मुहणौत नैणसी ने गुर्जर-प्रतिहारों की कितनी शाखाओं का वर्णन किया है-
सही उत्तर: छब्बीस
व्याख्या (Explanation)
नैणसी ने गुर्जर प्रतिहारों की 26 शाखाओं का वर्णन किया है।
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के गुर्जर प्रतिहार वंश से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 85 प्रश्नों में से यह पेज 3 है।
मुहणौत नैणसी ने गुर्जर-प्रतिहारों की कितनी शाखाओं का वर्णन किया है-
सही उत्तर: छब्बीस
व्याख्या (Explanation)
नैणसी ने गुर्जर प्रतिहारों की 26 शाखाओं का वर्णन किया है।
प्रतिहारों में ‘रोहिलद्धि’ के नाम से जाना जाता है -
सही उत्तर: हरिश्चन्द्र
व्याख्या (Explanation)
जोधपुर और घटियाला शिलालेखों के अनुसार हरिशचन्द्र नामक ब्राह्मण के दो पत्नियां थी। एक ब्राह्मणी और दूसरी क्षत्राणी भद्रा। क्षत्राणी भद्रा के चार पुत्रों भोगभट्ट, कद्दक, रज्जिल और दह ने मिलकर मण्डौर को जीतकर गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना की।
निम्न में से किन अभिलेखों में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है - अ. कराड़ ब. नीलगुण्ड स. राधनपुर द. देवली
सही उत्तर: अ, ब, स और द
व्याख्या (Explanation)
नीलकुण्ड, राधनपुर, देवली तथा करडाह शिलालेख में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है।
प्रतिहार वंश की मण्डोर शाखा के किस शासक ने अपनी राजधानी मण्डोर से मेड़ता स्थान्तरित की थी -
सही उत्तर: नागभट्ट प्रथम
व्याख्या (Explanation)
नागभट्ट प्रथम ने मेड़ता जीतकर अपनी राजधानी बनाया। इतिहास मे इसे नाहड़ के नाम से जाना जाता है।
राजस्थान में प्रतिहार वंश के संस्थापक हरिशचन्द्र की राजधानी थी -
सही उत्तर: मंडोर
व्याख्या (Explanation)
जोधपुर और घटियाला शिलालेखों के अनुसार हरिशचन्द्र नामक ब्राह्मण के दो पत्नियां थी। एक ब्राह्मणी और दूसरी क्षत्राणी भद्रा। क्षत्राणी भद्रा के चार पुत्रों भोगभट्ट, कद्दक, रज्जिल और दह ने मिलकर मण्डौर को जीतकर गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना की।
ओसियां के कलात्मक मन्दिरों का निर्माण कराया -
सही उत्तर: गुर्जर-प्रतिहारों ने
व्याख्या (Explanation)
वत्सराज ने औसियां के मंदिरों का निर्माण करवाया। औसियां सूर्य व जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। औसियां के मंदिर महामारू शैली में बने है। लेकिन औसियां का हरिहर मंदिर पंचायतन शैली में बना है। औसियां राजस्थान में प्रतिहारों का प्रमुख केन्द्र था। औसिंया (जोधपुर) के मंदिर प्रतिहार कालीन है। औसियां को राजस्थान का भुवनेश्वर कहा जाता है।
ग्वालियर शिलालेख में नागभट्ट प्रथम को किस उपाधि से सम्मानित किया गया है -
सही उत्तर: नारायण
व्याख्या (Explanation)
नागभट्ट प्रथम के समय में सिन्ध की ओर से बिलोचों ने आक्रमण किया और अरबो ने अरब से। नागभट्ट ने इन्हें अपनी सीमा में घुसने नहीं दिया जिससे उनकी ख्याति बहुत बढ़ी। इन्हें ग्वालियर प्रशस्ति में ‘नारायण’ और ‘म्लेच्छों का नाशक’ कहा गया है।
निम्न में से वह शासक जिसने अरब आक्रमणकारियों को अपने राज्य में बढ़ने नहीं दिया और यह शासक अरबों का शत्रु कहा गया -
सही उत्तर: नागभट्ट प्रथम
व्याख्या (Explanation)
नागभट्ट प्रथम के समय में सिन्ध की ओर से बिलोचों ने आक्रमण किया और अरबो ने अरब से। नागभट्ट ने इन्हें अपनी सीमा में घुसने नहीं दिया जिससे उनकी ख्याति बहुत बढ़ी। इन्हें ग्वालियर प्रशस्ति में ‘नारायण’ और ‘म्लेच्छों का नाशक’ कहा गया है।
छठी शताब्दी के आस-पास गुर्जरात्रा प्रदेश पर शासन था -
सही उत्तर: प्रतिहार
व्याख्या (Explanation)
राजस्थान के दक्षिण पश्चिम में गुर्जरात्रा प्रदेश में प्रतिहार वंश की स्थापना हुई। प्रसिद्ध इतिहासकार रमेश चन्द्र मजूमदार के अनुसार गुर्जर प्रतिहारों ने छठी सदी से बारहवीं सदी तक अरब आक्रमणकारियों के लिए बाधक का काम किया और भारत के द्वारपाल(प्रतिहार) की भूमिका निभाई।
जोधपुर से प्राप्त घटियाला शिलालेख से किस प्रतिहार राजा की जानकारी मिलती है -
सही उत्तर: कक्कुक
व्याख्या (Explanation)
कक्कुक ने घटियाला (जोधपुर) में 861 ई. में दो शिलालेख लगवाये जिनमें राजस्थान में सर्वप्रथम सती प्रथा का उल्लेख हुआ है। इस अभिलेख के अनुसार राणुका की मृत्यु पर उसकी पत्नी सम्पल देवी सती हुई थी।