भृर्तहरि की गुफा स्थित है-
सही उत्तर: बघेरा गांव अजमेर
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान के प्रमुख संत एवं सम्प्रदाय से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 358 प्रश्नों में से यह पेज 24 है।
भृर्तहरि की गुफा स्थित है-
सही उत्तर: बघेरा गांव अजमेर
परशुराम जी गौड़ ने किस सम्प्रदाय के विचारों के प्रचारार्थ ‘परशुराम-सागर’ नामक ग्रंथ की रचना की -
सही उत्तर: निम्बार्क
व्याख्या (Explanation)
इस सम्प्रदाय को सनकादिक सम्प्रदाय भी कहा जाता है।
‘सिंभूदड़ा व कोंडा’ क्या हैं -
सही उत्तर: संत जसनाथ से संबंधित ग्रन्थ
व्याख्या (Explanation)
जसनाथी सम्प्रदाय के पवित्र ग्रन्थ ‘सिंभूदड़ा व कोंडा’ है। इन ग्रंथों में संत जसनाथजी के उपदेशों का संग्रह मिलता है।
राजस्थान में शैव धर्म की प्राचीनतम जानकारी कहां से प्राप्त होती है -
सही उत्तर: नाथ प्रशस्ति
रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक कोन था -
सही उत्तर: अग्रदास
व्याख्या (Explanation)
कृष्णदास जी पयहारी ने गलता (जयपुर) में रामानंदी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ स्थापित की। कृष्णदास जी पयहारी के ही शिष्य अग्रदास जी ने रेवासा ग्राम (सीकार) में अलग पीठ स्थापित की तथा रसिक सम्प्रदाय के नाम से अलग और नए सम्प्रदाय की शुरूआत की।
नागलापीठ किस सम्प्रदाय से संबंधित है -
सही उत्तर: लालदासी सम्प्रदाय
व्याख्या (Explanation)
लालदास जी का जन्म धोली धूव गांव अलवर में हुआ। लाल दास जी को ज्ञान की प्राप्ति तिजारा (अलवर), प्रधान पीठ - नगला जहाज (भरतपुर) में है। मेवात क्षेत्र का लोकप्रिय सम्प्रदाय है।
निम्नलिखित में से ‘पुष्टिमार्ग’ के प्रवर्तक कौन है -
सही उत्तर: वल्लभाचार्य
व्याख्या (Explanation)
संस्थापक -आचार्य वल्लभ जी।अष्ट छाप मण्डली वल्लभ जी के पुत्र विठ्ठल नाथ जी ने स्थापित की थी, जो इस सम्प्रदाय के प्रचार-प्रसार का कार्य करती थी।
निम्न में से कौन सी रचना संत मीरां बाई की नहीं है -
सही उत्तर: दयाबोध
व्याख्या (Explanation)
दयाबोध तथा विनय मालिका ग्रन्थ की रचना संत दया बाई ने की थी। मीरां बाई की प्रमुख रचनाओं में ‘टीका राग गोविन्द’, ‘नरसी मेहता की हुंडी’, ‘रूक्मिणी मंगल’ आदि है। मीरां के निर्देशन में रतना खाती ने ‘नरसी जी रो मायरों’ की रचना ब्रज भाषा में की।
निम्न में से किस संत को ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती ने ‘सुल्तान-उल-तरीकीन’ की उपाधि दी -
सही उत्तर: शेख हमीदुद्दीन नागौरी
व्याख्या (Explanation)
हमीदुद्दीन नागौरी को उनके संयम और धार्मिकता के कारण ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती ने ‘सुल्तान-उल-तरीकीन’(संन्यासियों के सुल्तान) की उपाधि दी। भारत में अजमेर के बाद नागौर में दूसरा बड़ा उर्स हम्मीदुद्दीन नागौरी का लगता है।
जहां दादू ने अपना अंतिम समय बिताया था, उस स्थान का नाम था -
सही उत्तर: नारायणा
व्याख्या (Explanation)
दादू दयाल का जन्म गुजरात प्रांत के अहमदाबाद नगर में हुआ। दादू पंथ की स्थापना 1554 ई. में हुई। दादूदयाल 1568 ई. में सांभर आ गए। ये आम्बेर के राजा मानसिंह के समकालीन थे।