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RPSC & RSMSSB PYQ Practice

पर्यावरण रसायन PYQ in Hindi - पेज 4

इस पेज पर General Science के पर्यावरण रसायन से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 57 प्रश्नों में से यह पेज 4 है।

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पुनर्चक्रण किया जा सकता है: a. धातु के डिब्बों का b. चिकित्सा अपशिष्ट का c. रेडियोसक्रिय अपशिष्ट का d. प्लास्टिक की बोतलों का नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें।

📋 पूछा गया: Animal Attendant 2023 Exam (December 1 Shift I)
Aकेवल (b) और (c)
Bकेवल (a) और (d)
Cकेवल (c) और (d)
Dकेवल (a) और (b)

सही उत्तर: केवल (a) और (d)

व्याख्या (Explanation)

चिकित्सा अपशिष्ट और रेडियोसक्रिय अपशिष्ट: खतरनाक होने के कारण पुनर्चक्रण नहीं होते।

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स्रोत: Animal Attendant 2023 Exam (December 1 Shift I)

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सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए। सूची-I सूची-II a. गोबरगैस संयंत्र I. लोहे की छीलन और टूटे हुए प्लास्टिक का सामान b. वर्मीकंपोस्टिंग II. ठोस अपशिष्ट c. भूमि भरण (लैंडफिल) III. गाय और भैंस का गोबर d. पुनर्चक्रण IV. केंचुआ नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:

📋 पूछा गया: Animal Attendant 2023 Exam (December 1 Shift I)
Aa - III, b - IV, c - II, d - I
Ba - III, b - II, c - I, d - IV
Ca - I, b - III, c - II, d - IV
Da - II, b - IV, c - III, d - I

सही उत्तर: a - III, b - IV, c - II, d - I

व्याख्या (Explanation)

गोबरगैस संयंत्र → गाय और भैंस का गोबर: गोबर से बायोगैस बनती है। वर्मीकंपोस्टिंग → केंचुआ: केंचुए जैविक अपशिष्ट को खाद में बदलते हैं। भूमि भरण → ठोस अपशिष्ट: लैंडफिल में ठोस कचरा दफनाया जाता है। पुनर्चक्रण → लोहे की छीलन और प्लास्टिक: इन्हें पुनर्चक्रित किया जाता है।

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स्रोत: Animal Attendant 2023 Exam (December 1 Shift I)

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केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के अनुसार IND-AQI 101-200 सीमा वाली वायु गुणवत्ता श्रेणी है -

📋 पूछा गया: Raj. State and Sub. Services Comb. Comp. (Pre) Exam - 2024
Aअच्छी
Bसंतोषजनक
Cमध्यम
Dघटिया

सही उत्तर: मध्यम

व्याख्या (Explanation)

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार भारतीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (IND-AQI) की श्रेणियाँ निम्नलिखित हैं: 0-50: अच्छी (Good) 51-100: संतोषजनक (Satisfactory) 101-200: मध्यम (Moderate) 201-300: खराब (Poor) 301-400: बहुत खराब (Very Poor) 401-500: गंभीर (Severe)

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स्रोत: Raj. State and Sub. Services Comb. Comp. (Pre) Exam - 2024

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जैव-चिकित्सा अपशिष्ट निपटान की उपयुक्त तकनीक है :-

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-II
Aलैंडफिल
Bपुनर्चक्रण
Cपानी में निपटान
Dजलाए जाना

सही उत्तर: जलाए जाना

व्याख्या (Explanation)

जैव-चिकित्सा अपशिष्ट को जलाने (इंसीनरेशन) से रोगाणुओं को नष्ट किया जाता है और सुरक्षित निपटान सुनिश्चित होता है।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-II

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निम्नलिखित में से भारत में सर्वप्रथम किस राज्य में, सभी घरों में वर्षा जल संरक्षण संरचना को आवश्यक बना दिया गया है -

📋 पूछा गया: CET 2024 (Graduate) 28 September 2024 Shift-1
Aतमिलनाडु
Bओडिशा
Cराजस्थान
Dगुजरात

सही उत्तर: तमिलनाडु

व्याख्या (Explanation)

तमिलनाडु पहला भारतीय राज्य है जिसने पूरे राज्य में सभी घरों में छत पर वर्षा जल संचयन संरचना को अनिवार्य कर दिया है।

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स्रोत: CET 2024 (Graduate) 28 September 2024 Shift-1

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वायुमंडल की ओजोन परत प्राकृतिक ढाल के रूप में _____ के विरुद्ध कार्य करती है।

