‘शेखावाटी’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1803 ई. में किसने किया -
सही उत्तर: कर्नल गार्डन
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 276 प्रश्नों में से यह पेज 19 है।
‘शेखावाटी’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1803 ई. में किसने किया -
सही उत्तर: कर्नल गार्डन
श्यामलदास को ‘केसर-ए-हिन्द’ की उपाधि किसने प्रदान की थी -
सही उत्तर: कर्नल इम्पी
व्याख्या (Explanation)
वीर विनोद राजस्थान के इतिहास से सम्बंधित एक प्रसिद्ध काव्य ग्रंथ है। इस ऐतिहासिक ग्रंथ की रचना कविराज श्यामलदास द्वारा की गई थी। थी। कविराजा श्यामलदास का जन्म 1838 में मेवाड़ के छाली वाड़ा गांव में हुआ था। 'वीर विनोद' में राणा साँगा और मुग़ल बादशाह बाबर के मध्य हुए प्रसिद्ध 'खानवा युद्ध' का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। श्यामलदास मेवाड़ के महाराणा सज्जनसिंह (शंभूसिंह) का दरबारी कवि थे। कविराज श्यामलदास ने 'वीर विनोद' की रचना महाराणा सज्जनसिंह के आदेश से प्रारम्भ की थी। चार खंडों में रचित इस ग्रंथ पर कविराज श्यामलदास का ब्रिटिश सरकार(कर्नल इम्पी) द्वारा 'केसर-ए-हिंद' की उपाधि प्रदान की गई।
मुहणोत नैणसी को ‘राजस्थान का अबुल फजल’ किसने कहा -
सही उत्तर: मुंशी देवीप्रसाद
व्याख्या (Explanation)
मुंशी देवी प्रसाद ने नैणसी को राजपूताने का अबुल फजल कहा है। इन्होंने दो महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना कि थी। एक का नाम ‘‘मुंहणोत नैणसी री ख्यात’’ और दूसरे का नाम ‘‘मारवाड़ रा परगना री विगत’’ है। यह दोनों इतिहास के स्त्रोत में विशिष्ट महत्व रखते है। नैणसी का ‘‘मारवाड़ रा परगना री विगत’’ राजस्थान की ऐतिहासिक-सांख्यिकी अर्थात् गजेटीयर है। इसमें गावों और परगनों की उत्पति के साथ-साथ उनके ऐतिहासिक-भूगोल का हवाला प्रदान कर नैणसी ने ‘‘विगत का महत्वपूर्ण सूचना-स्त्रोत के रूप में प्रतिष्ठित किया है। इसीलिये इसे ‘‘गांवा री ख्यात’’ भी पुकारा जाता है।
किस शिलालेख में ‘विप्रः श्रीवस्तगोत्रेभूत्’ शब्द का उल्लेख हुआ है -
सही उत्तर: बिजौलिया शिलालेख
व्याख्या (Explanation)
बिजोलिया में उपलब्ध लेख संस्कृत भाषा में है। इसमें 13 पद्य हैं। इसमें मन्दिर निर्माण की जानकारी के साथ-साथ सांभर और अजमेर के चौहान वंश के शासकों की उपलब्धियों का भी प्राचीन उल्लेख किया गया है। इस लेख की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें चौहानों के लिए विप्रः श्रीवत्सगोत्रेभूत अंकन हुआ है, जिसके आधार पर डॉ. दशरथ शर्मा ने चौहानों को ब्राह्मण वंश की संतान सिद्ध किया है। कायम ख़ाँ रासो तथा चन्द्रावती के लेख भी चौहानों को ब्राह्मण वंशीय लिखते हैं।
वंश-भास्कर का लेखन कार्य निम्नलिखित में से कहां के शासकों के आदेश पर किया गया -
सही उत्तर: बूंदी
स्रोत: JSA Physics-2019(Rajasthan Gk)
निम्नलिखित में से कौनसा सोमेश्वर के इतिहास का स्त्रोत है -
सही उत्तर: पृथ्वी राज विजय
स्रोत: JSA Serology-2019(Rajasthan Gk)
मध्यकाल के दौरान किन बहियों में सरकारी भवनों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी होती थी -
सही उत्तर: कमठाना बही
व्याख्या (Explanation)
More Detail : राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत
निम्नलिखित में से किस राजपूत राजवंश पर बिजोलिया अभिलेख प्रकाश डालता है -
सही उत्तर: चौहान
व्याख्या (Explanation)
बिजोलिया शिलालेख चाहमान/चौहान वंश की वंशावली प्रदान करता है।
स्रोत: Junior Instructor(welder)
निम्नलिखित मेें से कौन-सा शिलालेख प्रतिहारों का इतिहास बताता है -
सही उत्तर: मंड़ोर शिलालेख
व्याख्या (Explanation)
यह अभिलेख गुर्जर नरेश बाउक की प्रशस्ति है। इसमें गुर्जर प्रतिहार की वंशावली, विष्णु और शिव पूजा का उल्लेख किया गया है।
स्रोत: Junior Instructor(fitter)
रणछोड़ भट्ट ने संस्कृत में किस महाकाव्य की रचना की -
सही उत्तर: राज प्रशस्ति
स्रोत: Junior Instructor(copa)