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राजस्थानी भाषा एवं बोलियां PYQ in Hindi - पेज 4

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थानी भाषा एवं बोलियां से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 219 प्रश्नों में से यह पेज 4 है।

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‘वागड़ी’ राजस्थान के किस क्षेत्र में बोली जाती है -

📋 पूछा गया: Junior Instructor (PLM) Exam 2024
Aबांसवाड़ा एवं डूंगरपुर
Bजोधपुर एवं बीकानेर
Cप्रतापगढ़ एवं भीलवाड़ा
Dउदयपुर एवं राजसमंद

सही उत्तर: बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर

व्याख्या (Explanation)

वागड़ी बोलीदक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में बोली जाती है।

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स्रोत: Junior Instructor (PLM) Exam 2024

32

राजस्थानी लिपि को किस रूप में लिखा जाता था - (i) महाजनी (ii) कामदारी (iii) शास्त्री सही विकल्प चुनिये -

📋 पूछा गया: PTI and Librarian (Sanskrit College Edu.) - 2024 (General Studies of Rajasthan)
A(ii), (iii)
B(i), (ii)
C(i), (ii), (iii)
D(i), (iii)

सही उत्तर: (i), (ii), (iii)

व्याख्या (Explanation)

कामदारी : राजस्थानी लिपि लकीर खींच कर घसीट रूप में लिखी जाती है। इस लिपि का विशुद्ध रूप मुख्य रूप से अदालतों (न्यायालयों व दफ्तरों में प्रयुक्त किया जाता था, जिसे कामदारी लिपि कहा जाता था। मुड़िया लिपि : राजस्थानी लिपि को व्यापारी एवं महाजन लोग अपने बहीखातों में विशुद्ध रूप में न लिखकर इसकी अशुद्ध लिपि प्रयुक्त करते हैं, जिसमें विभिन्न अक्षरों पर मात्राओं का प्रयोग एवं विराम चिन्होंका प्रयोग बहुत कम होता है तथा शिरोरेखा भी बहुत कम प्रयुक्त होती है। राजस्थानी लिपि के इसी शुद्ध रूप को मुड़िया लिपि, महाजनी या बाणिया वाटी लिपि कहते हैं। यह शॉर्टलैंड का काम देती है। मुड़िया लिपि के अक्षरों को मुड़िया अक्षर कहते हैं। ये बिना मात्रा वाले शब्द मोड़कर लिखे जाते हैं। इसी कारण इनका नाम मुड़िया अक्षर पड़ गया।

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स्रोत: PTI and Librarian (Sanskrit College Edu.) - 2024 (General Studies of Rajasthan)

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राजस्थानी भाषा के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए - (अ) मध्यकालीन राजस्थानी भाषा में “गीत” और “दूहा” प्रमुख छंद थे। (ब) इस समय पिंगल भाषा का प्रचलन हुआ, जिस पर ब्रज भाषा का प्रभाव था। नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए -

📋 पूछा गया: PTI and Librarian (Sanskrit College Edu.) - 2024 (General Studies of Rajasthan)
A(अ) एवं (ब) दोनों सही हैं।
Bकेवल (ब) सही है।
C(अ) एवं (ब) दोनों सही नहीं हैं।
Dकेवल (अ) सही है।

सही उत्तर: (अ) एवं (ब) दोनों सही हैं।

व्याख्या (Explanation)

मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य में गीत और दूहा (दोहा) महत्वपूर्ण छंद थे, जो कविता और लोक साहित्य में प्रचलित थे। इस समय पिंगल भाषा का प्रचलन हुआ, जिस पर ब्रज भाषा का प्रभाव था। डॉ. नामवर सिंह का मानना है की पूर्वी राजस्थानी ब्रजभाषा से प्रभावित है जबकि पश्चिमी राजस्थानी गुजरती से समानता रखती है। राजस्थानी भाषा में इन्हे डिंगल व पिंगल के नाम से जाना जाता है। पूर्वी राजस्थानी का साहित्यिक रूप पिंगल व पश्चिमी राजस्थान का साहित्यिक रूप डिंगल माना जाता है।

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स्रोत: PTI and Librarian (Sanskrit College Edu.) - 2024 (General Studies of Rajasthan)

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कवि शंकर राव द्वारा रचित ‘भीम विलास’ राजस्थानी की किस बोली में लिखी गई है -

📋 पूछा गया: AGRICULTURE OFFICER (AGRI. DEPTT.) COMP. EXAM - 2024
Aमेवाड़ी
Bबागड़ी
Cढूंढाड़ी
Dअहीरवाटी

सही उत्तर: अहीरवाटी

व्याख्या (Explanation)

अहीरवाटी की साहित्यिक रचनाएँ – नीमराना के राजा चन्द्रभानसिंह चौहान के दरबारी कवि जोधराज ने ‘हम्मीर रासो’ महाकाव्य की रचना इसी बोली में की थी। यहीं पर कवि शंकर राव ने ‘भीम विलास’ नामक सुन्दर ऐतिहासिक काव्य की रचना की थी।

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स्रोत: AGRICULTURE OFFICER (AGRI. DEPTT.) COMP. EXAM - 2024

35

थली और गोडवाड़ी किस बोली की उप-बोलियां हैं -

📋 पूछा गया: Junior Instructor (COPA) Exam 2024
Aहाड़ौती
Bमेवाती
Cमारवाड़ी
Dमेवाड़ी

