 पूछा गया: Agriculture Research Officer - 2020
Aबैराठ
Bरंगमहल
Cआहर
Dबड़ोपाल

सही उत्तर: बैराठ

व्याख्या (Explanation)

इस स्थल की प्रांरंभिक और सर्वप्रथम खोज का कार्य 1837 ई. में कैप्टन बर्ट द्वारा किया गया। इन्होंने विराटनगर में मौर्य सम्राट अशोक का प्रथम भाब्रू शिलालेख खोज निकाला और यह 1840 ई. से एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल, कलकत्ता संग्रहालय में सुरक्षित है। इसे ‘भाब्रू शिलालेख’ और ‘बैराठ-कलकत्ता शिलालेख’ कहा जाता है।

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स्रोत: Agriculture Research Officer - 2020

237

निम्नांकित प्राचीन नगरों में से किस स्थान पर नहर के अवशेष प्राप्त हुए हैं -

📋 पूछा गया: Agriculture Officer 2020
Aकर्कोटनगर
Bरंगमहल
Cनगरी
Dनांदसा

सही उत्तर: नगरी

व्याख्या (Explanation)

चित्तौड़गढ़ के पास स्थित नगरी को पाणिनी की अष्टाध्यायी में उल्लिखित ‘माध्यमिका’ माना जाता है। जो बेड़च नदी के तट पर स्थित था। नगरी से नहर के अवशेष प्राप्त हुए हैं।

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स्रोत: Agriculture Officer 2020

238

राजस्थान में लौह धातु के प्राचीनतम साक्ष्य किस पात्र संस्कृति से प्राप्त हुए हैं -

📋 पूछा गया: Agriculture Officer 2020
Aगेरूएं रंग की मृद्भाण्ड संस्कृति (ओ सी पी)
Bकाले एवं लाल रंग की मृद्भाण्ड संस्कृति (बी एण्ड आर)
Cचित्रित सलेटी रंग की मृद्भाण्ड संस्कृति (पी जी डब्ल्यू)
Dउत्तरी काली चमकीली मृद्भाण्ड संस्कृति (एन बी पी)

सही उत्तर: काले एवं लाल रंग की मृद्भाण्ड संस्कृति (बी एण्ड आर)

व्याख्या (Explanation)

नोह के काले एवं लाल मृद्पात्रों के स्तर से लोहे की उपस्थिति के कुछ प्रमाण मिले हैं। यद्यपि यह साक्ष्य लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में हैं, तथापि यह भारत में लौह युग के प्रारम्भ की प्राचीनतम् सीमा रेखा निर्धारण का सूचक है। इस सभ्यता के पश्चात् एक नई सभ्यता का आविर्भाव हुआ जिसे सलेटी रंग की चित्रित मृद्भाण्ड संस्कृति का नाम दिया गया है।

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स्रोत: Agriculture Officer 2020

239

प्राचीन सभ्यता स्थल एवं उनके जिले को सुमेलित कीजिए एवं नीचे दिये गये सही कूट का चयन कीजिए - स्थल जिला अ. सिंघी तालाव 1. कोटपूतली बहरोड ब. तिलवाड़ा 2. चित्तौड़गढ़ स. बीजक की पहाड़ी 3. बालोतरा द. नगरी 4. नागौर कूट - अ, ब, स, द

A2, 1, 4, 3
B3, 4, 2, 1
C4, 3, 1, 2
D1, 2, 3, 4

सही उत्तर: 4, 3, 1, 2

व्याख्या (Explanation)

स्थल जिला सिंघी तालाव नागौर तिलवाड़ा बालोतरा बीजक की पहाड़ी कोटपूतली बहरोड नगरी चित्तौड़गढ़

240

राजस्थान के किस स्थल से पुरापाषाणयुगीन उपकरण उपलब्ध हुए हैं -

📋 पूछा गया: Agriculture Officer 2020
Aबागोर
Bअहाड़
Cभानगढ़
Dकालीबंगा

सही उत्तर: भानगढ़

व्याख्या (Explanation)

पुरापाषाणयुगीन उपकरण भानगढ़ से प्राप्‍त हुए हैं।

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स्रोत: Agriculture Officer 2020

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