📋 पूछा गया: Clerk Grade-II/ Jr. Asst. 2024 Paper -Ist
Aइंफ्रारेड विकिरण
Bगामा विकिरण
Cअल्ट्रावायलेट (पराबैंगनी) विकिरण
Dएक्स रे

सही उत्तर: अल्ट्रावायलेट (पराबैंगनी) विकिरण

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स्रोत: Clerk Grade-II/ Jr. Asst. 2024 Paper -Ist

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ओजोन परत सूर्य से हानिकारक _____ किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है।

📋 पूछा गया: Rajasthan Police Constable Exam 2024 ( SHIFT - L2)
Aमाइक्रोवेव (microwaves)
Bएक्स-रे (X-rays)
Cइन्फ़रा रेड (infrared)
Dअल्ट्रावॉयलेट (ultraviolet)

सही उत्तर: अल्ट्रावॉयलेट (ultraviolet)

व्याख्या (Explanation)

ओजोन परत सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों को अवशोषित करती है और उन्हें पृथ्वी की सतह पर पहुंचने से रोकती है। अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा के लिए हानिकारक हो सकती हैं और त्वचा कैंसर का कारण बन सकती हैं।

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स्रोत: Rajasthan Police Constable Exam 2024 ( SHIFT - L2)

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जब पृथ्वी के वायुमंडल में गैस सूर्य की ऊर्जा को रोकती है, उस प्राकृतिक प्रक्रिया को क्या कहा जाता है -

📋 पूछा गया: Rajasthan Police Constable Exam 2024 ( SHIFT - L2)
Aअंकुरण (Germination)
Bप्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
Cकटाव (Erosion)
Dग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse effect)

सही उत्तर: ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse effect)

व्याख्या (Explanation)

ग्रीनहाउस प्रभाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें पृथ्वी के वायुमंडल में गैसें (जैसे CO2) सूर्य की ऊर्जा को पकड़ कर गर्मी को पृथ्वी पर बनाए रखती हैं। यह प्रभाव पृथ्वी को जीवन के अनुकूल तापमान बनाए रखने में मदद करता है, लेकिन अत्यधिक गैसें ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती हैं।

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स्रोत: Rajasthan Police Constable Exam 2024 ( SHIFT - L2)

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विभिन्न पर्यावरण संरक्षण संधियों/प्रोटोकॉल और उनसे संबंधित स्थानों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सी जोड़ी का सही मिलान नहीं हुआ है -

Aअंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कुछ खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों से संबंधित पूर्व सूचित सहमति पर कार्यप्रणाली सम्मेलन-स्टॉकहोम
Bजैविक विविधता पर सम्मेलन-नागोया
Cजैव सुरक्षा पर प्रोटोकॉल-कार्टाजेना
Dखतरनाक अपशिष्ट पदार्थों के सीमा पार स्थानांतरण के नियंत्रण पर सम्मेलन-बेसल

सही उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कुछ खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों से संबंधित पूर्व सूचित सहमति पर कार्यप्रणाली सम्मेलन-स्टॉकहोम

व्याख्या (Explanation)

पर्यावरण के संरक्षण के सम्बन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीडन के स्टॉकहोम शहर में 5 जून, 1972 को स्टॉकहोम सम्मेलन प्रारम्भ हुआ था। यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों (Persistent Organic Pollutants-POPs) से बचाने के लिए एक वैश्विक संधि है। इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवीय पर्यावरण के संरक्षण तथा सुधार की विश्वव्यापी समस्या का निदान करना था तथा प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा इसी सम्मेलन में हुई थी। स्टॉकहोम सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कुछ खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों से संबंधित नहीं था जबकि अन्य सभी विकल्प सही सुमेलित हैं।

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‘क्योटो प्रोटोकॉल’ ____ से संबंधित सम्मेलन है।

Aटैक्स हेवन
Bसीमा-पार आतंकवाद
Cनाभिकीय परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाना
Dजलवायु परिवर्तन

सही उत्तर: जलवायु परिवर्तन

व्याख्या (Explanation)

क्योटो प्रोटोकॉल को संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए 1997 में ‘यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ (UNFCCC) के द्वारा अस्तित्व में लाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तापवृद्धि में कमी लाने के लिए हरित गृह गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना है। क्योटो प्रोटोकॉल को जलवायु परिवर्तन के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रोटोकॉल में कार्बन उत्सर्जन को 2012 तक 5.2 के औसत से ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को 1990 की उत्सर्जन दरों से नीचे लाने की बाध्यता थी।

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