सही उत्तर: मारवाड़ी

व्याख्या (Explanation)

थली और गोडवाड़ी मारवाड़ी बोली की उप-बोलियां हैं, जो राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में बोली जाती हैं। मारवाड़ी की बोलियां : मेवाड़ी, वागड़ी, शेखावाटी, बीकानेर, ढककी, थली, खैराड़ी, नागौरी, देवड़ापाड़ी, गौड़वाड़ी। गौड़वाड़ी : जालौर जिले की आहोर तहसील के पूर्वी भाग से प्रारम्भ हेाकर बाली(पाली) में बोली जाने वाली यह मारवाड़ी की उपबोली है। बीसलदेव रासौ इस बोली की मुख्य रचना है।

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स्रोत: Junior Instructor (COPA) Exam 2024

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कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बाराँ क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली का नाम बताइए। निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:

📋 पूछा गया: Animal Attendant 2023 Exam (December 2 Shift I)
Aढूंढाड़ी
Bमेवाती
Cहाड़ौती
Dभीली

सही उत्तर: हाड़ौती

व्याख्या (Explanation)

हाड़ौती राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र (कोटा, बूंदी, झालावाड़, बाराँ) में बोली जाने वाली प्रमुख बोली है। हाड़ा राजपूतों के राज्य से संबंधित क्षेत्र को हाड़ौती बोली का क्षेत्र माना जाता है। इसे ढूंढाड़ी की उपबोली माना जाता है। हाड़ौती पर प्राचीनकाल में हूणों एवं गुर्जरों के सम्पर्क का प्रभाव भी देखा जा सकता है। इस बोली में वर्तमानकाल के लिए ‘छै’ एवं भूतकाल के लिए ‘छी’, ‘छो’ का प्रयोग किया जाता है।

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स्रोत: Animal Attendant 2023 Exam (December 2 Shift I)

37

नीमराना के राजा चन्द्रभान सिंह चौहान के दरबारी कवि जोधराज ने किस महाकाव्य की रचना अहीरवाटी बोली में की थी -

Aढोला-मारू
Bमूमल
Cहम्मीर रासो
Dबीसलदेव रासो

सही उत्तर: हम्मीर रासो

व्याख्या (Explanation)

अहीरवाटी की साहित्यिक रचनाएँ – नीमराना के राजा चन्द्रभानसिंह चौहान के दरबारी कवि जोधराज ने ‘हम्मीर रासो’ महाकाव्य की रचना इसी बोली में की थी। यहीं पर कवि शंकर राव ने ‘भीम विलास’ नामक सुन्दर ऐतिहासिक काव्य की रचना की थी।

38

वागड़ी बोली में ‘च’ और ‘छ’ ध्वनि का उच्चारण किस रूप में किया जाता है -

A
B
C
D

सही उत्तर:

व्याख्या (Explanation)

राजस्थान का डूंगरपुर और बाँसवाड़ा का सम्मिलित क्षेत्र ‘वागड़’ कहलाता है इस क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली ‘वागड़ी’ कहलाती है। यह क्षेत्र गुजरात के निकट होने के कारण इस बोली पर गुजराती प्रभाव परिलक्षित होता है। यह बोली मेवाड़ के दक्षिणी भाग, अरावली प्रदेश एवं मालवा तक बोली जाती है। ग्रियर्सन ने इसे ‘भीली बोली’ कहा है। इसमें ‘च’ और ‘छ’ का उच्चारण ‘स’ किया जाता है तथा भूतकालिक सहायक क्रिया ‘था’ के स्थान पर ‘हतो’ का प्रयोग किया जाता है।

39

ढूँढाड़ी बोली में भूतकाल के लिए कौन-कौन से शब्द प्रयोग किए जाते हैं -

Aछै, छो
Bछी, छौ
Cहो, ही
Dहतो, होतो

सही उत्तर: छी, छौ

व्याख्या (Explanation)

पूर्वी राजस्थानी के मध्यपूर्वी भाग या प्राचीन ढूंढाड़ प्रदेश जिसका संबंध आमेर राज्य से रहा है की प्रधान बोली जयपुरी या ढूंढाड़ी है। आधुनिक राजस्थान में जयपुर, दौसा, बगरू, दूदू तक का क्षेत्र ढूंढाड़ी का क्षेत्र कहा जा सकता है। इस बोली में वर्तमान काल के लिए, ‘छै’ एवं भूतकाल के लिए ‘छी’, ‘छौ’ का प्रयोग होता है। यह बोली गुजराती एवं ब्रजभाषा से प्रभावित है। इसके करीब 15 रूप सुनने को मिलते है।

40

1961 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थानी भाषा की बोलियों की संख्या कितनी मानी गई थी -

A52
B73
C85
D101

सही उत्तर: 73

व्याख्या (Explanation)

1961 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार राजस्थानी की 73 बोलियाँ मानी गई है, तथा राजस्थानी वक्ताओं की संख्या 14933016 थी।वक्ताओं की दृष्टि से भारतीय भाषाओँ व बोलियों में राजस्थानी का 7वां व विश्व भाषाओँ में 24वां स्थान है। राजस्थान के लिए कहा जाता है की यहाँ हर 10 कोस पर पगड़ी का पेच और बोली में सहजता से अंतर आ जाता है।

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