व्याख्या (Explanation)
जयपुर एवं जोधपुर में लाख एवं काँच से विविध कलात्मक सामान जैसे खिलौने, मूर्तियाँ, गुलदस्ते, हार, अंगूठियां, कर्णफूल, झुमके तथा चाबियों के गुच्छे आदि का निर्माण किया जाता है। जयपुर के महाराजा रामसिंह के समय लाख कला को भरपूर संरक्षण मिला। लाख की चूड़ियों का काम मुख्य रूप से जयपुर, करौली, हिंडोन में होता है । लाख की चूड़िया मोकड़ी कहलाती है। राजस्थान में लाख पर हस्तशिल्प का कार्य जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, अजमेर एवं भरतपुर में विशेष रूप से होता है। सवाई माधोपुर ,खेडला, लक्ष्मणगढ़ ,इंद्रगढ़ (कोटा) में लकड़ी के खिलौने व अन्य वस्तुओं पर खराद से लाख का पक्का काम किया जाता है। लाख से चूड़ियाँ, चूड़े, पशु-पक्षी, पेन्सिलें, पैन, काँच जड़ें लाख के खिलौने, बिछिया आदि तैयार किए जाते है।