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मेवाड़ का गुहिल वंश PYQ in Hindi - पेज 39

इस पेज पर Rajasthan GK के मेवाड़ का गुहिल वंश से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 443 प्रश्नों में से यह पेज 39 है।

381

निम्न युद्धों को कालक्रमानुसार नीचे दिए कूट का प्रयोग करते हुए सुमेलित कीजिए – सूची – I (युद्ध) (1) तराइन का प्रथम युद्ध (2) सारंगपुर का युद्ध (3) खातोली का युद्ध (4) सुमेल का युद्ध सूची – II (वर्ष) (a) 1544 (b) 1517 (c) 1437 (d) 1191 कूट –

📋 पूछा गया: Librarian Grade III 2022 (Paper 1)
A1-(b), 2-(c), 3-(d), 4-(a)
B1-(d), 2-(c), 3-(b), 4-(a)
C1-(a), 2-(d), 3-(b), 4-(c)
D1-(a), 2-(b), 3-(c), 4-(d)

सही उत्तर: 1-(d), 2-(c), 3-(b), 4-(a)

व्याख्या (Explanation)

तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.) : पृथ्वीराज एवं मुहम्मद गौरी सारंगपुर युद्ध / मालवा युद्ध (1437 ई.) : महमूद खिलजी प्रथम एवं राणा कुंभा खातोली का युद्ध (1517 ई.) : महाराणा सांगा एवं दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी गिरी सुमेल के युद्ध (1544 ई.) : शेरशाह सूरी एवं मालदेव

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स्रोत: Librarian Grade III 2022 (Paper 1)

382

1657 ई. के मुगल उत्त्राधिकारी संघर्ष में मेवाड़ के किस महाराणा से औरंगजेब ने सहायता प्राप्त करने का प्रयास किया -

Aकरणसिंह
Bजयसिंह
Cराजसिंह
Dजगतसिंह

सही उत्तर: राजसिंह

व्याख्या (Explanation)

सितम्बर, 1657 ई. में जब शाहजहाँ के बीमार होने पर सम्राट के पुत्रों में राजसिंहासन प्राप्त करने के प्रयत्नों में तेजी आ गयी तो औरंगजेब ने महाराजा राजसिंह को पत्र लिखने आरम्भ किये जिनके द्वारा उसने उसको दक्षिण में अपनी सैनिक सहायता भेजने की अभ्यर्थना की।

383

सन् 1437 में मेवाड़-मालवा युद्ध का तात्कालीन कारण क्या था -

📋 पूछा गया: ASSI. TESTING OFFICER 2021
Aनागौर पर राजनीतिक नियंत्रण का मुद्दा
Bमालवा का महपा पँवार को मेवाड को सौंपने से इंकार
Cमालवा का सिरोही के देवा राजपूतों को मेवाड़ के विरुद्ध समर्थन
Dमेवाड़ का मांडू दरबार के एक विद्रोही सामंत को आश्रय देने का प्रयास

सही उत्तर: मालवा का महपा पँवार को मेवाड को सौंपने से इंकार

व्याख्या (Explanation)

सारंगपुर युद्ध / मालवा युद्ध 1437 ई. : महपा पँवार मेवाड़ से भागकर मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम की शरण में पहुँच गया। राणा कुंभा द्वारा महपा पँवार की मांग की गई थी, लेकिन महमूद खिलजी ने शरणार्थी को आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया। कुम्भा ने रणमल राठौड़ की सैनिक सहायता से 1437 ई० में ‘सारंगपुर के युद्ध’ (मध्य प्रदेश) में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम को पराजित कर बंदी बना लिया। राणा कुम्भा ने सारंगपुर विजय के उपलक्ष में विजय स्तंभ बनवाया था।

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स्रोत: ASSI. TESTING OFFICER 2021

384

हल्दीघाटी के युद्ध को किसने खमनौर का युद्ध कहा है -

📋 पूछा गया: JEN Agriculture 2022
Aकर्नल टॉड
Bबदायूँनी
Cअबुल फजल
Dगोपीनाथ शर्मा

सही उत्तर: अबुल फजल

व्याख्या (Explanation)

हल्दीघाटी (राजसमंद) का युद्ध (18 जून, 1576) : हल्दीघाटी के युद्ध को कर्नल टाॅड ने मेवाड़ की थर्मोपल्ली, अबुल फजल ने खमनौर का युद्ध और बदायूंनी ने मुंतखाब-उल-तवारीख में गोगुंदा का युद्ध कहा है।

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स्रोत: JEN Agriculture 2022

385

‘हाल गुरु’ मेवाड़ के किस शासक को कहा गया है -

📋 पूछा गया: JEN Agriculture 2022
Aमहाराणा प्रताप
Bमहाराणा सांगा
Cमहाराणा राजसिंह
Dमहाराणा कुंभा

सही उत्तर: महाराणा कुंभा

व्याख्या (Explanation)

