‘तुर्रा कलंगी ख्याल’ में विख्यात ‘तुर्रा’ और ‘कलंगी’ किसके प्रतीक हैं -
सही उत्तर: शिव और पार्वती
व्याख्या (Explanation)
मेवाड के शाह अली और तुकनगरी नामक संत ने 400 वर्ष पूर्व तुर्रा कलंगी की रचना की। ‘तुर्रा’ को ‘शिव’ और ‘कलंगी’ को ‘पार्वती’ का प्रतीक माना जाता है। तुकनगीर ‘तुर्रा’ के तथा शाह अली ‘कलंगी’ के पक्षकार थे। इनके शिव-शक्ति संबंधी विचारों को लोगों तक पहुंचाने का मुख्य माध्यम काव्यमय रचनाएं थीं, जिन्हें ‘दंगल‘ के नाम से जानते हैं। तुकनगीर भगवा व शाह अली हरे वस्त्र धारण कर प्रस्तुति देते। दोनों ने मेवाड़ आकर यह विघा प्रचलित की। चन्देरी के राजा ने तुकनगीर को अपने मुकुट का तुर्रा एवं शाहअली को कंलगी भेंट की तब से इसे तुर्रा कलंगी ख्याल के नाम से जाना जाने लगा।
स्रोत: RSSB Fourth Class Exam 2024 (20 Sep. 2025 2nd Shift)