मेवाड में अरावली क्षेत्र की भील जाति का लोकनाट्य कौनसा है -
सही उत्तर: गवरी
स्रोत: Raj Jail Warder (28-10-18) Shift 2
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान में नृत्य से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 373 प्रश्नों में से यह पेज 32 है।
मेवाड में अरावली क्षेत्र की भील जाति का लोकनाट्य कौनसा है -
सही उत्तर: गवरी
स्रोत: Raj Jail Warder (28-10-18) Shift 2
राजस्थान का शंकरिया नृत्य किससे संबंधित है -
सही उत्तर: कालबेलिया
व्याख्या (Explanation)
कालबेलिया का नृत्य पनिहारी नृत्य - पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाने वाला नृत्य इंडौली नृत्य - युगल में पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाने वाला नृत्य शंकरिया नृत्य - उनकी कालबेलिया संस्कृति का एक अभिन्न अंग है और पुरुषों और महिलाओं द्वारा किया जाता है। बगड़िया नृत्य - यह नृत्य महिलाओं द्वारा केवल भीख माँगने के दौरान किया जाता है।
स्रोत: Raj Jail Warder (28-10-18) Shift 2
जयपुर में रामप्रकाश थियेटर की स्थापना किस महाराजा के काल में हुई -
सही उत्तर: महाराजा रामसिंह-2
स्रोत: Raj Jail Warder (27-10-18) Shift 3
नृत्य जो केवल पुरूषों द्वारा किया जाता है -
सही उत्तर: कच्छी घोड़ी
व्याख्या (Explanation)
कच्छी घोड़ी नृत्य शेखावाटी, कुचामन, परबतसर, डीडवाना आदि क्षेत्रों में विवाह व व्यावसायिक मनोरंजन हेतु किया जाने वाला प्रसिद्ध लोगनृत्य है। इसमें नर्तक कागज की लुगदी अथवा बांस का नकली घोडा अपनी कमर पर बाँध कर दूल्हे का वेश बना हाथ में नकली तलवार लिए नकली लड़ाई का स्वांग करता है।
स्रोत: Raj Jail Warder (27-10-18) Shift 1
निम्नलिखित में से कौनसा नृत्य भीलों द्वारा होली पर किया जाता है -
सही उत्तर: गैर
स्रोत: Raj Jail Warder (21-10-18) Shift 3
भीलों का प्रसिद्ध लोक नाट्य कौनसा है -
सही उत्तर: गवरी
स्रोत: Raj Jail Warder (21-10-18) Shift 2
संत पीर शाहअली और तुकनगीर ने 400 साल पहले मेवाड़ में किस ख्याल की रचना की -
सही उत्तर: तुर्रा कलंगी ख्याल
व्याख्या (Explanation)
दो पीर संतों शाहअली और तुकनगीर ने "तुर्रा - कलंगी" ख्यालों का प्रवर्तन किया। ये वस्तुतः एक नहीं अपितु मेवाड़ की ख्याल परंपरा के दो भाग है। कहा जाता है कि एक बार मध्यप्रदेश के चंदेरी गाँव के ठाकुर ने दंगलबाज संत तुकनगीर और फकीर शाहअली को न्यौता देकर दंगल कराया तथा तुकनगीर को तुर्रा व शाह अली को कलंगी का सम्मान दिया। तब से दो अखाड़े बने जो तुर्रा और कलंगी के नाम से प्रसिद्ध हुए। तुर्रा व कलंगी पगड़ी पर सजाए या बाँधे जाने वाले दो आभूषण हैं। तुकनगीर 'तुर्रा' के पक्षकार थे तथा शाह अली 'कलंगी' के। तुर्रा को शिव और कलंगी को पार्वती का प्रतीक माना जाता है। इन दोनों खिलाड़ियों ने 'तुर्रा - कलंगी' के माध्यम से शिव तथा शक्ति के विचारों को लोक जीवन तक पहुँचाया।
स्रोत: Lab Assistant Exam 2018
शेखावटी के प्रसिद्ध नृत्य का नाम है -
सही उत्तर: गींदड
स्रोत: Raj Jail Warder (20-10-18) Shift 2
गरासिया जनजाति का प्रमुख नृत्य कौनसा है -
सही उत्तर: वालर नृत्य
व्याख्या (Explanation)
वालर नृत्य गणगौर के दिनों में महिला पुरुष द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इस नृत्य का प्रारम्भ पुरूष द्वारा हाथ में तलवार/छाता लेकर, वाद्ययंत्र के बिना, धीमी गति से किया जाता है।
स्रोत: Raj Jail Warder (20-10-18) Shift 2
निम्नलिखित में से राजस्थान के किस क्षेत्र से अलीबख्श ख्याल सम्बद्ध है -
सही उत्तर: अलवर
स्रोत: Raj Jail Warder (20-10-18) Shift 1