महाराणा कुंभा को पर्वतीय दुर्गों का स्वामी होने के कारण हालगुरू कहा गया है।

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स्रोत: JEN Agriculture 2022

386

वाद्य यंत्र ‘अरबी ताशा’ मेवाड़ के सैनिक यंत्रो में कब शामिल किया गया -

📋 पूछा गया: A.R.O. (GK and Horticulture) 2022
Aसांगा द्वारा बयाना के युद्ध में बाबर को पराजित करने के बाद
Bकुम्भा द्वारा सारंगपुर के युद्ध में महमूद को पराजित करने के बाद
Cचुण्डा द्वारा मंडोर के युद्ध में जोधा को पराजित करने के बाद
Dसांगा द्वारा खातौली के युद्ध में इब्राहिम लोदी को पराजित करने के बाद

सही उत्तर: सांगा द्वारा बयाना के युद्ध में बाबर को पराजित करने के बाद

व्याख्या (Explanation)

बयाना का युद्ध 1527 में राणा सांगा और बाबर के बीच लड़ा गया था।राणा सांगा ने बाबर को पराजित कर बयाना के दुर्ग पर अधिकार कर लिया।दिल्ली की ओर बाबर की उन्नति और आगरा की ओर सांगा के विस्तार ने दोनों राजाओं के बीच लड़ाई को अपरिहार्य बना दिया था।

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स्रोत: A.R.O. (GK and Horticulture) 2022

387

गोरा-बादल का सम्बन्ध किससे था -

📋 पूछा गया: High Court LDC 2022 (12 March 2023)
Aरानी पद्मिनी - रतन सिंह
Bमहाराणा प्रताप
Cमहाराजा जसवंत सिंह द्वितीय
Dमहाराणा कुम्भा

सही उत्तर: रानी पद्मिनी - रतन सिंह

व्याख्या (Explanation)

रतन सिंह के सेनापति गोरा और बादल के नेतृत्व में राजपूत सैनिकों ने केसरिया वस्त्र धारण कर चित्तौड़ दुर्ग के द्वार खोलकर शत्रु पर टूट पड़े और वीरगति को प्राप्त हुए, गोरा रानी पद्मिनी का चाचा तो बादल रानी पद्मिनी का भाई था। 26 अगस्त, 1303 ई. को सोमवार के दिन 6 महीने व 7 दिन की लड़ाई के बाद रावल रतनसिंह वीरगति को प्राप्त हुए और अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ दुर्ग फतह कर कत्लेआम का हुक्म दिया।

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स्रोत: High Court LDC 2022 (12 March 2023)

388

मेवाड़ के निम्नलिखित शासकों में से किसने इब्राहिम लोदी को खातौली के युद्ध में पराजित किया -

Aमहाराणा कुम्भा
Bराणा हम्मीर
Cराणा सांगा
Dराणा रतनसिंह

सही उत्तर: राणा सांगा

व्याख्या (Explanation)

खातोली का युद्ध (1517 ई.) : मेवाड़ के महाराणा सांगा एवं दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी की महत्त्वाकांक्षाओं के फलस्वरूप दोनों के मध्य 1517 ई. में ‘खातोली’ (पीपल्दा तहसील, कोटा) में युद्ध हुआ। महाराणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को पराजित किया।

389

राणा कुम्भा की हत्या हुई -

📋 पूछा गया: Head Master (Sanskrit Edu.) - 20211 (PAPER-I)
Aकुम्भलगढ़ में
Bनागदा में
Cचित्तौड़गढ़ में
Dअचलगढ़ में

सही उत्तर: कुम्भलगढ़ में

व्याख्या (Explanation)

राणा कुम्भा के जीवन के अंतिम काल में उन्माद नामक रोग हो गया था। कुम्भा की 1468 ई. में कुम्भलगढ़ के अंदर मामादेव कुंड पर उनके पुत्र ऊदा ने हत्या कर दी। ऊदा ‘मेवाड़ का पितृहन्ता’ कहलाता है।

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स्रोत: Head Master (Sanskrit Edu.) - 20211 (PAPER-I)

390

महाराणा प्रताप के पास अकबर द्वारा विभिन्न मुगल अधिकारियों के नेतृत्व में भेजे गए शिष्टमण्डलों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करिए तथा नीचे दिये गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए- A. भगवानदास B. मानसिंह C. टोडरमल D. जलाल खाँ कूट:

ABADC
BCADB.
CDBAC
DABDC

सही उत्तर: DBAC

व्याख्या (Explanation)

अकबर ने अपनी गुजरात विजय के बाद अपने मनसबदार जलाल खाँ कोरची को राणा प्रताप के पास इस आशय से भेजा कि वह (राणा) अकबर की अधीनता स्वीकार कर ले। राणा प्रताप ने शिष्टता के साथ इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अकबरनामा और इकबालनामा के अनुसार जब मानसिंह गुजरात से लौट रहा था तो उसे आदेश दिया गया कि वह उदयपुर जाकर राणा प्रताप को समझाये कि वह अकबर की सर्वोपरि शक्ति को मान्यता दे और शाही दरबार में उपस्थित हो। इसके बाद इसी आशय से दो और पैगाम महाराणा के पास भगवन्तदास तथा टोडरमल के नेतृत्व में भेजे गये, परन्तु पहले की भाँति वे भी विफल रहे।

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