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राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ PYQ in Hindi - पेज 13

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 367 प्रश्नों में से यह पेज 13 है।

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निम्न में से कौन सा एक कालीबंगा सभ्यता से सम्बंधित नहीं है -

📋 पूछा गया: 3rd Grade Teacher 2022 Maths-Science L2
Aदुर्गीकरण
Bअग्निकुण्ड
Cमिट्टी की ईंटों के घर
Dलोहे के उपकरण

सही उत्तर: लोहे के उपकरण

व्याख्या (Explanation)

कालीबंगा से लोहे के उपकरण नहीं मिले हैं। कालीबंगा कांस्ययुगीन सभ्‍यता है। कालीबंगा प्राचीन सरस्वती नदी के बाएं तट पर जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ से लगभग 25 किमी. दक्षिण में स्थित है। वर्तमान में यहाँ घग्घर नदी बहती है। कालीबंगा में पूर्व हड़प्पाकालीन, ‘हड़प्पाकालीन’ तथा ‘उत्तर हड़प्पाकालीन’ सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं।

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स्रोत: 3rd Grade Teacher 2022 Maths-Science L2

122

झाडोल (उदयपुर), कुराडा (नागौर), साबणिया (बीकानेर), नन्दलालपुरा (जयपुर) में क्या समानता है -

📋 पूछा गया: 3rd Grade Teacher 2022 Maths-Science L2
Aपाषाण युग का केन्द्र
Bनवपाषाण कालीन संस्कृति के केन्द्र
Cताम्र उपकरणों के भण्डार
Dलघु पाषाण उपकरणों की खोज

सही उत्तर: ताम्र उपकरणों के भण्डार

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर (नीम का थाना), साबणियां, पूंगल (बीकानेर), बूढ़ा पुष्कर (अजमेर), बेणेश्वर (डूँगरपुर), नन्दलालपुरा, किराड़ोत, चीथबाड़ी (जयपुर), कुराड़ा (परबतसर), एलाना (जालौर), मलाह (भरतपुर), कोल माहौली (सवाईमाधोपुर) ताम्रयुगीन स्‍थल हैं।

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स्रोत: 3rd Grade Teacher 2022 Maths-Science L2

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राजस्थान में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन कब हुआ था -

📋 पूछा गया: 3rd Grade Teacher 2022 L1
A1952 में
B1953 में
C1949 में
D1950 में

सही उत्तर: 1950 में

व्याख्या (Explanation)

राजस्थान में वर्ष 1950 में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन किया गया था।

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स्रोत: 3rd Grade Teacher 2022 L1

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निम्नलिखित में से किस सभ्यता को धूलकोट कहते हैं -

📋 पूछा गया: 3rd Grade Teacher 2022 L1
Aगिलूण्ड
Bबालाथल
Cकालीबंगा
Dआहड़

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है। दसवीं व ग्याहरवीं शताब्दी में इसे ‘आघाटपुर’ अथवा ‘आघट दुर्ग’ के नाम से जाना जाता था। इसे ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है।

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स्रोत: 3rd Grade Teacher 2022 L1

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गणेश्वर _____ संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थल है।

📋 पूछा गया: 3rd Grade Teacher 2022 L1
Aनवपाषाण
Bमध्यपाषाण
Cपुरापाषाण
Dताम्रयुगीन

सही उत्तर: ताम्रयुगीन

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर का टीला, नीम का थाना में कांतली नदी के उद्गम स्थल पर अवस्थित है। गणेश्वर में रत्नचंद्र अग्रवाल ने 1977 में खुदाई कर इस सभ्यता पर प्रकाश डाला। इस क्षेत्र का विस्तृत उत्खनन कार्य 1978-89 के बीच विजय कुमार ने किया। डी.पी. अग्रवाल ने रेडियो कार्बन विधि एवं तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर इस स्थल की तिथि 2800 ईसा पूर्व निर्धारित की है अर्थात् गणेश्वर सभ्यता पूर्व-हड़प्पा कालीन सभ्यता है। ताम्रयुगीन सांस्कृतिक केन्द्रों में से प्राप्त तिथियों में यह प्राचीनतम् है। इस प्रकार गणेश्वर संस्कृति को निर्विवाद रूप से ‘भारत में ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ माना जा सकता है।

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स्रोत: 3rd Grade Teacher 2022 L1

