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आमेर का कछवाहा वंश PYQ in Hindi - पेज 3

इस पेज पर Rajasthan GK के आमेर का कछवाहा वंश से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 171 प्रश्नों में से यह पेज 3 है।

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पृथ्वीराज कछवाहा के शासनकाल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सी बात सही नहीं है -

Aपृथ्वीराज ने 1527 ई. में खानवा के युद्ध में राणा सांगा के साथ भाग लिया।
Bपृथ्वीराज ने अपने राज्य को 12 भागों में विभाजित कर अपने पुत्रों को सौंपा, जिन्हें बारह कोटड़ी कहा गया।
Cपृथ्वीराज की पत्नी बालाबाई को आमेर की मीरां कहा जाता है और वह धार्मिक प्रवृत्ति की थी।
Dपृथ्वीराज ने अपने ज्येष्ठ पुत्र भीमदेव को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिसके कारण पूर्णमल ने विद्रोह किया।

सही उत्तर: पृथ्वीराज ने अपने ज्येष्ठ पुत्र भीमदेव को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिसके कारण पूर्णमल ने विद्रोह किया।

व्याख्या (Explanation)

पृथ्वीराज ने अपनी पत्नी बालाबाई के प्रभाव में छोटे पुत्र पूर्णमल को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिससे क्रुद्ध होकर ज्येष्ठ पुत्र भीमदेव ने पूर्णमल को हराकर शासन हथिया लिया।

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दुल्हराय (तेजकरण) के शासनकाल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है -

Aदुल्हराय ने बड़गुर्जरों को पराजित कर दौसा पर अधिकार किया और अपने पिता सोढ़ा देव को शासक बनाया।
Bदुल्हराय ने मीणाओं को हराकर मांची/मांझी को अपनी दूसरी राजधानी बनाया और इसका नाम रामगढ़ रखा।
Cदुल्हराय ने अपनी कुलदेवी जमवाय माता के मंदिर का निर्माण रामगढ़ में करवाया।
Dदुल्हराय ने आमेर को अपनी राजधानी बनाया, जिसके कारण कछवाहा वंश आमेर के कछवाह वंश नाम से प्रसिद्ध हुआ।

सही उत्तर: दुल्हराय ने आमेर को अपनी राजधानी बनाया, जिसके कारण कछवाहा वंश आमेर के कछवाह वंश नाम से प्रसिद्ध हुआ।

व्याख्या (Explanation)

आमेर को दुल्हराय के पुत्र कोकिल देव ने 1207 ई. में विजित कर राजधानी बनाया, न कि दुल्हराय ने। अन्य सभी कथन दुल्हराय के कार्यों से संबंधित सही हैं।

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कछवाहा वंश की उत्पत्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है -

Aकछवाहा वंश को भगवान राम के पुत्र लव का वंशज माना जाता है।
Bराजा नल ने 826 ई. के लगभग नश्वर/नरवर की नींव डाली, जो कछवाहा वंश के संस्थापक थे।
Cकछवाहा वंश के वंशजों ने पहले अयोध्या, फिर मुकुटपुर और बाद में साकेत व रोहिताश पर शासन किया।
Dढोला-मारू की कथा राजा नल और उनकी पत्नी मरवण से संबंधित है।

सही उत्तर: कछवाहा वंश के वंशजों ने पहले अयोध्या, फिर मुकुटपुर और बाद में साकेत व रोहिताश पर शासन किया।

व्याख्या (Explanation)

कछवाहा वंश को भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज माना जाता है (न कि लव का), और उनके वंशजों ने अयोध्या से शुरू होकर मुकुटपुर, साकेत और रोहिताश पर शासन किया। ढोला-मारू की कथा साल्हकुमार (नल के पुत्र) और मरवण से संबंधित है, न कि स्वयं नल से।

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फर्रुखसियर ने 1713 ई. में सवाई जयसिंह को कहाँ का सूबेदार नियुक्त किया था -

📋 पूछा गया: Junior Instructor (WCS) Exam 2024
Aउड़ीसा
Bमालवा
Cदक्कन
Dकामरूप

सही उत्तर: मालवा

व्याख्या (Explanation)

फर्रूखसियर ने बादशाह बनते ही सवाई जयसिंह को सात हजार का मनसब प्रदान कर मालवा का सूबेदार नियुक्त किया। फर्रुखसियर ने 1716 ई. में सवाई जयसिंह को भरतपुर के जाट राजा चूड़ामन के विरूद्ध सैन्य अभियान पर भेजा। जिसमें सवाई जयसिंह को सफलता नहीं मिली और सैयद मुजफ्फर खां ने चूड़ामन को मुगल अधिनता स्वीकार करने के लिए मना लिया।

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स्रोत: Junior Instructor (WCS) Exam 2024

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प्राचीन वैदिक यज्ञ, अश्वमेध यज्ञ करने वाला अंतिम हिन्दू शासक कौन था - (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)

📋 पूछा गया: Junior Instructor ((ESR) Exam 2024
Aसवाई जयसिंह
Bमिर्ज़ा राजा जयसिंह
Cमानसिंह
Dमहाराणा प्रताप

