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राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ PYQ in Hindi - पेज 7

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 367 प्रश्नों में से यह पेज 7 है।

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नगरी का प्राचीन नाम ____ था। (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)

📋 पूछा गया: Junior Instructor(CLIT) Exam 2024
Aमहानाल
Bविंध्यवल्ली
Cभील्लमाल
Dमध्यमिका

सही उत्तर: मध्यमिका

व्याख्या (Explanation)

चित्तौड़गढ़ के पास स्थित नगरी को पाणिनी की अष्टाध्यायी में उल्लिखित ‘माध्यमिका’ माना जाता है। जो बेड़च नदी के तट पर स्थित था। नगरी शिवि जनपद की राजधानी रही है।

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स्रोत: Junior Instructor(CLIT) Exam 2024

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नीचे दो कथन दिए गए हैं: कथन (I) : बालाथल राजस्थान का एक महत्त्वपूर्ण पुरातत्व ताम्रपाषाण स्थल है। कथन (II) : इसकी खोज वी.एन. मिश्रा ने की थी। इसका हड़प्पा सभ्यता से सम्पर्क उनके गृह निर्माण से प्रमाणित होता है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 24 October Shift-II
Aकथन (I) और (II) दोनों असत्य हैं।
Bकथन (I) सत्य है, किन्तु कथन (II) असत्य है।
Cकथन (I) असत्य है, किन्तु कथन (II) सत्य है।
Dकथन (I) और (II) दोनों सत्य हैं।

सही उत्तर: कथन (I) और (II) दोनों सत्य हैं।

व्याख्या (Explanation)

सन् 1993 में वी.एन. मिश्र द्वारा ई.पू. 3000 से लेकर ई.पू. 2500 तक की ताम्रपाषाण युगीन संस्कृति के बारे में पता चला है। बालाथल उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील में स्थित है।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 24 October Shift-II

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कालीबंगा सभ्यता के संदर्भ में सबसे असत्य कथन का चयन करें।

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 24 October Shift-I
Aकालीबंगा एक सुनियोजित शहर था, घरों के निर्माण के लिए धूप में बनी ईंटों का उपयोग किया जाता था।
Bकालीबंगा में जुताई वाले खेत का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
Cप्राचीन दृषद्वती और सरस्वती नदी घाटी (वर्तमान घग्गर नदी क्षेत्र) ने कालीबंगा की सभ्यता को जन्म दिया।
Dयह सभ्यता राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है।

सही उत्तर: कालीबंगा में जुताई वाले खेत का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

व्याख्या (Explanation)

कालीबंगा में जुताई वाले खेत के प्रमाण मिले हैं, जो इसे असत्य बनाता है। कालीबंगा प्राचीन सरस्वती नदी के बाएं तट पर जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ से लगभग 25 किमी. दक्षिण में स्थित है। वर्तमान में यहाँ घग्घर नदी बहती है।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 24 October Shift-I

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कौन सी सभ्यता धूलकोट या ताम्रवती नगरी के नाम से प्रसिद्ध है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनेः)

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 24 October Shift-I
Aचन्द्रावती
Bसिंधु
Cआहड़
Dबालाथल

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

आहड़ सभ्यता को धूलकोट और ताम्रवती नगरी के नाम से भी जाना जाता है। उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 24 October Shift-I

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नीम का थाना में कांतली नदी के स्त्रोत पर ताम्र संस्कृति का कौन सा स्थल खोजा गया -

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 23 October Shift-II
Aगणेश्वर
Bआहड़
Cगिलून्ड
Dबागोर

सही उत्तर: गणेश्वर

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर का टीला, नीम का थाना में कांतली नदी के उद्गम स्थल पर अवस्थित है। गणेश्वर में रत्नचंद्र अग्रवाल ने 1977 में खुदाई कर इस सभ्यता पर प्रकाश डाला। यहाँ तांबे की वस्तुएं, औजार, और अन्य कलाकृतियां मिली हैं, जो इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 23 October Shift-II

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गणेश्वर सभ्यता के अवशेष राजस्थान में किस स्थान पर पाये गये हैं -

