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राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ PYQ in Hindi - पेज 28

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 367 प्रश्नों में से यह पेज 28 है।

271

‘अपोलोडोट्स’ का सिक्का किस पुरातत्विक स्थल से मिला है -

Aरैढ
Bबैराठ
Cनलियासर
Dसुनारी

सही उत्तर: रैढ

व्याख्या (Explanation)

टोंक जिले में स्थित रैढ़ के उत्खनन में 3075 आहत मुद्रा या पंचमार्क सिक्के भी पाये गये हैं। रैढ़ से आहत मुद्रा के अतिरिक्त 300 मालव जनपद के सिक्के, 14 मित्र सिक्के, 6 सेनापति सिक्के, 7 वपु सिक्के, एक अपोलोडोट्स का सिक्का, 189 अज्ञात ताम्र सिक्के और इण्डो-सेसेनियन सिक्के प्रमुख है।

272

निम्नलिखित में से किस स्थल से इंडो-ग्रीक शासकों के अट्ठाईस सिक्के प्राप्त हुए हैं -

📋 पूछा गया: JSA Serology-2019(Rajasthan Gk)
Aनगरी
Bबैराठ
Cनगर
Dरैढ़

सही उत्तर: बैराठ

व्याख्या (Explanation)

यहां से 36 चांदी के सिक्के प्राप्त हुए हैं 36 में से 28 सिक्के हिन्द - युनानी राजाओं के है। 28 में से 16 सिक्के मिनेण्डर राजा(प्रसिद्ध हिन्द - युनानी राजा) के मिले हैं।

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स्रोत: JSA Serology-2019(Rajasthan Gk)

273

बागोर की सभ्यता निम्नलिखित में से किस जिले में स्थित थी -

📋 पूछा गया: JSA Ballistic-2019(Rajasthan Gk)
Aभीलवाड़ा
Bजैसलमेर
Cगंगानगर
Dबीकानेर

सही उत्तर: भीलवाड़ा

व्याख्या (Explanation)

भीलवाड़ा कस्बे से 25 किलोमीटर दूर कोठारी नदी के किनारे वर्ष 1967-68 में डॉ. वीरेंद्रनाथ मिश्र, डॉ. एल.एस. लेश्निक व डेक्कन कॉलेज पूना और राजस्थान पुरातत्व विभाग के सहयोग से की गयी खुदाई में 3000 ई.पू. से लेकर 500 ई.पू. तक के काल की बागौर सभ्यता का पता लगा।

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स्रोत: JSA Ballistic-2019(Rajasthan Gk)

274

जीवन्त स्वामी की धातु मूर्ति, प्रतिहार कला जून 1986 को कहां प्राप्त हुई थी -

Aजसोल
Bओझियाना
Cसोजत
Dबरवाला

सही उत्तर: बरवाला

व्याख्या (Explanation)

बरवाला से जीवन्त स्वामी/महावीर स्वामी की धातु की मूर्ति मिली हैं।

275

प्राचीन काल में निम्नलिखित में से किस स्थान को ‘ताम्रवती’ के नाम से जाना जाता था -

📋 पूछा गया: Junior Instructor(welder)
Aखेतड़ी
Bआहड़
Cदरीबा
Dगणेश्वर

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है। दसवीं व ग्याहरवीं शताब्दी में इसे ‘आघाटपुर’ अथवा ‘आघट दुर्ग’ के नाम से जाना जाता था। इसे ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है।

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स्रोत: Junior Instructor(welder)

276

आहड़ का उत्खन्न कार्य किसके नेतृत्व में निष्पादित हुआ -

📋 पूछा गया: Junior Instructor(fitter)
Aएच.डी. सांकलिया
Bवी.एन. मिश्रा
Cवी.एस. वाकणकर
Dबी.बी. लाल

