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राजस्थानी भाषा एवं बोलियां PYQ in Hindi - पेज 21

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थानी भाषा एवं बोलियां से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 219 प्रश्नों में से यह पेज 21 है।

201

राजस्थानी भाषा का उत्पति काल है -

Aतेहरवीं शताब्दी का प्रारम्भीक काल
Bबाहरवीं शताब्दी का अन्तिम चरण
Cग्याहरवीं शताब्दी
Dचैदहवीं शताब्दी

सही उत्तर: बाहरवीं शताब्दी का अन्तिम चरण

202

जयपुर (शेखावटी के अतिरिक्त) और टोंक तथा अजमेर के कुछ क्षेत्रों में किस भाषा का प्रचलन है -

Aमारवाड़ी
Bढूंढाड़ी
Cमालवी
Dमेवात

सही उत्तर: ढूंढाड़ी

203

बूंदी, कोटा तथा उदयपुर के पूर्वी भाग में किस भाषा का प्रचलन है -

Aमेवाड़ी
Bढूंढाड़ी
Cहाड़ौती
Dमेवाती

सही उत्तर: हाड़ौती

व्याख्या (Explanation)

हाड़ा राजपूतों के राज्य से संबंधित क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़) को हाड़ौती बोली का क्षेत्र माना जाता है। इसे ढूंढाड़ी की उपबोली माना जाता है। हाड़ौती पर प्राचीनकाल में हूणों एवं गुर्जरों के सम्पर्क का प्रभाव भी देखा जा सकता है।

204

निम्नलिखित में से किस स्थान पर ढंूढाडी नहीं बाली जाती है -

Aसीकर
Bकिशनगढ़
Cजयपुर का अधिकांश भाग
Dटोंक

सही उत्तर: सीकर

205

निम्नलिखित में से किस क्षेत्र के बोली मेवाती है -

Aअलवर
Bभरतपुर
Cधौलपुर
Dये सभी

सही उत्तर: ये सभी

व्याख्या (Explanation)

पूर्वोत्तर राजस्थान के अलवर, भरतपुर में ‘मेव’ जाति का आधिक्य होने इसे ‘मेवात क्षेत्र कहा गया है। इस क्षेत्र में मेवाती बोली का विशेष महत्त्व है। इस क्षेत्र को पूर्वकाल में मत्स्य जनपद कहा जाता था। मेवाती बोली का क्षेत्र – अलवर, भरतपुर, धौलपुर, और करौली के पूर्वी भाग में बोली जाती है।

206

राजस्थान की किस बोली पर मराठी भाषा का भी कुछ प्रभाव है -

Aमारवाड़ी
Bमेवाड़ी
Cहाड़ौती
Dमालवी

सही उत्तर: मालवी

व्याख्या (Explanation)

प्राचीन मालव क्षेत्र की बोली मालवी कहलाती है। यह बोली राजस्थान के झालावाड़, कोटा एवं प्रतापगढ़ के कुछ क्षेत्रों व मध्यप्रदेश के रतलाम, झाबुआ आदि क्षेत्र में बोली जाती है। यह कोमल एवं मधुर बोली है। सम्पूर्ण क्षेत्र में इसकी एकरूपता इसकी विशेषता है। काल रचना में हो, ही के स्थान पर थो, थी का प्रयोग होता है। इस बोली पर गुजराती एवं मराठी भाषा का भी न्यूनाधिक प्रभाव देखने को मिलता है।

207

राजस्थान की किस बोली को जयपुरी या झाड़शाही भी कहा जाता है -

Aमारवाड़ी
Bमेवाड़ी
Cढूंढाड़ी
Dहाडौती

सही उत्तर: ढूंढाड़ी

व्याख्या (Explanation)

पूर्वी राजस्थानी के मध्यपूर्वी भाग या प्राचीन ढूंढाड़ प्रदेश जिसका संबंध आमेर राज्य से रहा है की प्रधान बोली जयपुरी या ढूंढाड़ी है।

208

पृथ्वीराज रासौ की साहित्य शैली में लिखा गया है -

Aपिंगल
Bडिंगल
Cसोरठा
Dभाट

सही उत्तर: पिंगल

209

संत दादू एवं उनके शिष्यों की रचनाएं किस भाषा में है -

Aमेवाड़ी
Bढुंढाडी
Cमारवाड़ी
Dगौड़ावडी

सही उत्तर: ढुंढाडी

व्याख्या (Explanation)

पूर्वी राजस्थानी के मध्यपूर्वी भाग या प्राचीन ढूंढाड़ प्रदेश जिसका संबंध आमेर राज्य से रहा है की प्रधान बोली जयपुरी या ढूंढाड़ी है। आधुनिक राजस्थान में जयपुर, दौसा, बगरू, दूदू तक का क्षेत्र ढूंढाड़ी का क्षेत्र कहा जा सकता है। दादूपंथ का अधिकांश साहित्य इसी बोली में लिपिबद्ध है। ईसाई मिशनरियों ने बाईबिल का ढूंढाड़ी अनुवाद भी प्रकाशित किया था।

210

मेवाडी, हाडौती व ढुंढाड़ी का मिश्रीत रूप है -

Aखैराड़ी
Bरांगड़ी
Cगौडवाडी
Dनीमाड़ी

सही उत्तर: खैराड़ी

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