मारवाड़ी बोली के साहित्यिक रूप को क्या कहा जाता है, जिसमें अधिकांश जैन साहित्य लिखा गया है -
सही उत्तर: डिंगल
व्याख्या (Explanation)
राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र की बोली को ‘मारवाड़ी’ का नाम दिया गया। मारवाड़ के विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र के कारण इस बोली का सर्वाधिक महत्त्व रहा है। इसमें साहित्य सृजन भी अपेक्षाकृत अधिक हुआ है। मारवाड़ी बोली के साहित्यिक रूप को डिंगल कहा जाता है। अधिकांश जैन साहित्य इसी बोली में ही लिखा गया है। विशुद्ध मारवाड़ी जोधपुर क्षेत्र में बोली जाती है। इसके अतिरिक्त पाली, बीकानेर, नागौर, सिरोही, जैसलमेर, आदि जिलों में भी यह बोली बोली जाती है।