सही उत्तर: सवाई जयसिंह

व्याख्या (Explanation)

बिशन सिंह के उपरान्त मात्र 12 वर्ष की अवस्था में जयसिंह द्वितीय शासक बना। इसका मूल नाम विजयसिंह था और उसके छोटे भाई का नाम जयसिंह था। औरंगजेब ने दोनों भाईयों के नाम परस्पर परिवर्तित करके उसे सवाई की उपाधि से विभूषित किया और वह सवाई जयसिंह के नाम से विख्यात हो गया। सवाई जयसिंह अंतिम हिन्दू शासक थे जिन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया था। सवाई जयसिंह ने हुरड़ा सम्मेलन (1734 ई.) के एक माह बाद ही प्रथम अश्वमेध यज्ञ किया था। यज्ञ अगस्त, 1734 ई. को संपूर्ण हो गया। 1742 ई. में दूसरा अश्वमेध अधिक बड़े पैमाने पर किया गया।

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स्रोत: Junior Instructor ((ESR) Exam 2024

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अकबर ने किस जयपुर नरेश को ‘फर्जद’ की उपाधि प्रदान की - (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)

📋 पूछा गया: Junior Instructor(CLIT) Exam 2024
Aराजा प्रतापसिंह
Bराजा भगवन्तसिंह
Cराजा मानसिंह
Dराजा जयसिंह

सही उत्तर: राजा मानसिंह

व्याख्या (Explanation)

भगवान दास की मृत्यु के बाद अकबर ने इसके पुत्र मानसिंह को मिर्जाराजा और फर्जन्द (पुत्र) की उपाधियों से विभूषित कर आमेर का शासक घोषित कर दिया। मान सिंह अकबर के नौ रत्नों में से एक थे।

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स्रोत: Junior Instructor(CLIT) Exam 2024

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सवाई जयसिंह ने वस्त्र उद्योग से संबंधित निम्न में से कितने कारखाने स्थापित किए -

📋 पूछा गया: Stenographer Exam 2024 (Paper - I)
A36
B30
C32
D34

सही उत्तर: 36

व्याख्या (Explanation)

सवाई जयसिंह ने वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 36 कारखाने स्थापित किए थे। जयसिंह द्वारा स्थापित 36 कारखानों में कपड़द्वारा भी है। कपड़द्वारा में जयगरखाना, किरकिराखाना, तोशाखाना और खजाना बेहला आते थे। कीमती चीजें जैसे, सोना, चांदी, कसीदाकारी, तारकशी, सलमा-सितारा, गोटा, जरगर खाने का हिस्सा होते थे। किरकिराखाना में जवाहरात, रेशमी और सोने चांदी के काम के कपड़े थे। पोशाक जहां होते थे वह तोपाखाना कहलाता था। खजाना बेहला में वह कोष होता था जिसका राजा जरूरत पड़ने पर अपनी मर्जी से खर्च कर सकता था।

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स्रोत: Stenographer Exam 2024 (Paper - I)

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1665 की पुरंदर की संधि किनके बीच हुई थी?

📋 पूछा गया: Hostel Superintendent Grade-II(SJED)-2024
Aऔरंगजेब और शिवाजी
Bशिवाजी और जयसिंह I
Cऔरंगजेब और जयसिंह I
Dराव शेखा और शिवाजी

सही उत्तर: शिवाजी और जयसिंह I

व्याख्या (Explanation)

1665 में पुरंदर की संधि जय सिंह प्रथम और छत्रपति शिवाजी महाराज के बीच हुई थी। इस संधि पर 11 जून 1665 को हस्ताक्षर किए गए थे। राजा जय सिंह ने मुगल सम्राट औरंगजेब की तरफ से इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।

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स्रोत: Hostel Superintendent Grade-II(SJED)-2024

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सवाई जयसिंह ने जयपुर की स्थापना की थी -

A1737 में
B1729 में
C1727 में
D1735 में

सही उत्तर: 1727 में

व्याख्या (Explanation)

सवाई जयसिंह ने 18 नवम्बर, 1727 ई. जयपुर नगर की नींव रखी और उसे अपनी नवीन राजधानी (पहली दौसा, दूसरी जमवारामगढ़, तीसरी आमेर) बनाया। इसका वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य था। नींव पंडित जगन्नाथ सम्राट द्वारा रखी गयी और इसकी जानकारी बख्तराम द्वारा रचित ग्रंथ बुद्धि विलास में मिलती है।

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राजस्थान में कछवाहा वंश का शासन कहां था -

Aजयपुर के समीपवर्ती क्षेत्र
Bभरतपुर के समीपवर्ती क्षेत्र
Cउदयपुर के समीपवर्ती क्षेत्र
Dचुरू के समीपवर्ती क्षेत्र

सही उत्तर: जयपुर के समीपवर्ती क्षेत्र

व्याख्या (Explanation)

जयपुर के समीपवर्ती क्षेत्र में कछवाहा वंश का शासन था।

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