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राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ PYQ in Hindi - पेज 32

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 367 प्रश्नों में से यह पेज 32 है।

311

ताम्रयुगीन स्थल झाड़ोल कहां स्थित है -

Aचित्तौड़
Bनागौर
Cउदयपुर
Dजालौर

सही उत्तर: उदयपुर

व्याख्या (Explanation)

झाड़ोल, उदयपुर में स्थित है।

312

निम्नलिखित में से कौन-से स्थल को ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है -

📋 पूछा गया: Livestock Assistant Exam 2018
Aविराटनगर
Bआहड़
Cकालीबंगा
Dपीलीबंगा

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है। दसवीं व ग्याहरवीं शताब्दी में इसे ‘आघाटपुर’ अथवा ‘आघट दुर्ग’ के नाम से जाना जाता था। इसे ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है।

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स्रोत: Livestock Assistant Exam 2018

313

निम्नलिखित में से किस उत्खनन स्थल से चांदी की मुद्रा ‘पंचमार्क’ प्राप्त हुई -

Aकालीबंगा
Bआहड़
Cगणेश्वर
Dबैराठ

सही उत्तर: बैराठ

व्याख्या (Explanation)

प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ) में ‘बीजक की पहाड़ी’, ‘भीमजी की डूँगरी’ मोती डूंगरी तथा ‘महादेवजी की डूँगरी’ आदि स्थानों पर उत्खनन कार्य दयाराम साहनी द्वारा 1936-37 में तथा पुनः 1962-63 में पुरातत्वविद् नीलरत्न बनर्जी तथा कैलाशनाथ दीक्षित द्वारा किया गया। यहां से 36 चांदी के सिक्के प्राप्त हुए हैं 36 में से 28 सिक्के हिन्द - युनानी राजाओं के है। 28 में से 16 सिक्के मिनेण्डर राजा(प्रसिद्ध हिन्द - युनानी राजा) के मिले हैं। शेष 8 सिक्के प्राचीन भारत के सिक्के आहत(पंचमार्क) है।

314

निम्न में से कौनसा कथन गलत है -

📋 पूछा गया: VDO Exam 2nd Shift 28 Dec 2021
Aमहासतियों वाला टीला - बागोर
Bगोफण के प्रमाण - बागोर
Cबर्ड राइडर राॅक पेटिंग्स - ओझियाना
Dप्राचीन जाख बाबा की यक्ष मूर्ति-नोह

सही उत्तर: बर्ड राइडर राॅक पेटिंग्स - ओझियाना

व्याख्या (Explanation)

आहड़ संस्कृति से सम्बन्धित पुरास्थल ओझियाना भीलवाड़ा जिले में स्थित है। इस पुरास्थल का उत्खनन सन् 1999-2000 में किया गया था। गरदड़ा - बूंदी से प्रथम बर्ड राइडर राॅक पेंटिंग के शैल चित्र मिले हैं। यह देश में प्रथम पुरातत्व महत्व की पेंन्टिंग है।

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स्रोत: VDO Exam 2nd Shift 28 Dec 2021

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डा. दयाराम साहनी ने सर्वप्रथम बैराठ के किस स्थान को उत्खन्न के लिए चिन्हित किया -

Aबीजक डूंगरी
Bभौमजी डूंगरी
Cगणेश डूंगरी
Dभीम डूंगरी

सही उत्तर: बीजक डूंगरी

व्याख्या (Explanation)

प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ) में ‘बीजक की पहाड़ी’, ‘भीमजी की डूँगरी’ मोती डूंगरी तथा ‘महादेवजी की डूँगरी’ आदि स्थानों पर उत्खनन कार्य दयाराम साहनी द्वारा 1936-37 में तथा पुनः 1962-63 में पुरातत्वविद् नीलरत्न बनर्जी तथा कैलाशनाथ दीक्षित द्वारा किया गया।

