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राजपूत युग PYQ in Hindi - पेज 3

इस पेज पर Rajasthan GK के राजपूत युग से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 33 प्रश्नों में से यह पेज 3 है।

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गुर्जर-प्रतिहार शासक इस नाम से भी जाने जाते हैं -

Aआर्य
Bब्राह्मण्
Cवैश्य
Dअग्निकुण्ड राजपूत

सही उत्तर: अग्निकुण्ड राजपूत

व्याख्या (Explanation)

राजपूतों का विशुद्ध जाति से उत्पन्न होने के मत को बल देने के लिए उनको अग्निवंशीय बताया गया है। इस मत का प्रथम सूत्रपात चन्दबरदाई के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘पृथ्वीराजरासो’ से होता है। उसके अनुसार राजपूतों के चार वंश प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ कुण्ड से राक्षसों के संहार के लिए उत्पन्न किये गये।

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चीनी यात्री ह्वेनसांग ने गुर्जरों की राजधानी का नाम बताया था -

Aकू-चे-चो
Bपीलोमोलो
Cसी-सो-यू
Dगीपोमोनो

सही उत्तर: पीलोमोलो

व्याख्या (Explanation)

चीनी यात्री ह्वेनसांग जब भीनमाल आया तो उसने अपने 72 देशों के वर्णन में इसे कू-चे-लो(गुर्जर) बताया तथा उसकी राजधानी का नाम ‘पीलोमोलो/भीलामाल’ यानि भीनमाल बताया।

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निम्नलिखित में किसने राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी जातियों से बताई -

Aक्रुक महोदय
Bकर्नल टाॅड
Cडा. भण्डारकर
Dउपर्युक्त सभी

सही उत्तर: उपर्युक्त सभी

व्याख्या (Explanation)

राजपूताना के प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल जेम्स टाॅड ने राजपूतों को शक और सीथियन बताया है। टाॅड की पुस्तक के सम्पादक विलियम क्रुक ने भी इसी मत का समर्थन किया है परन्तु इस विदेशी वंशीय मत का गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ने खण्डन किया है। डाॅ. डी. आर. भण्डारकर राजपूतों को गुर्जर मानकर उनका संबंध श्वेत-हूणों के स्थापित करके विदेशी वंशीय उत्पत्ति को और बल देते हैं।

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निम्न में से किस इतिहासकार ने राजपूतों को शक अथवा सिथियन जाति के वंशज माना है -

Aचन्दबरदाई
Bसी. एम. वैद्य
Cजैम्स टाॅड
Dगोपीनाथ शर्मा

सही उत्तर: जैम्स टाॅड

व्याख्या (Explanation)

राजपूताना के प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल जेम्स टाॅड ने राजपूतों को शक और सीथियन बताया है।

25

इतिहासकार आर. सी मजूमदार के अनुसार गुर्जर प्रतिहारों ने कितनी शताब्दी तक अरब आक्रमणकारियों के लिए बाधक का काम किया-

Aदूसरी शताब्दी से चौथी शताब्दी तक
Bतीसरी शताब्दी से पांचवी शताब्दी तक
Cछठी शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक
Dबारहवीं शताब्दी से पन्द्रहवीं शताब्दी तक

सही उत्तर: छठी शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक

व्याख्या (Explanation)

प्रसिद्ध इतिहासकार रमेश चन्द्र मजूमदार के अनुसार गुर्जर प्रतिहारों ने छठी सदी से बारहवीं सदी तक अरब आक्रमणकारियों के लिए बाधक का काम किया और भारत के द्वारपाल(प्रतिहार) की भूमिका निभाई।

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निम्न में से कौन से वंश की उत्पत्ति अग्निकुंड से नहीं हुई -

Aपरमार
Bसिसोदिया
Cचौहान
Dचालुक्य

सही उत्तर: सिसोदिया

व्याख्या (Explanation)

राजपूतों का विशुद्ध जाति से उत्पन्न होने के मत को बल देने के लिए उनको अग्निवंशीय बताया गया है। इस मत का प्रथम सूत्रपात चन्दबरदाई के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘पृथ्वीराजरासो’ से होता है। उसके अनुसार राजपूतों के चार वंश प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ कुण्ड से राक्षसों के संहार के लिए उत्पन्न किये गये।

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निम्नलिखित में से किस विद्वान के अनुसार राजपूतों की उत्पत्ति अग्निकुण्ड से हुई थी -

📋 पूछा गया: Livestock Assistant Exam 2018
Aश्री गौरीशंकर ओझा
Bडा. गोपीनाथ शर्मा
Cकवि चन्दरबरदाई
Dडा. दशरथ शर्मा

सही उत्तर: कवि चन्दरबरदाई

व्याख्या (Explanation)

राजपूतों का विशुद्ध जाति से उत्पन्न होने के मत को बल देने के लिए उनको अग्निवंशीय बताया गया है। इस मत का प्रथम सूत्रपात चन्दबरदाई के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘पृथ्वीराजरासो’ से होता है। उसके अनुसार राजपूतों के चार वंश प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ कुण्ड से राक्षसों के संहार के लिए उत्पन्न किये गये।

📋

स्रोत: Livestock Assistant Exam 2018

28

मेवाड़ के सिसोदियाओं को निम्न माना जाता है -

Aसूर्यवंशी
Bचद्रवंशी
Cअग्निवंशी
Dनागवंशी

सही उत्तर: सूर्यवंशी

व्याख्या (Explanation)

मेवाड़ के गुहिल - इस वंश का आदिपुरुष गुहिल था। इस कारण इस वंश के राजपूत जहाँ-जहाँ जाकर बसे उन्होंने स्वयं को गुहिलवंशीय कहा। गौरीशंकर हीराचन्द ओझा गुहिलों को विशुद्ध सूर्यवंशीय मानते हैं, जबकि डी. आर. भण्डारकर के अनुसार मेवाड़ के राजा ब्राह्मण थे।

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‘पृथ्वीराज रासो’ ग्रंथ में राजपूतों की उत्पत्ति बताई गई है -

Aब्राह्मणों से
Bवैदिक आर्यों से
Cअग्निकुण्ड से
Dशक व सीथियन से

सही उत्तर: अग्निकुण्ड से

व्याख्या (Explanation)

चन्दबरदाई कृत ‘पृथ्वीराज रासो’ के अनुसार वशिष्ठ मुनि ने आबू के यज्ञकुण्ड से परमार, चालुक्य(सोलंकी), प्रतिहार तथा चौहान वंश को उत्पन्न किया। मुंहणोत नैणसी और सूर्यमल्ल मीसण ने भी इस मत का समर्थन किया।

30

युआन च्वांग द्वारा उल्लेखित ‘पो-लि-ये-ता-लो’ के रूप में किस स्थान की पहचान की गई है -

Aबैराठ
Bभीनमाल
Cजालौर
Dपाली

सही उत्तर: बैराठ

व्याख्या (Explanation)

चीनी यात्री युआन च्वांग (ह्वेन त्सांग) ने सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत का दौरा किया और 630-645 ई. तक लगभग 15 वर्षों तक रहा।

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