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प्रागैतिहासिक काल की बागोर सभ्यता के अवशेष कोठारी नदी के तट पर किस स्थान से प्राप्त हुए हैं -

📋 पूछा गया: Lecturer (Tech. Edu.) Exam - 2020 (Gen. Studies of State Paper - III)
Aओझियाना
Bरंगमहल
Cमहासतियाँ
Dनलियासर

सही उत्तर: महासतियाँ

व्याख्या (Explanation)

भीलवाड़ा कस्बे से 25 किलोमीटर दूर कोठारी नदी के किनारे वर्ष 1967-68 में डॉ. वीरेंद्रनाथ मिश्र, डॉ. एल.एस. लेश्निक व डेक्कन कॉलेज पूना और राजस्थान पुरातत्व विभाग के सहयोग से की गयी खुदाई में 3000 ई.पू. से लेकर 500 ई.पू. तक के काल की बागौर सभ्यता का पता लगा।

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स्रोत: Lecturer (Tech. Edu.) Exam - 2020 (Gen. Studies of State Paper - III)

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गणेश्वर के टीले मुख्य रूप से सम्बन्धित हैं -

📋 पूछा गया: A.A.R.O. (GK and Entomology) 2022
Aमध्यपाषाण संस्कृति से
Bपुरापाषाण संस्कृति से
Cताम्र संस्कृति से
Dनवपाषाण संस्कृति से

सही उत्तर: ताम्र संस्कृति से

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर का टीला, नीम का थाना में कांतली नदी के उद्गम स्थल पर अवस्थित है। गणेश्वर में रत्नचंद्र अग्रवाल ने 1977 में खुदाई कर इस सभ्यता पर प्रकाश डाला। इस क्षेत्र का विस्तृत उत्खनन कार्य 1978-89 के बीच विजय कुमार ने किया। डी.पी. अग्रवाल ने रेडियो कार्बन विधि एवं तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर इस स्थल की तिथि 2800 ईसा पूर्व निर्धारित की है अर्थात् गणेश्वर सभ्यता पूर्व-हड़प्पा कालीन सभ्यता है। ताम्रयुगीन सांस्कृतिक केन्द्रों में से प्राप्त तिथियों में यह प्राचीनतम् है। इस प्रकार गणेश्वर संस्कृति को निर्विवाद रूप से ‘भारत में ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ माना जा सकता है।

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स्रोत: A.A.R.O. (GK and Entomology) 2022

128

अनाज रखने के बड़े मृद्भाण्ड ‘गोरे’ व ‘कोठे’ राजस्थान के किस प्राचीन स्थल से प्राप्त होते हैं -

📋 पूछा गया: A.A.R.O. (GK and Entomology) 2022
Aतिलवाड़ा
Bबूढ़ा पुष्कर
Cआहड़
Dपीलीबंगा

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। यहां से अनाज रखने के मृद्भाण्ड प्राप्त हुए हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में गोरे व कोठ (Gore and Koth) कहा जाता है।

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स्रोत: A.A.R.O. (GK and Entomology) 2022

129

किस पुरातात्विक स्थल को धरतुल घाट के नाम से भी जाना जाता है -

📋 पूछा गया: A.A.R.O. (GK and Botany) 2022
Aसांभर
Bजोधपुरा
Cनागर
Dआहड़

सही उत्तर: जोधपुरा

व्याख्या (Explanation)

जयपुर जिले में साबी नदी तट पर जोधपुरा गाँव में 1972-75 ई. में उत्खनन में जोधपुर सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए। यह सभ्यता 2500 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी के मध्य फली फूली।

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स्रोत: A.A.R.O. (GK and Botany) 2022

130

भीमजी की डूंगरी है -

📋 पूछा गया: A.A.R.O. (GK and Ag. Che.) 2022
Aचित्तौड़ में
Bउदयपुर में
Cभीलवाड़ा में
Dबैराठ में

सही उत्तर: बैराठ में

व्याख्या (Explanation)

प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ) में ‘बीजक की पहाड़ी’, ‘भीमजी की डूँगरी’ मोती डूंगरी तथा ‘महादेवजी की डूँगरी’ आदि स्थानों पर उत्खनन कार्य दयाराम साहनी द्वारा 1936-37 में तथा पुनः 1962-63 में पुरातत्वविद् नीलरत्न बनर्जी तथा कैलाशनाथ दीक्षित द्वारा किया गया।

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स्रोत: A.A.R.O. (GK and Ag. Che.) 2022

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