निम्नलिखित बोलियों में से कौन-सी ढुंढाड़ी की उप बोली नहीं है -
सही उत्तर: अहीरवाटी
स्रोत: JSA Chemistry-2019(Rajasthan Gk)
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थानी भाषा एवं बोलियां से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 219 प्रश्नों में से यह पेज 19 है।
निम्नलिखित बोलियों में से कौन-सी ढुंढाड़ी की उप बोली नहीं है -
सही उत्तर: अहीरवाटी
स्रोत: JSA Chemistry-2019(Rajasthan Gk)
राजस्थानी भाषा के छन्दों के आधार पर रचित ‘पिंगल सिरोमणि’ ग्रन्थ के रचयिता हैं-
सही उत्तर: कुशल लाभ
स्रोत: Asst. Agriculture Officer - 2018 (Paper-1)
ढूंढाड़ी बोली के प्रचलित विविध रूपों में निम्न में से कौन सा सही नहीं है -
सही उत्तर: खेराड़ी
व्याख्या (Explanation)
पूर्वी राजस्थानी के मध्यपूर्वी भाग या प्राचीन ढूंढाड़ प्रदेश जिसका संबंध आमेर राज्य से रहा है की प्रधान बोली जयपुरी या ढूंढाड़ी है। ढूंढाड़ी की प्रमुख उपबोलियाँ – इसकी उपबोलियों में हाड़ौती, किशनगढ़ी, तोरावाटी, राजावाटी, अजमेरी, चौरासी, नागरचोल आदि प्रमुख हैं। खेराड़ी मारवाड़ी की उपबोली है।
स्रोत: Asst. Agriculture Officer - 2018 (Paper-1)
मालवा प्रदेश के राजपूतों में प्रचलित मारवाड़ी और मालवी के सम्मिश्रण से उत्पन्न बोली का क्या नाम है -
सही उत्तर: रांगड़ी
स्रोत: Asst. Agriculture Officer - 2018 (Paper-1)
निम्न में से कौन विद्वान हैं, जो राजस्थानी भाषा-बोलियों से सम्बन्धित कार्य के लिए नहीं जाने जाते -
सही उत्तर: नोम चोम्स्की
स्रोत: Asst. Agriculture Officer - 2018 (Paper-1)
निम्न में से बेमेल विकल्प चुनिए -
सही उत्तर: ढूंढाड़ी
व्याख्या (Explanation)
ढंूढाड़ी (पूर्वी राजस्थानी) को छोड़कर बाकी सभी पश्चिमी राजस्थानी की प्रतिनिधि बोलियां हैं।
राजस्थानी की पहली/औपचारिक व्याकरण लिखी गई, निम्न के द्वारा -
सही उत्तर: हेमचन्द्र सूरी
व्याख्या (Explanation)
राजस्थानी भाषा की एक औपचारिक व्याकरण जैन भिक्षु और प्रख्यात विद्वान- हेमचंद्र सूरी द्वारा लिखी गई थी।
संत चरणदास का साहित्य किस बोली में मिलता है -
सही उत्तर: मेवाती
व्याख्या (Explanation)
सन्त लालदास, चरणदास, दयाबाई, सहजोबाई, डूंगरसिंह भीक, शक्के आदि की रचनाएँ मेवाती बोली में हैं। पूर्वोत्तर राजस्थान के अलवर, भरतपुर में ‘मेव’ जाति का आधिक्य होने इसे ‘मेवात क्षेत्र कहा गया है। इस क्षेत्र में मेवाती बोली का विशेष महत्त्व है।
स्रोत: Asstt. Agriculture Officer(TSP) Exam 2015 Paper 1
डूंगरपुर-बांसवाड़ा क्षेत्र में कौन-सी भाषा बोली जाती है -
सही उत्तर: वागड़ी
व्याख्या (Explanation)
डूंगरपुर और बांसवाड़ा क्षेत्र में वागड़ी बोली बोली जाती है। यह राजस्थानी भाषा की एक बोली है और गुजराती भाषा से मिलती-जुलती है।
कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने अपनी पुस्तक ‘वीर सतसई’ किस भाषा में लिखी है -
सही उत्तर: डिंगल
व्याख्या (Explanation)
कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘वीर सतसई’ डिंगल भाषा में लिखी है। डिंगल भाषा राजस्थान की एक प्राचीन और वीर रस प्रधान साहित्यिक भाषा है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से राजस्थानी वीरों की गाथाओं और प्रशंसा के लिए किया जाता था।