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राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था PYQ in Hindi - पेज 3

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 59 प्रश्नों में से यह पेज 3 है।

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परगने में कोई बड़ा अपराध या संगीन डकैती होने पर फौजदार और कभी-कभी ठाकुर स्वयं सवारों के साथ डाकुओं के विरूद्ध अभियान पर जाते थे। इस अभियान को मारवाड़ में क्या कहते थे -

Aफौजदार
Bपोतदार
Cहवालगिर
Dबाहर चढ़ना

सही उत्तर: बाहर चढ़ना

व्याख्या (Explanation)

ठिकानेदार व भोम बाब दोनों अपने क्षेत्रों में डकैती व अन्य जुर्म को रोकने का कार्य तथा यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाते थे। संगीन डकैती पड़ने पर फौजदार और कभी-कभी ठाकुर स्वयं सवारों के साथ डाकुओं के विरुद्ध अभियान में जाते थे। जोधपुर राज्य में इसे “बाहर चढ़ना” कहते थे।

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निम्न में से कौनसा जोड़ा सही सुमेलित नहीं है- इकाई - अधिकारी

Aग्राम - ग्रामिक
Bमण्डल - मण्डलिक
Cदुर्ग - दुर्गाधिपति
Dपरगना - हाकिम

सही उत्तर: मण्डल - मण्डलिक

व्याख्या (Explanation)

मण्डल के अधिकारी को मण्डलपति कहा जाता था।

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किस राज्य में लूट-खसोट से राज्य को बचाने के लिए नए सैनिक दायित्वों की पूर्ति हेतु रुखवाली भाछ लागू की गई थी -

Aजोधपुर
Bबीकानेर
Cउदयपुर
Dकोटा

सही उत्तर: बीकानेर

व्याख्या (Explanation)

बीकानेर राज्य में लूट-खसोट से राज्य को बचाने के लिए नए सैनिक दायित्वों की पूर्ति हेतु रुखवाली भाछ लागू की गई थी।

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निम्नलिखित में से असंगत कथन की पहचान करें।

Aपटेल, कानूनगो, तहसीलदार, पटवारी आदि जो किसान से अवैध रकम वसुलते थे, उसे दस्तुर कहते थे
Bराम-राम लाग या मुजरा लाग जिसे प्रति व्यक्ति 1 रुपया लिया जाता था।
Cकिसान के घर कन्या की शादी होने पर जागीरदार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता ‘बदोले री लाग’ कहलाता है।
Dश्रमजीवी जातियों जैसे मोची, धोबी, छीपा व कुम्हार आदि से वसूला जाने वाला कर खरड़ा लाग कहलाता था।

सही उत्तर: किसान के घर कन्या की शादी होने पर जागीरदार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता ‘बदोले री लाग’ कहलाता है।

व्याख्या (Explanation)

जागीरदार के घर पर विवाह होने पर जागीर क्षेत्र से वसूल की जाने वाली लाग बंदोले री लाग/कर कहलाती थी।

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जोधपुर राज्य में विधवा के पुनर्विवाह पर प्रति विवाह 1 रु. की दर से कर लिया जाता था, जिसे ‘कागली या नाता’ कहा जाता था इसी प्रकार का कर जयपुर राज्य में क्या कहलाता था -

Aछेली राशि
Bनाता बराड़
Cनाता कागली
Dनाता

सही उत्तर: छेली राशि

व्याख्या (Explanation)

कागली या नाता कर को मेवाड़ में ‘नाता बराड़’, कोटा राज्य में ‘नाता कागली’ व बीकानेर राज्य में ‘नाता’ कहा जाता था।

26

बख्शी के बारे में निम्न कथनों पर विचार करें। (i) दीवान के बाद दूसरा महत्वपूर्ण पदाधिकारी बख्शी होता था, जो प्रधानतः सेना विभाग का अध्यक्ष होता था। (ii) जयपुर में बख्शी को बख्शी देश, बख्शी परगना और बख्शी जागीर सहायता करते थे। (iii) जोधपुर राज्य में इसे ‘मौज बख्शी’ भी कहते थे। (iv) मारवाड़ में महाराजा बख्तसिंह के काल में सर्वप्रथम ‘प्याद बख्शी’ नामक एक नवीन पद का सर्जन किया गया। सही विकल्प का चयन करें।

Ai, ii व iv
Bi,iii व iv
Ciii व iv
Di,ii, iii व iv

सही उत्तर: i, ii व iv

व्याख्या (Explanation)

जोधपुर राज्य में इसे ‘फौज बख्शी’ कहा जाता था।

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निम्नलिखित में से ग्राम प्रशासन के बारे में कौनसा कथन सत्य नहीं है -

Aग्राम पंचायत ग्रामों ने न्याय, झगड़े निपटाना, धार्मिक व सामाजिक कार्य करवाती थी।
Bजाति सम्बन्धी समस्याओं का समाधान जाति पंचायत द्वारा किया जाता था।
Cगांव में प्रशासनिक स्तर पर स्थायी रूप में स्थानीय अधिकारी ‘पटवारी’ होता था।
Dपंचायतों के निर्णय की अपील परगना पदाधिकारी, दीवान व शासक के पास की जा सकती थी।

सही उत्तर: गांव में प्रशासनिक स्तर पर स्थायी रूप में स्थानीय अधिकारी ‘पटवारी’ होता था।

व्याख्या (Explanation)

गांव में प्रशासनिक स्तर पर स्थायी रूप में स्थानीय अधिकारी ‘चौधरी या पटेल’ होता था।

28

सेना का दूसरा प्रमुख अंग घुड़सवार था, किस राज्य में घुड़सवार सेना माधव रिसाला और राज्य रिसाला में विभाजित थी -

Aकोटा
Bजोधपुर
Cबीकानेर
Dजयपुर

सही उत्तर: कोटा

व्याख्या (Explanation)

कोटा में घुड़सवार सेना माधव रिसाला और राज्य रिसाला में विभाजित थी।

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भूमि के उर्वरा व पैदावार के आधार पर जब बीघे पर लगे कर से राजस्व वसूल होता था, तब मारवाड़ व बीकानेर में इसे क्या कहा जाता था -

Aबीघोड़ी
Bलंक बंटाई
Cखेतबंटाई
Dगल्ला बक्शी

सही उत्तर: बीघोड़ी

व्याख्या (Explanation)

मारवाड़ व बीकानेर में इसे बीघोड़ी कहा जाता था।

30

निम्नलिखित में से असत्य विकल्प का चयन करें।

Aप्रत्येक किसान के परिवार के प्रत्येक सदस्य से 1 रु. की दर से वसूला जाने वाला कर अंगा कर या अंग लाग कहलाता था।
Bराज्याभिषेक, जन्मदिन तथा त्योहारों के अवसर पर लगने वाले दरबारों के समय सामन्तों, जागीरदारों, मुत्सद्दी व अधिकारियों द्वारा राजा को दी जाने वाली भेंट ‘नजराना’ कहलाती थी।
Cपशुओं की बिक्री पर लिया जाने वाला कर लाटा कहलाता था।
Dखेत में खड़ी फसल का अनुमान लगाकर भूस्वामी अपना हिस्सा तय कर देते थे, जिसे कूंता कहते थे।

सही उत्तर: पशुओं की बिक्री पर लिया जाने वाला कर लाटा कहलाता था।

व्याख्या (Explanation)

पशुओं की बिक्री पर लिया जाने वाला कर सिंगोटी कहलाता था।

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