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राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था PYQ in Hindi - पेज 4

इस पेज पर Rajasthan GK के राजस्थान की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। कुल 59 प्रश्नों में से यह पेज 4 है।

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न्याय व्यवस्था के बारे में विचार करें - (i) न्याय और दण्ड का आधार प्राचीन धर्मशास्त्र थे। (ii) प्राचीन साहित्यिक स्त्रोतों ‘वृहत्कथा कोष व समराइच्छकहा’ से भी न्याय व्यवस्था का वर्णन मिलता है। (iii) शासन की सबसे छोटी इकाई गाँव था, जहाँ न्याय का अधिकारी ग्राम चौधरी या पटेल हुआ करता था। (iv) परगनों में न्याय का कार्य, हाकिम या आमिल या हवलगिर करता था। सही कूट का चयन कर उत्तर दीजिए-

Ai, ii व iv
Bi, ii, iii व iv
Ci, ii व iii
Dइनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: i, ii, iii व iv

व्याख्या (Explanation)

न्याय का आधार परम्परागत सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्था थी। मुकदमों का कोई लिखित रिकार्ड नहीं रखा जाता था। गवाही सम्बन्धित कोई पृथक अधिनियम नहीं था।

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दीवान के पद पर सामान्यतः गैर राजपूत जाति के व्यक्तियों को नियुक्त किया जाता था। दीवान को निम्न में से किस पदाधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार प्राप्त नहीं था -

Aआमिल
Bफौजदार
Cकोतवाल
Dपोतदार

सही उत्तर: पोतदार

व्याख्या (Explanation)

दीवान को आमिल, कोतवाल, अमीन, दरोगा मुशरिफ, वाकयानवीस व फौजदार आदि पदाधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार था।

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राजपूत सेना में पैदल सैनिक अधिक होते थे, इनके दल को क्या कहा जाता था -

Aअहदी
Bभाकसी
Cप्यादे
Dशरीअत

सही उत्तर: प्यादे

व्याख्या (Explanation)

पैदल सैनिक दल को प्यादे कहा जाता था।

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अधिकारी, जिसे मुगल काल में विद्वानों को गुजारा भत्ता (मदद-ए-माश) प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गयी थी, को किस नाम से जाना जाता था -

Aवकील
Bवज़ीर
Cसद्र
Dमीर बक्शी

सही उत्तर: सद्र

व्याख्या (Explanation)

अधिकारी, जिसे मुगल काल में विद्वानों को गुजारा भत्ता (मदद-ए-माश) प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गयी थी, को 'सद्र' नाम से जाना जाता था।

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निम्नलिखित में से असत्य विकल्प का चयन करें।

Aअमात्य - मुख्यमंत्री
Bबंदीपति - मुख्य भाट
Cभीषगाधिराज - प्रधानमंत्री
Dसंधिविग्रहिक - संधि और युद्ध का मंत्री

सही उत्तर: भीषगाधिराज - प्रधानमंत्री

व्याख्या (Explanation)

भीषगाधिराज-मुख्य वैद्य ।

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मुगल दरबार में राजा द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि, जो वहाँ की गतिविधियों से निरंतर राजा को अवगत करवाता रहता था वह क्या कहलाता था -

Aखुफिया नवीस
Bहाकिम खैरात
Cपोतदार
Dवकील

सही उत्तर: वकील

व्याख्या (Explanation)

वकील रिपोर्ट : मनसबदार, जागीरदार एवं अन्य सरदार मुगल दरबार में अपने प्रतिनिधि नियुक्त करते थे, जिनको ‘वकील’ कहा जाता था। वे अपने रियासती स्वामी से संबंधित खबरों का संकलन कर दरबार की गतिविधियाँ अपनी रियासत को भेजा करते थे। उनके द्वारा भेजी गई इन सूचनाओं को ‘वकील रिपोर्ट’ कहा जाता था।

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उच्च वर्ग के लोगों या विद्वानों को राजस्व मुक्त भूमि अनुदान के रूप में दी जाती थी, यह भूमि क्या कहलाती थी -

Aमाफी
Bजूनी जागीर
Cमदद-ए-माश
Dजीविका

सही उत्तर: मदद-ए-माश

व्याख्या (Explanation)

मुगल साम्राज्य में ‘मदद-ए-माश’ को ‘सयूरगल’ भूमि भी कहा जाता था।

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मध्यकालीन शासन व्यवस्था में मारवाड़ में बापीदार व गैर-बापीदार किसके प्रकार थे -

Aसामन्तों के
Bजागीरदारों के
Cघुड़सवारों के
Dकास्तकारों के

सही उत्तर: कास्तकारों के

व्याख्या (Explanation)

कृषक मुख्यतः दो प्रकार के होते थे- बापीदार और गैरबापीदार, बापीदार किसान को खुदकाश्तकार भी कहते थे, यह वह किसान होते थे जो खेती की जाने वाली भूमि का स्थाई स्वामी होता था।

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निम्नलिखित में से असत्य कथन नहीं है -

Aएक राजा का दूसरे राजा के साथ किया जाने वाला पत्र व्यवहार रूक्का कहलाता था।
Bबादशाह की मौजूदगी में शहजादे द्वारा जारी किया गया शाही आदेश-मन्सूर कहलाता था।
Cमुगल बादशाह द्वारा अपने अधीनस्थ को जागीर प्रदान करने की लिखित स्वीकृति वाक्य कहलाती थी।
Dराजा द्वारा अपने अधीनस्थ को जारी किया जाने वाला आदेश फरमान कहलाता था।

सही उत्तर: बादशाह की मौजूदगी में शहजादे द्वारा जारी किया गया शाही आदेश-मन्सूर कहलाता था।

व्याख्या (Explanation)

एक राजा का दूसरे राजा के साथ किया जाने वाला पत्र व्यवहार खरीता कहलाता था। मुगल बादशाह द्वारा अपने अधीनस्थ को जागीर प्रदान करने की लिखित स्वीकृति सनद कहलाती थी। राजा द्वारा अपने अधीनस्थ को जारी किया जाने वाला आदेश परवाना कहलाता था।

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ईजारा जाना जाता है-

Aभूमि मूल्यांकन के लिए
Bमुद्रा परिवर्तन के लिए
Cराजस्व की ठेका प्रणाली के लिए
Dस्वर्ण की खरीद के लिए

सही उत्तर: राजस्व की ठेका प्रणाली के लिए

व्याख्या (Explanation)

इसे ठेका (अनुबंध) या अंकबंदी के नाम से भी जाना जाता था। इस प्रणाली के तहत कुछ परगना या क्षेत्र का भू-राजस्व एकत्र करने का अधिकार सार्वजनिक नीलामी द्वारा उच्चतम बोली लगाने वाले को बेच दिया जाता था, जिसे राज्य को एकमुश्त राशि के भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता था।

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