सही उत्तर: एच.डी. सांकलिया

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। इस स्थल के उत्खनन का कार्य सर्वप्रथम 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास के नेतृत्व में हुआ। 1956 ई. में श्री रतचंद्र अग्रवाल की देखरेख में खनन कार्य हुआ। इसके उपरांत डॉ. एच.डी. सांकलिया, डेकन कॉलेज पूना, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, राजस्थान तथा मेलबोर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अभियान में वर्ष 1961-62 के दौरान इस स्थल का उत्खनन कार्य किया गया।

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स्रोत: Junior Instructor(fitter)

277

कालीबंगा से हडप्पा पूर्व की सभ्यता के मिलते-जुलते अवशेष पाकिस्तान में किस स्थान पर मिले हैं -

📋 पूछा गया: Junior Instructor(copa)
Aसुत्कागेंडोर
Bलाहौर
Cकोट डीजी
Dमोंटगोमरी

सही उत्तर: कोट डीजी

व्याख्या (Explanation)

कालीबंगा से हड़प्पा पूर्व की सभ्यता के मिलते-जुलते अवशेष पाकिस्तान में आमरी, हड़प्पा और कोट दीजी में पाए गए हैं। ये तीनों स्थान पाकिस्तान में हड़प्पा से पहले की संस्कृतियों के अस्तित्व को मान्यता देने वाले पहले स्थान थे।

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स्रोत: Junior Instructor(copa)

278

आहड़ सभ्यता की सर्वप्रथम खुदाई किसने की थी -

📋 पूछा गया: Junior Instructor(copa)
Aवी.एन. मिश्रा
Bअक्षय कीर्ती व्यास
Cललित पांडे
Dवी.एस.सिंधे

सही उत्तर: अक्षय कीर्ती व्यास

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। इस स्थल के उत्खनन का कार्य सर्वप्रथम 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास के नेतृत्व में हुआ। 1956 ई. में श्री रतचंद्र अग्रवाल की देखरेख में खनन कार्य हुआ। इसके उपरांत डॉ. एच.डी. सांकलिया, डेकन कॉलेज पूना, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, राजस्थान तथा मेलबोर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त अभियान में वर्ष 1961-62 के दौरान इस स्थल का उत्खनन कार्य किया गया।

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स्रोत: Junior Instructor(copa)

279

कालीबंगा के संदर्भ में असत्य कथन है -

Aयहां पत्थर के बने तौलने के बाट मिले हैं।
Bयहां बैलगाड़ी के खिलौने मिले हैं।
Cयहां विशाल दुर्ग के अवशेष मिले हैं।
Dयहां लोहे के बने उपकरण मिले हैं।

सही उत्तर: यहां लोहे के बने उपकरण मिले हैं।

व्याख्या (Explanation)

कालीबंगा प्राचीन सरस्वती नदी के बाएं तट पर जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ से लगभग 25 किमी. दक्षिण में स्थित है। वर्तमान में यहाँ घग्घर नदी बहती है। कालीबंगा में पूर्व हड़प्पाकालीन, ‘हड़प्पाकालीन’ तथा ‘उत्तर हड़प्पाकालीन’ सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां से लोहे के बने उपकरण नहीं मिले हैं। यह कांस्ययुगीन सभ्‍यता थी।

280

आहड़ में खुदाई से काले व लाल रंग के मृदभाण्ड जो उपलब्ध हुए हैं, उन्हें किस शैली से पकाया जाता था -

Aखुली तपाई शैली
Bबन्द भट्ट तपाई शैली
Cउल्टी तपाई शैली
Dउपर्युक्त सभी

सही उत्तर: उल्टी तपाई शैली

व्याख्या (Explanation)

उत्खनन में मृदभांड सर्वाधिक मिले है। यहाँ मिले बर्तनो में भोजन के बर्तन की पाश्र्वभूमि काली है, किनारा लाल तथा कुछ बर्तनो में सफेदी से चित्रकारी भी की गई है। यह मृदभांड आहड़ को लाल-काले मृदभांड वाली संस्कृति का प्रमुख केंद्र सिद्ध करते है। आहड़ में खुदाई से मिले काले और लाल रंग के मृदभांडों को उल्टी तपाई शैली से पकाया जाता था

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