‘तुरकिलंगी’ लोक नाट्य के रचनाकार -
सही उत्तर: शाहअली और तुक्कनगीर
स्रोत: Asst. Agriculture Officer - 2011
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान में नृत्य से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 373 प्रश्नों में से यह पेज 26 है।
‘तुरकिलंगी’ लोक नाट्य के रचनाकार -
सही उत्तर: शाहअली और तुक्कनगीर
स्रोत: Asst. Agriculture Officer - 2011
‘कच्छी घोड़ी’ है -
सही उत्तर: व्यावसायिक नृत्य
स्रोत: Asst. Agriculture Officer - 2011
मेवाड़ के अरावली क्षेत्र की भील जाति का लोकनाट्य है -
सही उत्तर: गवरी
राजस्थान में भवाई नृत्य के जन्मदाता थे -
सही उत्तर: बाघाजी
दक्षिण राजस्थान की भील जनजाति का निम्नलिखित में से कौनसा नृत्य नाट्य रूप में किया जाता है -
सही उत्तर: गवरी
व्याख्या (Explanation)
गवरी/राई नृत्य – उदयपुर संभाग में सावन-भादों में आयोजित किया जाने वाला यह मुखौटा प्रधान धार्मिक नृत्य है जो केवल पुरूषों द्वारा किया जाता है। मादल व थाली बजाने के कारण इसे राई नृत्य कहते है।
नाथद्वारा में होली के अवसर पर किए जाने वाला लोकनृत्य है -
सही उत्तर: डांग
व्याख्या (Explanation)
डांग नृत्य नाथ द्वारा (राजसमंद) को लोकप्रियय नृत्य है। होली के अवसर पर स्त्री व पुरूषों द्वारा किया जाता है।
रम्मत नामक रंगमंच/नाट्य किस क्षेत्र से संबंधित है -
सही उत्तर: बीकानेर
ख्याल के जयपुर घराने के प्रवर्तक कौन थे -
सही उत्तर: मनरंग
निम्नलिखित में से कौनसा नृत्य आदिवासी गरासियों से संबंधित नहीं है -
सही उत्तर: कच्छी घोडी
जालौर का ढ़ोल नृत्य किस शैली में आयोजित होता है -
सही उत्तर: थाकना
व्याख्या (Explanation)
ढोल नृत्य जालौर का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। इसे विवाह के अवसर पर माली, ढोली, सरगड़ा, और भील जाती के पुरुषों द्वारा किया जाता है। राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास ने इन व्यावसायिक नर्तकों को पहचान दिलाई है। इस नृत्य में चार-पांच ढोल एक साथ बजाये जाते है। ढोल का मुखिया ‘थाकना शैली‘ में ढोल बजाना शुरू करता है थाकना समाप्ति पर कुछ पुरुष मुँह में तलवार, कुछ हाथ मे डंडे, कुछ भुजाओं पर रुमाल लटकाकर और अन्य लयबद्ध नृत्य करना प्रारम्भ करते है।