राजस्थानी भाषा का उत्पति काल है -
सही उत्तर: बाहरवीं शताब्दी का अन्तिम चरण
RPSC & RSMSSB PYQ Practice
इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थानी भाषा एवं बोलियां से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 219 प्रश्नों में से यह पेज 21 है।
राजस्थानी भाषा का उत्पति काल है -
सही उत्तर: बाहरवीं शताब्दी का अन्तिम चरण
जयपुर (शेखावटी के अतिरिक्त) और टोंक तथा अजमेर के कुछ क्षेत्रों में किस भाषा का प्रचलन है -
सही उत्तर: ढूंढाड़ी
बूंदी, कोटा तथा उदयपुर के पूर्वी भाग में किस भाषा का प्रचलन है -
सही उत्तर: हाड़ौती
व्याख्या (Explanation)
हाड़ा राजपूतों के राज्य से संबंधित क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़) को हाड़ौती बोली का क्षेत्र माना जाता है। इसे ढूंढाड़ी की उपबोली माना जाता है। हाड़ौती पर प्राचीनकाल में हूणों एवं गुर्जरों के सम्पर्क का प्रभाव भी देखा जा सकता है।
निम्नलिखित में से किस स्थान पर ढंूढाडी नहीं बाली जाती है -
सही उत्तर: सीकर
निम्नलिखित में से किस क्षेत्र के बोली मेवाती है -
सही उत्तर: ये सभी
व्याख्या (Explanation)
पूर्वोत्तर राजस्थान के अलवर, भरतपुर में ‘मेव’ जाति का आधिक्य होने इसे ‘मेवात क्षेत्र कहा गया है। इस क्षेत्र में मेवाती बोली का विशेष महत्त्व है। इस क्षेत्र को पूर्वकाल में मत्स्य जनपद कहा जाता था। मेवाती बोली का क्षेत्र – अलवर, भरतपुर, धौलपुर, और करौली के पूर्वी भाग में बोली जाती है।
राजस्थान की किस बोली पर मराठी भाषा का भी कुछ प्रभाव है -
सही उत्तर: मालवी
व्याख्या (Explanation)
प्राचीन मालव क्षेत्र की बोली मालवी कहलाती है। यह बोली राजस्थान के झालावाड़, कोटा एवं प्रतापगढ़ के कुछ क्षेत्रों व मध्यप्रदेश के रतलाम, झाबुआ आदि क्षेत्र में बोली जाती है। यह कोमल एवं मधुर बोली है। सम्पूर्ण क्षेत्र में इसकी एकरूपता इसकी विशेषता है। काल रचना में हो, ही के स्थान पर थो, थी का प्रयोग होता है। इस बोली पर गुजराती एवं मराठी भाषा का भी न्यूनाधिक प्रभाव देखने को मिलता है।
राजस्थान की किस बोली को जयपुरी या झाड़शाही भी कहा जाता है -
सही उत्तर: ढूंढाड़ी
व्याख्या (Explanation)
पूर्वी राजस्थानी के मध्यपूर्वी भाग या प्राचीन ढूंढाड़ प्रदेश जिसका संबंध आमेर राज्य से रहा है की प्रधान बोली जयपुरी या ढूंढाड़ी है।
पृथ्वीराज रासौ की साहित्य शैली में लिखा गया है -
सही उत्तर: पिंगल
संत दादू एवं उनके शिष्यों की रचनाएं किस भाषा में है -
सही उत्तर: ढुंढाडी
व्याख्या (Explanation)
पूर्वी राजस्थानी के मध्यपूर्वी भाग या प्राचीन ढूंढाड़ प्रदेश जिसका संबंध आमेर राज्य से रहा है की प्रधान बोली जयपुरी या ढूंढाड़ी है। आधुनिक राजस्थान में जयपुर, दौसा, बगरू, दूदू तक का क्षेत्र ढूंढाड़ी का क्षेत्र कहा जा सकता है। दादूपंथ का अधिकांश साहित्य इसी बोली में लिपिबद्ध है। ईसाई मिशनरियों ने बाईबिल का ढूंढाड़ी अनुवाद भी प्रकाशित किया था।
मेवाडी, हाडौती व ढुंढाड़ी का मिश्रीत रूप है -
सही उत्तर: खैराड़ी