316

राज्य में सर्वप्रथम पशुपालन के प्रमाण किस स्थान से प्राप्त हुए हैं -

Aबागोर
Bबालाथल
Cरैढ़
Dसुनारी

सही उत्तर: बागोर

व्याख्या (Explanation)

भीलवाड़ा कस्बे से 25 किलोमीटर दूर कोठारी नदी के किनारे वर्ष 1967-68 में डॉ. वीरेंद्रनाथ मिश्र, डॉ. एल.एस. लेश्निक व डेक्कन कॉलेज पूना और राजस्थान पुरातत्व विभाग के सहयोग से की गयी खुदाई में 3000 ई.पू. से लेकर 500 ई.पू. तक के काल की बागौर सभ्यता का पता लगा। बागौर से कृषि एवं पशुपालन के प्राचीनतम् साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

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राजस्थान की वह सभ्यता जिसे ताम्रयुगीन सभ्यता की जननी कहा जाता है -

Aआहड़
Bगणेश्वर
Cनोह
Dबैराठ

सही उत्तर: गणेश्वर

व्याख्या (Explanation)

गणेश्वर का टीला, नीम का थाना में कांतली नदी के उद्गम स्थल पर अवस्थित है। गणेश्वर में रत्नचंद्र अग्रवाल ने 1977 में खुदाई कर इस सभ्यता पर प्रकाश डाला। डी.पी. अग्रवाल ने रेडियो कार्बन विधि एवं तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर इस स्थल की तिथि 2800 ईसा पूर्व निर्धारित की है अर्थात् गणेश्वर सभ्यता पूर्व-हड़प्पा कालीन सभ्यता है। ताम्रयुगीन सांस्कृतिक केन्द्रों में से प्राप्त तिथियों में यह प्राचीनतम् है। इस प्रकार गणेश्वर संस्कृति को निर्विवाद रूप से ‘भारत में ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ माना जा सकता है।

318

अमलानन्द घोष ने (1951-52 ई.) सर्वप्रथम किस स्थल की खोज की -

Aबैराठ
Bगणेश्वर
Cकालीबंगा
Dआहड़

सही उत्तर: कालीबंगा

व्याख्या (Explanation)

कालीबंगा का पता ‘पुरातत्व विभाग के निदेशक ए. एन. घोष’ ने सन् 1952 में लगाया था। सन् 1961-69 तक नौ सत्रों में बी. के. थापर, जे. वी. जोशी तथा बी. बी. लाल के निर्देशन में इस स्थल की खुदाई की गयी। कालीबंगा स्वतंत्र भारत का वह पहला पुरातात्विक स्थल है जिसका स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्खनन किया गया तत्पश्चात् रोपड़ का उत्खनन किया गया।

319

ताम्रवती नगरी के नाम से विख्यात पुरास्थल जिसे धूलकोट के नाम से भी पुकारा जाता है -

Aबैराठ
Bआहड़
Cगणेश्वर
Dबालाथल

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है। दसवीं व ग्याहरवीं शताब्दी में इसे ‘आघाटपुर’ अथवा ‘आघट दुर्ग’ के नाम से जाना जाता था। इसे ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है।

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निम्न में से किस स्थल को ताम्रवती नगरी के नाम से भी जाना जाता था -

Aबैराठ
Bआहड़
Cकालीबंगा
Dबागौर

सही उत्तर: आहड़

व्याख्या (Explanation)

उदयपुर से तीन किलोमीटर दूर 500 मीटर लम्बे धूलकोट के नीचे आहड़ का पुराना कस्बा दवा हुआ है जहाँ से ताम्रयुगीन सभ्यता प्राप्त हुई है। यह सभ्यता बनास नदी पर स्थित है। ताम्र सभ्यता के रूप में प्रसिद्ध यह सभ्यता आयड़/बेड़च नदी के किनारे मौजूद थी। प्राचीन शिलालेखों में आहड़ का पुराना नाम ‘ताम्रवती’ अंकित है।

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