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मेवाड़ का गुहिल वंश PYQ in Hindi - पेज 31

इस पेज पर Rajasthan GK के मेवाड़ का गुहिल वंश से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 443 प्रश्नों में से यह पेज 31 है।

301

निम्नलिखित शासकों में से किसने भीलों को अपनी सैन्य-व्यवस्था में उच्च स्थानों पर नियुक्त किया -

📋 पूछा गया: SCHOOL LECTURER (GS) 2020
Aराय सिंह
Bमालदेव
Cमहाराणा प्रताप
Dचंद्रसेन

सही उत्तर: महाराणा प्रताप

व्याख्या (Explanation)

महाराणा प्रताप ने भीलों को अपनी सैन्य-व्यवस्था में उच्च स्थानों पर नियुक्त किया

📋

स्रोत: SCHOOL LECTURER (GS) 2020

302

खानवा का युद्ध ....... में लड़ा गया -

A1526 ईस्वी
B1556 ईस्वी
C1527 ईस्वी
D1572 ईस्वी

सही उत्तर: 1527 ईस्वी

व्याख्या (Explanation)

खानवा युद्ध राणा सांगा एवं मुगल सम्राट जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर के मध्य 17 मार्च, 1527 ई. को बयाना के पास (वर्तमान रूपबास) हुआ।

303

पन्ना धाय ने जिसके जीवन को बचाया था, वह था -

Aराण सांगा
Bरावल रतनसिंह
Cराण प्रताप
Dराणा उदयसिंह

सही उत्तर: राणा उदयसिंह

व्याख्या (Explanation)

विक्रमादित्य की हत्या कर राणा रायमल के पुत्र पृथ्वीराज का अनौरस पुत्र बनवीर शासक बन बैठा। वह उदयसिंह की हत्या करना चाहता था लेकिन उसकी धाय मां पन्ना ने उदयसिंह की जगह अपने बेटे चन्दन का बलिदान दिया, जो स्वामी भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है।

304

खानवा युद्ध में सांगा के घायल होने पर नेतृत्व किसने संभाला था -

Aझाला अज्जा
Bझाला राव
Cझाला सज्जा
Dशक्ति सिंह

सही उत्तर: झाला अज्जा

व्याख्या (Explanation)

खानवा का युद्ध (17 मार्च, 1527) में राणा सांगा घायल हो गया जिससे युद्ध का मंजर ही बदल गया। हलवद (काठियावाड़) के झाला राजसिंह के पुत्र झाला अज्जा को सांगा के राजचिह्न धारण करवा कर रणक्षेत्र में हाथी के ओहदे पर बिठाया गया। अंतिम रूप से विजय बाबर की हुई।

305

महाराणा प्रताप की छतरी कहां स्थित है -

Aबूंदी
Bगैटोर
Cमाण्डल
Dबाण्डोली

सही उत्तर: बाण्डोली

व्याख्या (Explanation)

प्रताप का चावण्ड के पास बाण्डोली गाँव के निकट बहने वाले नाले के तट पर अग्नि संस्कार हुआ। खेजड़ बांध के किनारे 8 खम्भों की छतरी उस महान योद्धा की याद दिलाती है।

306

किसके शासनकाल में मुगल और मेवाड़ के महाराणा के मध्य ‘चित्तौड़ की संधि’ हुई -

Aअकबर
Bजहांगीर
Cशाहजहां
Dऔरंगजेब

सही उत्तर: जहांगीर

व्याख्या (Explanation)

राज्य की हालत दुष्काल से भी अधिक भयंकर बन गयी। अब तक मेवाड़ युद्धों के कारण जर्जर हो चुका था। अतः सभी सामंतों, दरबारियों एवं कुंवर कर्णसिंह के निवेदन पर राणा अमरसिंह ने अपना मन मारकर मुगलों से 5 फरवरी, 1615 ई. में मुगल-मेवाड़ संधि की। अमरसिंह मुगलों से संधि करने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था। मुगल बादशाह जहाँगीर और मेवाड़ के राणा अमर सिंह के मध्य चित्तौड़ की संधि (1615 ई-) हस्ताक्षरित हुई थी।

307

गोरा और बादल ने किसकी रक्षा की थी -

Aमहाराणा प्रताप
Bरानी पदमिनी
Cराणा उदय सिंह
Dकमलावती

सही उत्तर: रानी पदमिनी

व्याख्या (Explanation)

चित्तौड़ का युद्ध मेवाड़ के शासक रावल रतनसिंह (1302-03 ई.) एवं दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) के मध्य 1303 ई. में हुआ था। रतन सिंह के सेनापति गोरा और बादल के नेतृत्व में राजपूत सैनिकों ने केसरिया वस्त्र धारण कर चित्तौड़ दुर्ग के द्वार खोलकर शत्रु पर टूट पड़े और वीरगति को प्राप्त हुए, गोरा रानी पद्मिनी का चाचा तो बादल रानी पद्मिनी का भाई था। महल के अंदर 1600 स्त्रियों ने रानी पद्मिनी के नेतृत्व में जौहर किया जो चित्तौड़ का प्रथम साका था।

308

मेवाड़ के किस महाराणा के शासनकाल में मेवाड़ महाराणाओं के साथ सती होने की अंतिम घटना का विवरण मिलता है -

Aराजसिंह
Bअमरसिंह-द्वितीय
Cअमरसिंह-प्रथम
Dस्वरूपसिंह

सही उत्तर: स्वरूपसिंह

व्याख्या (Explanation)

15 अगस्त, 1861 को महाराणा स्वरूपसिंह ने सती प्रथा पर रोक लगाने का हुक्म जारी किया। महाराणा ने समाधि प्रथा पर भी रोक लगाई। इनकी मृत्यु 1861 ई. में हुई। स्वरूपसिंह के साथ पासवान ऐंजाबाई सती हुई। यह मेवाड़ महाराणाओं के साथ सती होने की अंतिम घटना थी।

309

उदयपुर स्थित एकलिंगजी मन्दिर का निर्माण किस महाराणा के समय हुआ था -

Aबप्पा रावल
Bजयसिंह
Cमोकल
Dकुम्भा

सही उत्तर: बप्पा रावल

व्याख्या (Explanation)

बापा रावल हारीत ऋषि का शिष्य एवं पाशुपत संप्रदाय का अनुयायी था। अतः उसने पाशुपत एकलिंगजी को अपना आराध्यदेव माना एवं कैलाशपुरी (उदयपुर) में एकलिंगजी का मंदिर बनवाया।

310

महाराणा सांगा के मृत शरीर का दाह संस्कार किस स्थान पर किया गया था -

Aमांडलगढ़
Bकुम्भलगढ़
Cखानवा
Dबसवा

सही उत्तर: मांडलगढ़

व्याख्या (Explanation)

खानवा के युद्ध के बाद जब सांगा के साथियों ने देखा कि इस बार पराजय से मेवाड़ का सर्वनाश होगा तो उन्होंने मिलकर उसे विष दे दिया, जिसके फलस्वरूप 30 जनवरी, 1528 को 46 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गयी। उसका शव कालपी से माण्डलगढ़ ले जाया गया जहाँ उसका समाधि-स्थल आज भी उस महान् योद्धा का स्मरण दिला रहा है।

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