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 23 October Shift-I
Aभीलवाड़ा
Bनीम का थाना
Cउदयपुर
Dहनुमानगढ़

सही उत्तर: नीम का थाना

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर सभ्यता ताम्रयुगीन (कॉपर एज) सभ्यता है, और इसके अवशेष नीम का थाना, सीकर जिले में पाए गए हैं।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 23 October Shift-I

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कालीबंगा राजस्थान के किस स्थान पर स्थित है -

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-II
Aहनुमानगढ़
Bश्री गंगानगर
Cजयपुर
Dसीकर

सही उत्तर: हनुमानगढ़

व्याख्या (Explanation)

कालीबंगा हनुमानगढ़ जिले में घग्गर नदी के पास स्थित है। यह हड़प्पा सभ्यता का एक प्रमुख स्थल है और अपने किले और सिंचाई प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है। कालीबंगा में पूर्व हड़प्पाकालीन, ‘हड़प्पाकालीन’ तथा ‘उत्तर हड़प्पाकालीन’ सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं। खुदाई के दौरान मिली काली चूड़ियों के टुकड़ों के कारण इस स्थान को कालीबंगा कहा जाता है क्योंकि पंजाबी में बंगा का अर्थ चूड़ी होता है।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-II

68

गणेश्वर की खुदाई के संदर्भ में सबसे असत्य कथन का चयन करें -

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-II
Aगणेश्वर में राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा की गई खुदाई में लगभग 5000 वर्ष पुरानी संस्कृति प्रकाश में आई।
Bयहाँ हड़प्पा से तांबा प्राप्त किया जाता था।
Cगणेश्वर तांबे की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण स्थल है।
Dगणेश्वर, नीम का थाना में कंतली नदी के स्त्रोत पर खोजी गई

सही उत्तर: यहाँ हड़प्पा से तांबा प्राप्त किया जाता था।

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर तांबे की संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन हड़प्पा से तांबा प्राप्त करने का कथन गलत है। गणेश्वर का टीला, नीम का थाना में कांतली नदी के उद्गम स्थल पर अवस्थित है। गणेश्वर में रत्नचंद्र अग्रवाल ने 1977 में खुदाई कर इस सभ्यता पर प्रकाश डाला। ताम्रयुगीन सांस्कृतिक केन्द्रों में से प्राप्त तिथियों में यह प्राचीनतम् है। इस प्रकार गणेश्वर संस्कृति को निर्विवाद रूप से ‘भारत में ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ माना जा सकता है।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-II

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किस सभ्यता के लोग अपने मृतकों को आभूषणों के साथ दफनाते थे -

📋 पूछा गया: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-I
Aकालीबंगा
Bआहड़
Cबागोर
Dगिलून्ड

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

वर्तमान उदयपुर जिले में स्थित आहड़ सभ्यता, दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान का सभ्यता का केन्द्र था। यह सभ्यता बनास नदी सभ्यता का प्रमुख भाग थी। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़ नदी के किनारे मौजूद थी। आहड़ सभ्यता (उदयपुर) के लोग मृतकों को मिट्टी के बर्तनों और आभूषणों के साथ दफनाते थे।

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स्रोत: CET 2024 (12th Level) 22 October Shift-I

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पुरातत्त्वविद् ‘नीलरत्न बनर्जी’ ने किस स्थल का उत्खनन कार्य किया था -

📋 पूछा गया: SCHOOL LECTURER (SANSKRIT EDU. DEPTT.) COMP. EXAM-2024
Aबैराठ
Bआहड़
Cकालीबंगा
Dगणेश्वर

सही उत्तर: बैराठ

व्याख्या (Explanation)

प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ) में ‘बीजक की पहाड़ी’, ‘भीमजी की डूँगरी’ मोती डूंगरी तथा ‘महादेवजी की डूँगरी’ आदि स्थानों पर उत्खनन कार्य दयाराम साहनी द्वारा 1936-37 में तथा पुनः 1962-63 में पुरातत्वविद् नीलरत्न बनर्जी तथा कैलाशनाथ दीक्षित द्वारा किया गया।

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स्रोत: SCHOOL LECTURER (SANSKRIT EDU. DEPTT.) COMP. EXAM-2024

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